झारखंड: स्कूली छात्रा की मौत से मचा हड़कंप, शिक्षक ने लगाया इलाज में लापरवाही का आरोप, अस्पताल में डाक्टर मिले गायब, स्टाफ ने कर दिया गलत इलाज…
Jharkhand: Schoolgirl's death sparks uproar; teacher alleges negligence in treatment; doctor found missing from hospital, staff misdiagnosed...

झारखंड के पलामू जिले के पांकी में 6 वर्षीय छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों और स्थानीय लोगों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है, वहीं मामले की जांच की मांग तेज हो गई है।
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पलामू। पलामू जिले के पांकी क्षेत्र से एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां लापरवाही और गलत इलाज के आरोपों के बीच एक 6 वर्षीय मासूम छात्रा की मौत हो गई। इस घटना के बाद इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है, वहीं प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग भी तेज हो गई है। मृत बच्ची की पहचान रतनपुर पंचायत के इरगू टोला तेतरखाड़ निवासी जियालाल उरांव की पुत्री अशरती कुमारी के रूप में हुई है।
मिली जानकारी के मुताबिक वह पांकी-मेदिनीनगर मुख्य मार्ग स्थित बसडीहा के चांदो आवासीय छात्रावास में रहकर पढ़ाई कर रही थी। बताया जा रहा है कि बच्ची की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उसे आनन-फानन में पांकी के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिजनों और शिक्षकों के अनुसार, अस्पताल में बच्ची का इलाज ठीक तरीके से नहीं किया गया, जिससे उसकी हालत और बिगड़ गई और इलाज के दौरान ही उसकी मौत हो गई।
शिक्षक का आरोप है कि जब बच्ची को अस्पताल ले जाया गया, उस समय वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था और अस्पताल के स्टाफ द्वारा ही उपचार किया जा रहा था।वहीं, दूसरी ओर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. वीरेंद्र ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराकर शिक्षक उसे छोड़कर चले गए थे, जिससे समय पर समुचित देखभाल में दिक्कत आई।
दोनों पक्षों के परस्पर विरोधी बयानों के चलते मामला और भी संदिग्ध हो गया है, जिसकी गहन जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है। घटना के बाद मृत बच्ची के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव और आसपास के क्षेत्रों में भी इस घटना को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
इस घटना ने पांकी क्षेत्र में संचालित आवासीय विद्यालयों की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि कई छात्रावासों में बच्चों को न तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है और न ही बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों पर खतरा बना रहता है।









