Poultry Business: मुर्गी पालन शुरू करने के लिए सरकार दे रही 25 लाख रुपये तक की सब्सिडी! जानिए कौन उठा सकता है फायदा और कैसे करें आवेदन
अगर आप गांव में रहकर अपना कारोबार शुरू करना चाहते हैं तो मुर्गी पालन आपके लिए कमाई का अच्छा जरिया बन सकता है। अंडे और चिकन की बाजार में लगातार मांग बनी रहती है। खास बात यह है कि केंद्र सरकार की राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) योजना के तहत ग्रामीण पोल्ट्री ब्रीडिंग यूनिट लगाने पर 50 फीसदी तक सब्सिडी मिल सकती है। हालांकि, इसके लिए कुछ जरूरी शर्तें और नियम तय किए गए हैं। जानिए कितनी मिलेगी आर्थिक मदद और आवेदन करने का पूरा तरीका।

नई दिल्ली। आज के समय में नौकरी के साथ अपना कारोबार शुरू करने की इच्छा रखने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। खासकर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले किसान और युवा खेती-बाड़ी के साथ कमाई का दूसरा जरिया तलाश रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए मुर्गी पालन यानी पोल्ट्री फार्मिंग एक अच्छा विकल्प बन सकता है। बाजार में अंडे और चिकन की मांग सालभर बनी रहती है, जिससे इस कारोबार में कमाई की संभावनाएं रहती हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि केंद्र सरकार भी ग्रामीण क्षेत्रों में पोल्ट्री व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक सहायता दे रही है।
सरकार की राष्ट्रीय पशुधन मिशन (National Livestock Mission) योजना के तहत योग्य आवेदकों को ग्रामीण पोल्ट्री ब्रीडिंग यूनिट स्थापित करने के लिए 50 फीसदी तक सब्सिडी दी जाती है। इस योजना के अंतर्गत अधिकतम 25 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता मिल सकती है। हालांकि, इसका लाभ हर तरह का मुर्गी फार्म खोलने वाले व्यक्ति को नहीं मिलता। योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण मुर्गियों की अच्छी नस्ल तैयार करना, चूजों का उत्पादन बढ़ाना और पोल्ट्री क्षेत्र को मजबूत बनाना है।
मुर्गी पालन पर कितनी सब्सिडी देती है सरकार?
राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत ग्रामीण पोल्ट्री ब्रीडिंग फार्म स्थापित करने के लिए परियोजना लागत का 50 फीसदी तक अनुदान दिया जाता है। इस योजना में अधिकतम 25 लाख रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान है। इसके तहत ब्रीडिंग फार्म, हैचरी और चूजों को शुरुआती दिनों में पालने के लिए ब्रूडर-कम-मदर यूनिट स्थापित की जा सकती है।
हालांकि, यहां एक बात समझना बेहद जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति केवल अंडे बेचने या चिकन उत्पादन के लिए सामान्य ब्रायलर या लेयर फार्म खोलना चाहता है, तो उसे इस योजना के तहत अपने आप सब्सिडी नहीं मिलेगी। योजना विशेष रूप से ग्रामीण मुर्गियों की नस्ल सुधारने और चूजों के उत्पादन से जुड़ी इकाइयों को प्रोत्साहित करती है। इसलिए आवेदन करने से पहले अपनी परियोजना को योजना के निर्धारित मानकों के अनुसार तैयार करना जरूरी है।
कौन-कौन उठा सकता है सरकारी योजना का फायदा?
इस योजना का लाभ केवल व्यक्तिगत किसान ही नहीं, बल्कि कई तरह के संगठन भी उठा सकते हैं। इसके लिए योग्य व्यक्तिगत आवेदक, किसान उत्पादक संगठन (FPO), स्वयं सहायता समूह (SHG), संयुक्त देयता समूह, किसान सहकारी संगठन और सेक्शन 8 कंपनियां आवेदन कर सकती हैं।
आवेदन करने वाले व्यक्ति या संस्था के पास पोल्ट्री फार्म स्थापित करने के लिए खुद की जमीन होनी चाहिए या फिर वैध लीज पर जमीन उपलब्ध होनी चाहिए। इसके अलावा आवेदक को मुर्गी पालन के काम का अनुभव होना चाहिए या संबंधित क्षेत्र में जरूरी प्रशिक्षण प्राप्त होना चाहिए। यदि आवेदक के पास खुद का अनुभव नहीं है तो वह प्रशिक्षित कर्मचारियों और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद लेकर भी परियोजना संचालित कर सकता है।
सब्सिडी पाने के लिए कितनी मुर्गियां होनी जरूरी हैं?
राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत ग्रामीण पोल्ट्री ब्रीडिंग यूनिट स्थापित करने के लिए कुछ जरूरी तकनीकी शर्तें भी तय की गई हैं। योजना के अनुसार, परियोजना में कम से कम 1,000 मूल मुर्गियों की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके साथ हैचरी और ब्रूडर-कम-मदर यूनिट स्थापित करना भी जरूरी है।
हैचरी में मुर्गियों के अंडों से चूजे तैयार किए जाते हैं, जबकि ब्रूडर-कम-मदर यूनिट में इन चूजों को शुरुआती चार सप्ताह तक सुरक्षित वातावरण में पाला जाता है। इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य अच्छी नस्ल के चूजों का उत्पादन करना और ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी उपलब्धता बढ़ाना है।
क्या-क्या खर्च खुद उठाना होगा?
सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी के बावजूद परियोजना की पूरी लागत सरकार नहीं उठाती। बाकी खर्च आवेदक को अपनी पूंजी या बैंक से लोन लेकर पूरा करना होता है। बैंक से कर्ज लेने की स्थिति में आवेदक की आर्थिक स्थिति, लोन चुकाने की क्षमता और जरूरी दस्तावेजों की जांच की जाती है।
इसके अलावा जमीन खरीदने, जमीन किराये पर लेने और निजी इस्तेमाल के लिए वाहन खरीदने जैसे खर्चों पर इस योजना के तहत सब्सिडी नहीं मिलती। इसलिए फार्म शुरू करने से पहले पूरे प्रोजेक्ट की लागत और अपनी आर्थिक व्यवस्था का आकलन करना जरूरी है।
कहां और कैसे करें ऑनलाइन आवेदन?
राष्ट्रीय पशुधन मिशन योजना के तहत आवेदन की प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है। इच्छुक और योग्य आवेदक योजना के आधिकारिक पोर्टल nlm.udyamimitra.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।
आवेदन करने के बाद संबंधित राज्य सरकार की एजेंसी परियोजना की जांच करती है। प्रोजेक्ट की पात्रता और जरूरी दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है। इसके बाद बैंक से लोन की मंजूरी और संबंधित अधिकारियों की स्वीकृति मिलने पर सब्सिडी जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
इस योजना में सब्सिडी की रकम एक साथ नहीं दी जाती, बल्कि निर्धारित शर्तें पूरी होने और जरूरी दस्तावेज जमा करने के बाद किस्तों में जारी की जाती है। इसलिए आवेदन के दौरान परियोजना से संबंधित सभी जानकारियां सही देना जरूरी है।
मुर्गी पालन शुरू करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप भी मुर्गी पालन के जरिए अपना कारोबार शुरू करना चाहते हैं तो सबसे पहले यह समझ लें कि आप किस तरह का पोल्ट्री फार्म खोलना चाहते हैं। सामान्य ब्रायलर और लेयर फार्म के बजाय ग्रामीण मुर्गियों की ब्रीडिंग और चूजा उत्पादन से जुड़ी परियोजना इस योजना के दायरे में आती है।
इसके साथ ही जमीन, मुर्गियों की व्यवस्था, हैचरी, तकनीकी प्रशिक्षण और बैंक फाइनेंस जैसी जरूरतों को पहले से पूरा करने की तैयारी करें। सही योजना और बाजार की मांग को समझकर शुरू किया गया पोल्ट्री व्यवसाय ग्रामीण युवाओं और किसानों के लिए रोजगार और कमाई का अच्छा अवसर बन सकता है।









