No-Cost EMI के नाम पर ग्राहकों की जेब पर पड़ सकता है बड़ा बोझ! सामान खरीदने से पहले जान लें ‘बिना ब्याज’ वाली किस्तों का पूरा खेल

Amazon, Flipkart और Meesho की फेस्टिव सेल में नो-कॉस्ट ईएमआई के ऑफर देखकर खरीदारी करने से पहले सावधान हो जाएं। जीरो-कॉस्ट ईएमआई हमेशा मुफ्त नहीं होती। कैश डिस्काउंट छूटने से लेकर प्रोसेसिंग फीस और टैक्स तक, कई खर्च आपकी जेब पर भारी पड़ सकते हैं।

 

त्योहारों का सीजन आते ही ई-कॉमर्स कंपनियों ने ग्राहकों को लुभाने के लिए तरह-तरह के ऑफर पेश करने शुरू कर दिए हैं। Amazon, Flipkart और Meesho जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मोबाइल, टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामान पर भारी छूट के साथ नो-कॉस्ट ईएमआई का विकल्प भी दिया जा रहा है। पहली नजर में यह ऑफर काफी आकर्षक लगता है, क्योंकि ग्राहक को महंगा सामान एक साथ पूरी रकम चुकाए बिना किस्तों में खरीदने का मौका मिलता है। लेकिन क्या वाकई नो-कॉस्ट ईएमआई पूरी तरह मुफ्त होती है? या फिर इसके पीछे कुछ ऐसी शर्तें होती हैं, जिनकी जानकारी ग्राहकों को खरीदारी के समय नहीं मिल पाती?

दरअसल, नो-कॉस्ट ईएमआई का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि ग्राहक को किसी भी तरह का अतिरिक्त खर्च नहीं उठाना पड़ेगा। कुछ मामलों में ब्याज की लागत विक्रेता या कंपनी वहन करती है, लेकिन कई बार ग्राहक को मिलने वाली नकद छूट छोड़नी पड़ती है। इसके अलावा प्रोसेसिंग फीस, सुविधा शुल्क और लागू टैक्स जैसे खर्च भी कुल भुगतान को बढ़ा सकते हैं। इसलिए केवल कम मासिक किस्त देखकर खरीदारी का फैसला करना नुकसानदेह साबित हो सकता है।

एक लाख के सामान पर ऐसे समझें नो-कॉस्ट ईएमआई का गणित

मान लीजिए, आप एक लाख रुपये का कोई इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदना चाहते हैं। अगर आप नकद भुगतान करते हैं, तो विक्रेता आपको 6,000 रुपये की छूट देता है। ऐसे में आपको सामान के लिए 94,000 रुपये चुकाने होंगे। लेकिन अगर आप नो-कॉस्ट ईएमआई का विकल्प चुनते हैं और उस ऑफर में नकद छूट लागू नहीं होती, तो आपको अधिक रकम चुकानी पड़ सकती है।

यानी भले ही ईएमआई पर अलग से ब्याज दिखाई न दे, लेकिन नकद खरीदारी में मिलने वाली छूट छोड़ने के कारण आपका वास्तविक खर्च बढ़ सकता है। हालांकि, यह गणित हर ऑफर में एक जैसा नहीं होता। कुछ योजनाओं में विक्रेता या बैंक ब्याज की लागत वहन कर सकते हैं, जबकि कुछ में दूसरी शर्तें लागू होती हैं। इसलिए ऑफर की वास्तविक लागत समझने के लिए कुल भुगतान की तुलना करना जरूरी है।

प्रोसेसिंग फीस और टैक्स भी बढ़ा सकते हैं खर्च

नो-कॉस्ट ईएमआई चुनते समय सिर्फ मासिक किस्त पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। कुछ वित्तीय योजनाओं में प्रोसेसिंग फीस, उस पर लागू जीएसटी या अन्य शुल्क लिए जा सकते हैं। वहीं, समय से पहले लोन बंद करने पर प्री-क्लोजर चार्ज और किस्त देर से चुकाने पर पेनाल्टी भी लग सकती है। ईएमआई बाउंस होने की स्थिति में अतिरिक्त शुल्क का सामना भी करना पड़ सकता है।

इनमें से कौन-से शुल्क लागू होंगे, यह बैंक, वित्तीय संस्थान और संबंधित योजना की शर्तों पर निर्भर करता है। इसलिए खरीदारी से पहले सभी शुल्कों की जानकारी लेना और यह देखना जरूरी है कि आखिर में आपके खाते से कुल कितनी रकम जाएगी।

