जमशेदपुर: रात में दोस्तों से कहा था- अब ठीक हूं… सुबह उसी कमरे में मिला होनहार ओम का शव, पहले कहा था, सांस लेने में हो रही दिक्कत, फिर तबीयत हुई ठीक, लेकिन सुबह होते-होते….
Jamshedpur: He had told friends at night, "I'm fine now"... By morning, the body of the promising Om was found in that very room. He had initially complained of breathing difficulties, then felt better, but by morning...

जमशेदपुर। वह रात भी बाकी रातों की तरह ही थी। हॉस्टल में दोस्त अपने-अपने कमरों में थे। पढ़ाई, बातचीत और अगले दिन की छुट्टी की योजनाएं चल रही थीं। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ घंटों बाद XLRI के इस कैंपस में एक ऐसा सन्नाटा उतरने वाला है, जिसे शायद लंबे समय तक भुलाया नहीं जा सकेगा।
ओम पोद्दार उस रात अपने कमरे में थे। अचानक उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी। ओम अस्थमा के मरीज थे और उस वक्त उनके पास इनहेलर नहीं था। उन्होंने दोस्तों को फोन किया। दोस्त दौड़े और किसी तरह कैंपस से इनहेलर की व्यवस्था की।
इनहेलर लेने के बाद ओम को राहत मिली। उन्होंने दोस्तों से बात की। कहा कि अब बेहतर महसूस कर रहे हैं।दोस्तों ने भी राहत की सांस ली।किसी को क्या पता था कि यह उनकी ओम से आखिरी बातचीतों में से एक होगी।
रात 2.30 बजे दोस्तों ने फिर देखा था ओम को
दोस्त पूरी तरह निश्चिंत भी नहीं थे। रात करीब 2.30 बजे वे ओम का हाल जानने फिर उनके कमरे में पहुंचे।ओम बिस्तर पर थे। गहरी नींद में सो रहे थे और खर्राटे ले रहे थे।दोस्तों को लगा कि शायद दवा और इनहेलर के बाद उन्हें आराम मिल गया है। अगले दिन सुबह क्लास भी नहीं थी। इसलिए दोस्तों ने उन्हें सोने दिया और अपने कमरों में लौट गए।जाते-जाते शायद किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि वे ओम को आखिरी बार जीवित देख रहे हैं।
सुबह बीत गई। दोपहर होने लगी।लेकिन ओम कमरे से बाहर नहीं आए।करीब 12 बजे दोस्तों को फिर चिंता हुई। वे कमरे में पहुंचे। इस बार सामने जो था, उसने सबको भीतर तक हिला दिया। ओम बिस्तर पर थे।लेकिन अब वह नींद नहीं थी।उनका शरीर ठंडा पड़ चुका था।जिस दोस्त को कुछ घंटे पहले उन्होंने कहा था कि अब वह ठीक हैं, वह अब उनके सामने नहीं थे।
डॉक्टरों ने बचाने की कोशिश की, लेकिन…
कैंपस में तुरंत डॉक्टरों को बुलाया गया। XLRI प्रबंधन को सूचना दी गई। डीन (एडमिनिस्ट्रेशन) फादर डोनाल्ड डिसिल्वा खुद मौके पर पहुंचे और ओम को लेकर टाटा मेन हॉस्पिटल पहुंचे। उम्मीद अब भी बाकी थी।लेकिन अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद ओम को मृत घोषित कर दिया।उपलब्ध जानकारी के मुताबिक रात में हुई गंभीर सांस संबंधी परेशानी के बाद कार्डियक अरेस्ट उनकी मौत का कारण बना।
एक फोन कॉल… और फिर हमेशा के लिए खामोशी
ओम की कहानी का सबसे दर्दनाक हिस्सा शायद यही है। एक तरफ दोस्त थे, जो रात में उनकी मदद के लिए दौड़ रहे थे।इनहेलर लेकर आए। रात में कमरे में जाकर देखा, और फिर यह सोचकर लौट गए कि उनका दोस्त अब आराम से सो रहा है। कुछ घंटे बाद वही दोस्त उन्हें जगाने पहुंचे, लेकिन इस बार ओम कभी उठने वाला नहीं था।
सिर्फ पढ़ाई में नहीं, जिंदगी में भी आगे थे ओम
ओम पोद्दार XLRI में बिजनेस मैनेजमेंट के 2025-27 बैच के छात्र थे। पढ़ाई में होनहार होने के साथ वह खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहते थे।उनकी नेतृत्व क्षमता की साथी छात्र और शिक्षक सराहना करते थे।
दोस्तों के बीच उनकी पहचान सिर्फ एक मेधावी छात्र की नहीं थी। वह कैंपस की जिंदगी का हिस्सा थे—हंसने-बोलने वाले, गतिविधियों में आगे रहने वाले और अपने आसपास के लोगों के बीच मौजूद रहने वाले युवा। अब उसी कैंपस में उनकी आवाज नहीं होगी।
पिता ने कहा- उसे जमशेदपुर से बहुत प्यार था
ओम के निधन की खबर मिलते ही कोलकाता से उनके परिजन जमशेदपुर पहुंचे। बेटे को इस हालत में देखकर परिवार का दर्द शब्दों में बयान करना मुश्किल था। लेकिन इसी गहरे दुख के बीच ओम के पिता ने एक भावुक फैसला लिया।उन्होंने कहा कि ओम को जमशेदपुर से बहुत लगाव था। XLRI कैंपस और उसके दोस्तों के साथ उसने यहां अपनी जिंदगी के बेहद खास पल बिताए थे। वह यहां खुश था।इसलिए परिवार ने तय किया कि ओम का अंतिम संस्कार जमशेदपुर में ही किया जाएगा। जिस शहर में ओम अपने सपनों को पूरा करने आया था, वही शहर अब उसे अंतिम विदाई देगा।
XLRI में रविवार को होगी शोक सभा
ओम को श्रद्धांजलि देने के लिए रविवार को XLRI कैंपस में शोक सभा आयोजित की जाएगी। शिक्षक, प्रबंधन और उनके तमाम साथी छात्र वहां मौजूद रहेंगे।शायद वहां कोई दोस्त उस रात को याद करेगा।कोई उस आखिरी बातचीत को।कोई वह रात याद करेगा, जब ओम ने कहा था—“अब ठीक हूं…”और शायद यही दो शब्द उनके दोस्तों के लिए जिंदगी भर की सबसे दर्दनाक याद बन जाएंगे।एक ऐसा युवा, जो अपने सपनों के साथ XLRI आया था, अचानक उन सपनों को अधूरा छोड़कर चला गया।









