JPSC परीक्षा विवाद: हाईकोर्ट में आज होगी बड़ी सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट में CBI जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग पर होने वाली सुनवाई को लेकर टिकी नजर
झारखंड में 22 परीक्षाओं को रद्द करने के सरकार के फैसले के खिलाफ याचिकाओं पर आज 24 अगस्त को हाई कोर्ट में सुनवाई होगी। जानिए पूरा मामला।

रांची: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच आज यानी सोमवार, 24 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होगी। झारखंड संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 में कथित अनियमितताओं की CBI से स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने की मांग वाली जनहित याचिका पर सर्वोच्च अदालत सुनवाई करेगी।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि याचिका में केवल परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच की मांग नहीं की गई है, बल्कि प्रश्नपत्र तैयार होने से लेकर उसके मूल्यांकन तक पूरी प्रक्रिया की जांच और महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है।
सुप्रीम कोर्ट में आज होगी सुनवाई
याचिका पर प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ सुनवाई कर सकती है। यह जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगण ने अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से दाखिल की है।
याचिका में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की ओर से 19 अप्रैल 2026 को विज्ञापन संख्या 01/2026 के तहत आयोजित झारखंड संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक प्रतियोगी परीक्षा-2025 की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाए गए हैं।याचिकाकर्ता ने मामले में सुप्रीम कोर्ट से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
CBI जांच की मांग क्यों?
याचिका में आरोप लगाया गया है कि परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच केवल अलग-अलग शिकायतों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसमें परीक्षा की पूरी प्रक्रिया को जांच के दायरे में शामिल करने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता के अनुसार जांच में मुख्य रूप से इन पहलुओं को देखा जाना चाहिए—
• प्रश्नपत्र की छपाई और कोडिंग
• प्रश्नपत्र का सुरक्षित भंडारण
• प्रश्नपत्रों का परिवहन
• परीक्षा केंद्रों तक प्रश्नपत्र का वितरण
• OMR शीट का संग्रह
• OMR शीट की स्कैनिंग
• उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन
• परीक्षा से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक डेटा तक पहुंच
याचिका में इन सभी चरणों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
CID से CBI को जांच सौंपने की मांग
याचिकाकर्ता ने परीक्षा से जुड़े लोक सेवकों और परीक्षा एजेंसियों की भूमिका की जांच के लिए मामले को राज्य CID से CBI को सौंपने की मांग की है।याचिका में कहा गया है कि मामले को केवल व्यक्तिगत अभ्यर्थियों से जुड़े विवाद या कथित धांधली की अलग-अलग घटनाओं के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। पूरी परीक्षा प्रक्रिया की जांच होने पर ही कथित अनियमितताओं की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।
मूल OMR और CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग
याचिका में परीक्षा से जुड़े भौतिक और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का भी अनुरोध किया गया है। इसमें मूल OMR शीट, परीक्षा केंद्रों के CCTV फुटेज और सर्वर के ऑडिट रिकॉर्ड समेत अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का निर्देश देने की मांग की गई है।याचिकाकर्ता का कहना है कि जांच के दौरान इन साक्ष्यों की अहम भूमिका हो सकती है। इसलिए इन्हें सुरक्षित रखना जरूरी है।
परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने की मांग
याचिका में कथित अनियमितताओं को देखते हुए 19 अप्रैल को आयोजित JPSC प्रारंभिक परीक्षा रद्द कर नए सिरे से परीक्षा कराने की मांग भी की गई है।इसके साथ ही पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष, व्यापक और समयबद्ध जांच कराने का अनुरोध किया गया है।
24 अगस्त को झारखंड के भर्ती मामलों पर दो अदालतों में सुनवाई
24 अगस्त झारखंड की भर्ती परीक्षाओं के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण दिन है। एक ओर सुप्रीम कोर्ट में JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 से जुड़ी CBI जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई होगी।
वहीं दूसरी ओर झारखंड हाई कोर्ट में राज्य सरकार द्वारा नियुक्ति से जुड़े कई विज्ञापनों को रद्द करने के फैसले के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई होनी है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने संबंधित याचिकाओं को एक साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
राज्य सरकार ने 18 अगस्त को अधिसूचना जारी कर 22 परीक्षाओं को रद्द करने, छह परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित करने और 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखने का निर्णय लिया था। इसके खिलाफ कई अभ्यर्थियों और अन्य प्रार्थियों ने हाई कोर्ट का रुख किया है।
ऐसे में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में JPSC परीक्षा विवाद और हाई कोर्ट में भर्ती विज्ञापनों को रद्द करने के फैसले पर होने वाली सुनवाई पर झारखंड के हजारों अभ्यर्थियों की नजर रहेगी।









