महाराष्ट्र की सियासत में नई हलचल! एक मंच पर आए फडणवीस, उद्धव और राज ठाकरे, मजाकिया तंज के बीच 2029 का भी हुआ जिक्र
मुंबई में पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान तीनों नेताओं ने साझा किया मंच, राजनीतिक मतभेदों के बीच हंसी-मजाक और चुटीले जवाबों ने खींचा लोगों का ध्यान

मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में नेताओं के बीच मुलाकात और एक मंच पर मौजूदगी अक्सर नए सियासी समीकरणों की चर्चाओं को जन्म दे देती है। ऐसा ही नजारा मुंबई में आयोजित एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में देखने को मिला, जहां मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) अध्यक्ष राज ठाकरे एक साथ मंच पर नजर आए। तीनों नेताओं की मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी। कार्यक्रम के दौरान नेताओं के बीच जिस अंदाज में हंसी-मजाक और एक-दूसरे पर चुटीले कटाक्ष हुए, उसने भी लोगों का ध्यान खींचा।
दरअसल, मुंबई में 75 कार्टूनिस्टों के काम और उनकी प्रोफाइल पर आधारित पुस्तक ‘महाराष्ट्र ची हास्यरेषा’ यानी ‘द लाफ्टर लाइन्स ऑफ महाराष्ट्र’ का विमोचन किया गया। इसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री फडणवीस के साथ उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे भी शामिल हुए। राजनीतिक रूप से अलग-अलग विचारधाराओं और दलों से जुड़े इन नेताओं को एक मंच पर देखकर कार्यक्रम में मौजूद लोग भी उत्सुक नजर आए।
राज ठाकरे के 2029 वाले तंज पर गूंजे ठहाके
कार्यक्रम के दौरान भाजपा नेता आशीष शेलार की बातों पर राज ठाकरे ने अपने खास अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को खुशी-खुशी बार-बार कार्यक्रम में आमंत्रित करेंगे, लेकिन शेलार को यह सुनिश्चित करना होगा कि फडणवीस 2029 तक मुख्यमंत्री बने रहें। राज ठाकरे की इस टिप्पणी के बाद पूरे हॉल में हंसी गूंज उठी।
राज ठाकरे के इस मजाकिया तंज पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने भी उसी अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वह उद्धव ठाकरे सहित सभी लोगों का निमंत्रण स्वीकार करते हैं। फडणवीस ने पुराने राजनीतिक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि 2019 तक जब भी उद्धव ठाकरे ने उन्हें बुलाया, वह कार्यक्रम में पहुंचे, लेकिन 2019 के बाद से उद्धव ने उन्हें नहीं बुलाया। उन्होंने कहा कि वह तब से निमंत्रण का इंतजार कर रहे हैं।
गौरतलब है कि 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा और अविभाजित शिवसेना के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर मतभेद सामने आए थे। इसके बाद दोनों दलों का वर्षों पुराना गठबंधन टूट गया था। फडणवीस की टिप्पणी को इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि से जोड़कर देखा गया।
फडणवीस बोले, यह महाराष्ट्र की राजनीतिक परंपरा है
तीनों नेताओं के एक मंच पर आने को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि इसमें हैरान होने जैसी कोई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की राजनीतिक परंपरा रही है कि अलग-अलग दलों के नेता किसी सामाजिक, सांस्कृतिक या कला से जुड़े कार्यक्रम में एक साथ शामिल हो सकते हैं। वे साथ बैठ सकते हैं, हंसी-मजाक कर सकते हैं और चाय भी पी सकते हैं।
फडणवीस ने इस बात पर जोर दिया कि राजनीतिक मतभेदों का मतलब यह नहीं है कि दूसरे क्षेत्रों में संवाद और मेलजोल की गुंजाइश खत्म हो जाए। उन्होंने कार्यक्रम में मुंबई के कार्टूनिस्टों के लिए एक समर्पित गैलरी स्थापित करने की इच्छा भी जताई। इसके लिए उन्होंने उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे से सहयोग लेने की बात कही।
राज ठाकरे ने बताया क्यों एक मंच पर आए तीनों नेता
कार्यक्रम के बाद राज ठाकरे ने भी तीनों नेताओं की एक मंच पर मौजूदगी को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि लोग सोच रहे होंगे कि आज हम तीनों एक मंच पर कैसे आ गए। राज ठाकरे के मुताबिक, कुछ ऐसे मंच होते हैं जहां सभी लोग राजनीति को किनारे रखकर एक साथ आते हैं। ऐसे अवसरों पर राजनीतिक मुद्दों के बजाय कला, संस्कृति और रचनात्मकता पर बातचीत होती है।
उन्होंने संकेत दिया कि पुस्तक विमोचन जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों में नेताओं की मौजूदगी को केवल राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
एक मंच पर मुलाकात से सियासी चर्चाएं तेज
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की एक साथ मौजूदगी ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म जरूर दिया है। खासकर राज ठाकरे की 2029 वाली टिप्पणी और फडणवीस के 2019 के बाद निमंत्रण नहीं मिलने वाले जवाब ने कार्यक्रम को और दिलचस्प बना दिया। हालांकि, तीनों नेताओं ने इस मुलाकात को कला और संस्कृति से जुड़े आयोजन के संदर्भ में रखा। फिलहाल इस साझा मंच को किसी नए राजनीतिक गठबंधन या समीकरण का संकेत मानने के लिए कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।









