Jio IPO से पहले ईशा अंबानी ने खोला 16 साल पुराना राज, एक असाइनमेंट सबमिट नहीं हुआ और जन्म ले गया भारत का डिजिटल साम्राज्य!
अमेरिका में पढ़ाई के दौरान इंटरनेट कनेक्टिविटी की परेशानी ने जियो के विचार को जन्म दिया। ईशा अंबानी ने बताया कैसे आकाश अंबानी की सोच, रिलायंस की दीर्घकालिक रणनीति और मजबूत क्रियान्वयन ने एक विचार को बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म में बदल दिया। IPO से पहले कंपनी ने अपनी विकास यात्रा और कारोबारी दर्शन की झलक पेश की।

नई दिल्ली। भारत के सबसे चर्चित कारोबारी परिवारों में शामिल अंबानी परिवार की कंपनी जियो की शुरुआत के पीछे एक ऐसी कहानी है, जो किसी बड़े बिजनेस प्लान से नहीं, बल्कि इंटरनेट की एक छोटी-सी परेशानी से जुड़ी है। जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रस्तावित IPO से पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज की निदेशक ईशा अंबानी ने जियो के जन्म की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि अमेरिका में कॉलेज के दिनों के दौरान एक ऑनलाइन असाइनमेंट जमा नहीं हो पाने की घटना ने भारत में बेहतर डिजिटल कनेक्टिविटी की जरूरत पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। इसी तरह की सोच आगे चलकर जियो के विचार की नींव बनी।
ईशा अंबानी के मुताबिक, यह घटना करीब 2009-2010 की है। उस समय वह और उनके भाई आकाश अंबानी अमेरिका में कॉलेज में पढ़ रहे थे और छुट्टियों में मुंबई स्थित अपने घर आए हुए थे। ईशा को एक ऑनलाइन असाइनमेंट जमा करना था, लेकिन इंटरनेट ने काम नहीं किया और वह अपना काम समय पर सबमिट नहीं कर सकीं। यह भले ही एक छोटी-सी घटना थी, लेकिन इसने भारत में इंटरनेट की उपलब्धता और गुणवत्ता को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया।
ईशा ने बताया कि इसके बाद चर्चा शुरू हुई कि भारत में वैसी कनेक्टिविटी क्यों नहीं थी, जैसी उन्होंने पश्चिमी देशों में अनुभव की थी। आकाश अंबानी का मानना था कि इसका समाधान एक ऐसा डिजिटल टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म तैयार करना है, जो देश में कनेक्टिविटी की तस्वीर बदल सके। इसी सोच ने आगे चलकर जियो की यात्रा का रास्ता तैयार किया।
2016 में लॉन्च हुआ जियो, अब अगली विकास छलांग की तैयारी
साल 2016 में जियो की शुरुआत हुई। इसके बाद भारतीय टेलीकॉम बाजार में डेटा और इंटरनेट सेवाओं को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिला। अब जियो प्लेटफॉर्म्स अपने प्रस्तावित IPO से पहले भविष्य की विकास रणनीति और कारोबार को आगे बढ़ाने के रोडमैप पर जोर दे रहा है।
ईशा अंबानी ने कहा कि रिलायंस में कारोबार खड़ा करने का नजरिया केवल आज या कल के परिणामों तक सीमित नहीं रहता। कंपनी लंबी अवधि को ध्यान में रखकर योजनाएं बनाती है और यह सोचती है कि आने वाले दशकों में दुनिया और बाजार किस दिशा में बढ़ेंगे। उनके मुताबिक, किसी विचार को बड़े कारोबार में बदलने के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण, बड़े पैमाने पर काम करने की क्षमता और मजबूत क्रियान्वयन जरूरी हैं।
उन्होंने कहा कि कंपनी के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि किसी उद्योग की अर्थव्यवस्था को मौलिक रूप से बदलने के लिए किस स्तर के विस्तार की जरूरत होगी। इसके साथ ही, योजनाओं को जमीन पर उतारना भी उतना ही अहम है। ईशा के अनुसार, रिलायंस के संगठन में क्रियान्वयन एक मजबूत कार्यशैली का हिस्सा है, जो कंपनी को अपने लक्ष्यों और मिशन के प्रति प्रतिबद्ध रहने में मदद करती है।
‘ग्रोथ इज लाइफ’ सिर्फ नारा नहीं, रिलायंस का कारोबारी दर्शन
