“आपके बिना जीना मुश्किल है बाबा” कल्पना सोरेन ने दिशोम गुरू शिबू सोरेन के नाम लिखी भावुक चिट्ठी, कहा, आपके जाने के बाद आपकी बेटी सी बहू….
"It is difficult to live without you Baba" Kalpana Soren wrote an emotional letter to Dishom Guru Shibu Soren, saying, after your departure, your daughter-in-law is like a daughter....

Shibu Soren News : शिबू सोरेन आज इस दुनिया में नहीं है, लेकिन अभी भी उनकी यादें जेहन से मिट नहीं पा रही है। खासकर सोरेन परिवार के लिए ये पल किसी विपदा से कम नहीं है। हेमंत सोरेन लगातार सोशल मीडिया पर पोस्ट कर अपनी पीड़ा और सूनेपन को बयां कर रहे हैं। अब कल्पना सोरेन ने भी अपना दर्द बयां किया है।
ये तो हर किसी को पता है कि शिबू सोरेन से उनकी बहू कल्पना सोरेन काफी क्लोज थी। हर बड़े मौके पर वो अपने ससुर शिबू सोरेन के साथ नजर आती थी। राजनीतिक पारी की जब कल्पना ने शुरुआत की थी, तो भी उन्होंने शिबू सोरेन से आशीर्वाद लिया था। अपनी श्रद्धांजलि देते हुए कल्पना सोरेन ने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाओं को बयां किया है।
कल्पना सोरेन ने शिबू सोरेन के नाम एक भावुक पाती लिखी है। उन्होंने जो कुछ लिखा है, उसे हम आपके लिए हूबहू प्रस्तुत कर रहे हैं।
प्रिय बाबा,
जब पूरा देश आपको अश्रुपूरित नेत्रों से विदा कर रहा है, मैंने एक कोना पकड़ लिया है। अपनी आधी जिंदगी जिस वटवृक्ष के साये में महफ़ूज़ हो कर काटी – आज आपके जाने से वह बेटी-सी बहू अपनी टूटी हुई हिम्मत बटोरने का साहस नहीं कर पा रही है। मैं जानती हूं, आप सिर्फ मेरे ससुर नहीं थे, आप झारखंड के बाबा थे।
हर उस बच्चे के, जिसने जंगलों की गोद में जन्म लिया, और संघर्ष को पहली सांस में महसूस किया। जब मैं पहली बार इस परिवार में आई, तो आपके व्यक्तित्व पर गौरव हुआ। आपकी सादगी, आपकी आवाज़ में ठहराव, और सबसे ज़रूरी आपका सुनना। आप सुनते थे हर किसान की चिंता, हर औरत का दर्द, हर मां की खामोशी हर झारखंडी के अरमान।
आपने राजनीति को घर की तरह जिया जहाँ सत्ता नहीं, संबंधों का सम्मान होता है। आपके पास बड़ी डिग्रियाँ से भी बड़ी – दृष्टि दूरदर्शी थी। आपने केवल झारखंड को खड़ा नहीं किया हम सबको आत्मनिर्भर होने का हौसला दिया। जब आप “झारखंड” कहते थे, तो वो शब्द भूगोल नहीं, संवेदना बन जाता था। बाबा, मैंने आपको कभी पिता की तरह देखा, कभी एक संत की तरह, और कभी एक तपस्वी की तरह जो न सत्ता चाहता था, न वाहवाही बस अपनी माटी की, अपने लोगों की इज्जत चाहता था।
आज आप नहीं हैं, पर आपकी चाल की गूंज हर गांव के रास्ते पर है। आपकी चप्पलों की खामोशी हर विधानसभा में गूंज रही है। बाबा, आपने झारखंड को छोड़ा नहीं है आप तो हर उस बेटी की आँख में हैं, जो अपने जंगल, अपने खेत, अपने सपनों को बचाना चाहती है। आप हर उस मां की सांस में हैं, जो चाहती है कि उसके बेटे भी एक दिन आपकी तरह “गुरु” एवं सच्चे इंसान बने।
आपका सपना, अब हमारी जिम्मेदारी है। मैं, एक बहू नहीं आपकी बेटी, आपसे वादा करती हूं: “आपका नाम सिर्फ इतिहास में नहीं रहेगा वो हर लड़की के साहस में, हर गांव के संघर्ष में, और झारखंड की हर सांस में जिंदा रहेगा।” आपको झारखंड की हर बेटी का नम्र प्रणाम। आप हमारे संस्कार बन गए हैं। आपके बिना जीना मुश्किल है, पर आपके सपनों को जीना अब हमारा धर्म है।









