झारखंड के 3 जिलों ने HIV नियंत्रण में हासिल किया बड़ा मुकाम, NACO की ‘सेफ’ श्रेणी में मिली जगह; 21 जिलों के सामने अब भी चुनौती
सरायकेला-खरसावां, पूर्वी सिंहभूम और साहिबगंज ने 95-95-95 का लक्ष्य हासिल किया। आठ जिले ‘सक्षम’ श्रेणी में हैं, जबकि 13 जिलों में लक्ष्य पूरा करने के लिए प्रयास तेज करने की जरूरत है।

रांची। झारखंड में एचआईवी संक्रमण पर नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। राज्य के तीन जिलों सरायकेला-खरसावां, पूर्वी सिंहभूम और साहिबगंज ने नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (NACO) का निर्धारित 95-95-95 लक्ष्य हासिल कर लिया है। इस उपलब्धि के साथ तीनों जिलों को ‘सेफ’ यानी सुरक्षित श्रेणी में जगह मिली है। हालांकि, राज्य के सभी 24 जिलों को इस स्तर तक पहुंचाना और हासिल की गई प्रगति को बनाए रखना अब भी बड़ी चुनौती है।
एचआईवी नियंत्रण के लिए निर्धारित 95-95-95 लक्ष्य का उद्देश्य संक्रमित लोगों की पहचान, उपचार और इलाज के जरिए वायरस को दबाने की दिशा में प्रगति करना है। तीन जिलों की उपलब्धि को राज्य के लिए उत्साहजनक माना जा रहा है, लेकिन बाकी जिलों की स्थिति बताती है कि इस दिशा में अभी लगातार काम करने की जरूरत है।
‘सेफ प्लस’ श्रेणी के लिए गर्भवती महिलाओं की शत-प्रतिशत जांच जरूरी
ट्रिपल 95 का लक्ष्य हासिल करने के बाद अब सरायकेला-खरसावां, पूर्वी सिंहभूम और साहिबगंज के सामने ‘सेफ प्लस’ श्रेणी में शामिल होने की चुनौती है। इसके लिए सभी गर्भवती महिलाओं की एचआईवी, सिफलिस और हेपेटाइटिस-बी की शत-प्रतिशत जांच सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही मां से बच्चे में इन संक्रमणों के प्रसार को शून्य तक लाने का लक्ष्य रखा गया है।
इस श्रेणी तक पहुंचने के लिए जांच की व्यापक व्यवस्था, समय पर संक्रमण की पहचान और आवश्यक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना अहम होगा। निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले जिलों को ही ‘सेफ प्लस’ श्रेणी में शामिल किया जा सकेगा।
विश्व एड्स दिवस 2027 तक एचआईवी नियंत्रण का लक्ष्य
नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन ने विश्व एड्स दिवस, यानी 1 दिसंबर 2027 तक देश में एचआईवी पर नियंत्रण हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए 1 दिसंबर 2026 तक सभी जिलों में 95-95-95 का लक्ष्य पूरा करना एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना गया है।
इस अभियान में केवल निर्धारित लक्ष्य हासिल करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके बाद भी प्रगति को लगातार बनाए रखना जरूरी होगा। इसके लिए संक्रमित लोगों की पहचान, उपचार तक उनकी पहुंच और नियमित चिकित्सा देखभाल पर विशेष ध्यान देना होगा।
जेसैक्स के परियोजना निदेशक ने बताया आगे का लक्ष्य
झारखंड स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी (जेसैक्स) के परियोजना निदेशक एवं आईएएस अधिकारी शशि प्रकाश सिंह ने तीन जिलों की उपलब्धि को उत्साहजनक बताया। उन्होंने कहा कि राज्य के तीन जिलों में ट्रिपल 95 का लक्ष्य हासिल होना अच्छी शुरुआत है, लेकिन अब इसे सभी 24 जिलों तक पहुंचाना है।
उन्होंने बताया कि सुरक्षित श्रेणी में शामिल जिलों को ‘सेफ प्लस’ तक पहुंचाने के साथ उन जिलों की स्थिति सुधारने पर भी जोर दिया जाएगा, जो अभी निर्धारित मानकों से पीछे हैं। इसके अलावा अब तक हासिल की गई सफलता को बनाए रखना भी जरूरी है।
आठ जिले ‘सक्षम’ श्रेणी में, दो मानकों पर हासिल किया लक्ष्य
झारखंड के आठ जिले ‘सक्षम’ श्रेणी में शामिल हैं। इनमें लोहरदगा, कोडरमा, गुमला, पश्चिमी सिंहभूम, बोकारो, हजारीबाग, दुमका और रांची शामिल हैं।
इन जिलों ने निर्धारित तीन मानकों में से दो पर 95 प्रतिशत का लक्ष्य हासिल किया है। हालांकि, तीसरे मानक पर अपेक्षित प्रदर्शन हासिल करने के लिए इन्हें प्रयास तेज करने होंगे, ताकि ये जिले भी सुरक्षित श्रेणी तक पहुंच सकें।
13 जिलों में अब भी एचआईवी नियंत्रण की चुनौती
राज्य के 13 जिले ऐसे हैं, जहां निर्धारित तीन मानकों में से केवल एक या कोई भी लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सका है। इनमें सिमडेगा की स्थिति सबसे कमजोर बताई गई है, जहां स्कोर 72-67-93 दर्ज किया गया है।
सिमडेगा के अलावा पाकुड़, रामगढ़, देवघर, गोड्डा, जामताड़ा, चतरा, खूंटी, धनबाद, गिरिडीह, लातेहार, गढ़वा और पलामू भी इस सूची में शामिल हैं। इन जिलों में एचआईवी संक्रमण की पहचान, उपचार और नियंत्रण के निर्धारित मानकों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त प्रयासों की जरूरत होगी।
झारखंड के तीन जिलों की उपलब्धि ने राज्य में एचआईवी नियंत्रण अभियान को आगे बढ़ाने की उम्मीद जगाई है। अब मुख्य चुनौती बाकी जिलों में प्रदर्शन सुधारने, गर्भवती महिलाओं की शत-प्रतिशत जांच सुनिश्चित करने और मां से बच्चे में संक्रमण के प्रसार को रोकने की है।