ईशा अंबानी ने रिलायंस के आदर्श वाक्य ‘Growth is Life’ का उल्लेख करते हुए कहा कि कंपनी का कारोबारी मॉडल लगातार निर्माण, निवेश, विस्तार और विकास में दोबारा निवेश करने पर आधारित है। उन्होंने वित्तीय प्रदर्शन के दो महत्वपूर्ण पहलुओं पर जोर दिया। पहला, मजबूत बैलेंस शीट बनाना और उसे सुरक्षित रखना। दूसरा, कारोबार से लगातार बढ़ता हुआ फ्री कैश फ्लो तैयार करना।
उनके मुताबिक, इन सिद्धांतों ने रिलायंस को अपने विभिन्न व्यवसायों में निवेश करने, उनका विस्तार करने और उत्पन्न नकदी को आगे की विकास योजनाओं में लगाने का अवसर दिया है। कंपनी का मानना है कि दीर्घकालिक विकास के लिए केवल तेजी से विस्तार करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि वित्तीय अनुशासन बनाए रखना भी जरूरी है।
कोरोना संकट के बीच तय समय से नौ महीने पहले हासिल किया कर्ज-मुक्त होने का लक्ष्य
ईशा अंबानी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज की वित्तीय प्रतिबद्धताओं का जिक्र करते हुए बताया कि उनके पिता मुकेश अंबानी ने 2019 में शेयरधारकों से कंपनी को 2021 तक शुद्ध ऋण-मुक्त बनाने का वादा किया था। इसके बाद 2020 में कोरोना महामारी और वैश्विक आर्थिक संकट ने कारोबार जगत के सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी कर दीं।
ईशा के अनुसार, इन मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद रिलायंस ने निर्धारित समय से नौ महीने पहले ही अपना लक्ष्य हासिल कर लिया। उन्होंने इसे शेयरधारकों से किए गए वादे को निभाने और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने का उदाहरण बताया।
उन्होंने कहा कि रिलायंस में वित्तीय विवेक और शेयरधारकों के प्रति प्रतिबद्धता को कारोबार की बुनियादी कार्यशैली का हिस्सा माना जाता है। मजबूत वित्तीय स्थिति के साथ आगे बढ़ना कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति का महत्वपूर्ण पहलू है।
धीरूभाई अंबानी का सपना, हर भारतीय बने देश की तरक्की का भागीदार
ईशा अंबानी ने अपने दादा और रिलायंस के संस्थापक धीरूभाई अंबानी को याद करते हुए कहा कि उनके लिए रिलायंस केवल एक कंपनी नहीं थी, बल्कि ऐसा विचार था जिसमें हर भारतीय को देश के विकास और समृद्धि में भागीदार बनने का अवसर मिलना चाहिए।
उन्होंने बताया कि 1977 में रिलायंस इंडस्ट्रीज के सार्वजनिक होने के बाद से कंपनी की यात्रा के पीछे बड़े सपने देखने, निडर होकर आगे बढ़ने और लगातार नवाचार करने की सोच रही है। ईशा ने धीरूभाई अंबानी को ऐसे व्यक्ति के रूप में याद किया, जो मजबूत, आत्मविश्वासी और समृद्ध भारत के सपने से लोगों को प्रेरित करते थे।
ईशा के मुताबिक, धीरूभाई का संदेश स्पष्ट था कि लोगों को बड़े सपने देखने चाहिए, नए विचारों को अपनाना चाहिए और निरंतर बेहतर करने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि रिलायंस आज न केवल अपने संस्थापक के विजन को आगे बढ़ा रहा है, बल्कि उन लाखों शेयरधारकों के भरोसे को भी साथ लेकर चल रहा है जिन्होंने इस सपने पर विश्वास किया।
Jio IPO से निवेशकों की नजरें भविष्य की रणनीति पर
जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रस्तावित IPO से पहले ईशा अंबानी का यह बयान कंपनी की स्थापना के पीछे की सोच और रिलायंस के कारोबारी दर्शन को सामने लाता है। इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या से शुरू हुआ विचार आज एक बड़े डिजिटल कारोबार के रूप में विकसित हो चुका है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी IPO के जरिए अपनी विकास योजनाओं, वित्तीय स्थिति और भविष्य की रणनीति को किस तरह पेश करती है।
हालांकि, IPO की अंतिम समय-सारणी, मूल्य दायरा और अन्य महत्वपूर्ण विवरणों की पुष्टि आधिकारिक घोषणाओं से ही की जानी चाहिए। फिलहाल ईशा अंबानी की बताई कहानी यह दिखाती है कि कैसे रोजमर्रा की एक समस्या भी बड़े तकनीकी बदलाव के विचार को जन्म दे सकती है।