कैश डिस्काउंट, एक्सचेंज बोनस और दूसरे ऑफर का भी रखें ध्यान

त्योहारी सेल के दौरान कई कंपनियां नकद छूट, बैंक ऑफर, एक्सचेंज बोनस और विशेष कूपन भी देती हैं। लेकिन हर ऑफर को एक साथ इस्तेमाल करना संभव नहीं होता। कुछ मामलों में नो-कॉस्ट ईएमआई चुनने पर कोई दूसरा डिस्काउंट या लाभ नहीं मिलता।

ऐसे में ग्राहक को यह जांचना चाहिए कि ईएमआई पर सामान खरीदना वास्तव में फायदेमंद है या नकद भुगतान करने पर ज्यादा बचत हो रही है। उदाहरण के लिए, यदि कैश पेमेंट पर मिलने वाली छूट ईएमआई के मुकाबले अधिक है, तो बिना ब्याज वाली किस्तों का विकल्प चुनना जरूरी नहीं कि सबसे अच्छा फैसला हो।

लोन एग्रीमेंट की इन शर्तों को नजरअंदाज न करें

ईएमआई स्वीकार करने से पहले लोन एग्रीमेंट को ध्यान से पढ़ना बेहद जरूरी है। इसमें भुगतान की अवधि, प्रोसेसिंग फीस, देरी से भुगतान की पेनाल्टी, ईएमआई बाउंस होने के शुल्क और समय से पहले लोन चुकाने की शर्तों की जानकारी हो सकती है। यदि किसी योजना में लॉक-इन पीरियड या अन्य प्रतिबंध हैं, तो उन्हें भी समझ लेना चाहिए।

इसके साथ ही यह भी जांचें कि ईएमआई की अवधि पूरी होने तक आपको कुल कितनी रकम चुकानी होगी। केवल कम मासिक किस्त देखकर फैसला न करें, क्योंकि लंबी अवधि और अतिरिक्त शुल्क के कारण वास्तविक लागत आपकी उम्मीद से अलग हो सकती है।

क्या कैश में सामान खरीदना ज्यादा फायदेमंद है?

कई मामलों में नकद भुगतान करना अधिक फायदेमंद हो सकता है, खासकर तब जब विक्रेता कैश डिस्काउंट दे रहा हो और ईएमआई चुनने पर वह छूट खत्म हो जाती हो। इससे ग्राहक को सामान कम कीमत पर मिल सकता है और किस्तों के भुगतान की चिंता भी नहीं रहती।

हालांकि, हर स्थिति में कैश पेमेंट ही बेहतर हो, ऐसा जरूरी नहीं है। अगर किसी ऑफर में विक्रेता ब्याज की लागत वहन करता है, अतिरिक्त शुल्क नहीं हैं और नकद छूट का नुकसान भी नहीं होता, तो नो-कॉस्ट ईएमआई उपयोगी विकल्प बन सकती है। सही फैसला लेने के लिए दोनों विकल्पों की कुल लागत की तुलना करना जरूरी है।

खरीदारी से पहले इन बातों का रखें ध्यान

नो-कॉस्ट ईएमआई पर सामान खरीदने से पहले नकद कीमत और ईएमआई वाली कीमत की तुलना करें। यह देखें कि नकद भुगतान पर कितनी छूट मिल रही है, किस्तों में कुल कितनी रकम चुकानी होगी और प्रोसेसिंग फीस या अन्य शुल्क कितने हैं। लोन की शर्तें ध्यान से पढ़ें और यह भी समझें कि भुगतान में देरी होने या समय से पहले लोन बंद करने पर क्या खर्च आएगा।

त्योहारी ऑफर और बड़ी छूट देखकर जल्दबाजी में खरीदारी करने से बचें। नो-कॉस्ट ईएमआई अपने आप में न तो हमेशा नुकसानदेह है और न ही हर बार पूरी तरह मुफ्त। इसका फायदा इस बात पर निर्भर करता है कि ऑफर की शर्तें क्या हैं और कुल मिलाकर आपको सामान कितनी कीमत पर मिल रहा है। इसलिए खरीदारी से पहले पूरा हिसाब लगाएं और अपनी जरूरत तथा बजट के अनुसार ही कैश या ईएमआई का विकल्प चुनें।

Anita Nishad

Anita Nishad is a dedicated and insightful journalist currently serving as a key voice at HPBL News. With a deep-rooted passion for storytelling and truth-seeking, Anita has become a trusted name in digital and broadcast journalism, particularly known for her ability to bring grassroots issues to the forefront.

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