JPSC Exam Scam: OMR शीट में ऐसा खेल कि कोर्ट भी रह गया हैरान, 3 आरोपियों की जमानत खारिज
CDR और डिजिटल साक्ष्यों ने खोली परीक्षा व्यवस्था में सेंधमारी की परतें, अदालत ने गंभीर आरोपों का लिया संज्ञान

रांची। JPSC परीक्षा घोटाले और पेपर लीक मामले में तीन आरोपियों को अदालत से बड़ा झटका लगा है। अपर न्यायायुक्त प्रथम योगेश कुमार की अदालत ने मंगलवार को तीनों आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। जिन आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज हुई हैं, उनमें TSR के निदेशक रामबीर सिंह, JPSC के परीक्षा नियंत्रक के सहायक और संयुक्त सचिव के निजी सहायक के तौर पर कार्यरत सोनू कुमार तथा JPSC की एक सदस्य के निजी सहायक बृज कुमार राम शामिल हैं।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने केस डायरी, सह-अभियुक्तों के बयान, कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी CDR और अन्य डिजिटल साक्ष्य रखे गए। अदालत ने इन साक्ष्यों का प्रथम दृष्टया अवलोकन करते हुए OMR शीट में कथित हेरफेर और परीक्षा प्रणाली में सेंधमारी जैसे गंभीर आरोपों का उल्लेख किया। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने तीनों आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया।
OMR शीट में हेरफेर के आरोपों ने बढ़ाई चिंता
अदालत की टिप्पणी के मुताबिक, उपलब्ध केस डायरी और डिजिटल साक्ष्यों से परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी के प्रथम दृष्टया संकेत मिलते हैं। खास तौर पर OMR शीट में कथित हेरफेर और परीक्षा प्रणाली में सेंधमारी के आरोपों को गंभीर माना गया है। CDR और डिजिटल साक्ष्यों की जांच इस मामले में अहम मानी जा रही है, क्योंकि इनके जरिए आरोपियों और अन्य संदिग्ध गतिविधियों के बीच संबंधों की पड़ताल की जा रही है।
अदालत ने यह भी कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में संगठित तरीके से की गई धांधली का असर केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रहता। ऐसी घटनाओं से राज्य को वित्तीय नुकसान होने के साथ-साथ हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य और सार्वजनिक विश्वास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
अलग-अलग तारीखों में हुई तीनों की गिरफ्तारी
इस मामले में CID ने तीनों आरोपियों को अलग-अलग तारीखों पर गिरफ्तार किया था। रामबीर सिंह की गिरफ्तारी 22 जुलाई को हुई थी, जबकि सोनू कुमार को 26 जुलाई को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद 17 अगस्त को बृज कुमार राम को भी CID ने गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तारी के बाद से तीनों आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं।
अब अदालत द्वारा जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने के बाद तीनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत जारी रहेगी। मामले में जांच एजेंसी द्वारा जुटाए जा रहे डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।









