स्कूल में कुत्ता घुसा, तो हेडमास्टर की होगी छुट्टी, शिक्षा विभाग ने जारी किया फरमान, कहा, स्कूलों में कुत्ते घुसे तो, हेडमास्टर होंगे जिम्मेदार
If a dog enters the school premises, the headmaster will be suspended; the education department has issued an order stating that headmasters will be held responsible if dogs enter schools.

School News : स्कूल में अगर कुत्ता घुसा, तो हेडमास्टर पर गिरेगी गाज। शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को ये फरमान भेज दिया है। शिक्षा विभाग के इस आदेश के बाद शिक्षक भी सकते में है।
आपको बता दें ये आदेश उस वक्त आया है, जब कल ही सासाराम में शिक्षकों को कुत्ता गिनने की ड्यूटी पर लगाया गया है। अब भागलपुर जिले से खबर है कि सरकारी विद्यालयों में कुत्तों के घुसने पर अब हेडमास्टरों को अल्टीमेटम दे दिया गया है।
दरअसल ये फैसला बच्चों की सुरक्षा और मध्याह्न भोजन (एमडीएम) की स्वच्छता को लेकर शिक्षा विभाग ने लिया है। निर्देश में साफ है कि स्कूल परिसरों में आवारा कुत्तों के प्रवेश पर रोक नहीं लगी तो प्रधानाध्यापकों समेत संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई तय मानी जाएगी।
स्कूल परिसरों में आवारा कुत्तों की बढ़ती मौजूदगी को गंभीर खतरा मानते हुए विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस दिशा में लापरवाही बरती गई, तो सीधे तौर पर प्रधानाध्यापक (एचएम) जिम्मेदार माने जाएंगे और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (एमडीएम सह एसएसए) बबीता कुमारी ने जिले के उन 1769 सरकारी विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को पत्र जारी किया है, जहां नियमित रूप से मध्याह्न भोजन का संचालन किया जा रहा है। पत्र में स्कूल स्तर पर त्वरित और प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बच्चों को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
पत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि विद्यालय परिसर में आवारा कुत्तों का प्रवेश बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। कई विद्यालयों में यह देखा गया है कि एमडीएम के बाद जूठन और भोजन के अवशेष खुले में फेंक दिए जाते हैं, जिससे कुत्तों का झुंड स्कूल परिसर में जमा हो जाता है।
इससे बच्चों के काटे जाने, डर के माहौल बनने और संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ जाती है। हाल के दिनों में राज्य के विभिन्न जिलों से इस तरह की घटनाएं सामने आई हैं, जिन्हें देखते हुए शिक्षा विभाग ने एहतियाती कदम उठाने का फैसला किया है।
डीपीओ बबीता कुमारी ने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि स्कूल परिसर में आवारा कुत्तों की समस्या पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक के साथ-साथ प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी और जिला स्तर के जिम्मेदार पदाधिकारी भी संयुक्त रूप से उत्तरदायी माने जाएंगे। यानी अब जिम्मेदारी तय होगी और लापरवाही पर कार्रवाई से कोई नहीं बच सकेगा।
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सभी शिक्षण संस्थानों को आठ सप्ताह के भीतर स्कूल की बाउंड्री वॉल, गेट और फेंसिंग को दुरुस्त करने का अल्टीमेटम दिया गया है।
जिन विद्यालयों में बाउंड्री या फेंसिंग क्षतिग्रस्त है या जहां से आवारा जानवरों के घुसने की आशंका है, वहां तत्काल मरम्मत कर रास्तों को बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, यदि स्कूल परिसर में आवारा कुत्ते नजर आते हैं, तो नगर निकाय या संबंधित पंचायत को लिखित सूचना देकर उन्हें हटवाना अनिवार्य किया गया है।
शिक्षा विभाग ने यह भी कहा है कि एमडीएम के बाद भोजन अवशेषों के निस्तारण की व्यवस्था व्यवस्थित तरीके से की जाए, ताकि कुत्तों और अन्य आवारा जानवरों को आकर्षित होने से रोका जा सके। इसके लिए स्कूल स्तर पर साफ-सफाई और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।








