रांची: प्रेम प्रसंग में डबल मर्डर, प्रेमिका और उसके भाई की हुई थी हत्या, दो साल बाद कोर्ट ने सुनाया बहुचर्चित डबल मर्डर में ये फैसला

Ranchi: Double murder in a love affair; the girlfriend and her brother were killed. Two years later, the court delivered its verdict in this highly publicized double murder case.

Jharkhand Court News : प्रेमी प्रसंग में हुए डबल मर्डर केस में कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। रांची के सुखदेवनगर थाना क्षेत्र के ओझा मार्केट में साल 2022 में बहुचर्चित प्रेम प्रसंग में दो लोगों की जान गयी थी।

विशेष अदालत ने इस मामले में साक्ष्य के अभाव में नाबालिग आरोपी को बरी कर दिया, क्योंकि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में असफल रहा।

सुखदेवनगर थाना क्षेत्र के ओझा मार्केट स्थित रोड नंबर-4 में 18 जून 2022 को दोहरा हत्याकांड हुआ था। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को ठोस साक्ष्यों के साथ सिद्ध नहीं कर सका, जिसके चलते आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त किया गया।

प्राथमिकी के अनुसार, मृतका श्वेता सिंह और आरोपी के बीच प्रेम प्रसंग था। बताया गया था कि आरोपी अक्सर श्वेता के घर मिलने जाया करता था, जिसका श्वेता के परिजन विरोध करते थे। परिजनों की नाराजगी और बार-बार समझाने के बावजूद आरोपी का घर आना-जाना जारी था, जिससे घर में तनाव की स्थिति बनी रहती थी।

घटना के दिन भी आरोपी श्वेता के घर पहुंचा था। इस दौरान परिजनों ने उसका विरोध किया, जिस पर विवाद बढ़ गया। आरोप है कि इसी दौरान आरोपी ने पहले श्वेता की मां पर हमला किया।

बीच-बचाव करने पर आरोपी ने श्वेता और उसके भाई पर भी धारदार हथियार से हमला कर दिया। इस हमले में श्वेता और उसके भाई की मौके पर ही मौत हो गई थी। दोहरे हत्याकांड से इलाके में अफरा-तफरी मच गई थी और लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला था।

घटना के बाद आरोपी फरार हो गया था। पुलिस जांच में सामने आया था कि आरोपी रांची से फरार होकर बिलासपुर, विशाखापट्टनम, भागलपुर और पटना जैसे शहरों में घूमता रहा।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया था। SIT ने तकनीकी साक्ष्यों और खुफिया जानकारी के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया और उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई।

मामला चूंकि नाबालिग आरोपी से जुड़ा था, इसलिए इसकी सुनवाई चिल्ड्रन की विशेष अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई गवाह पेश किए और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी साबित करने का प्रयास किया।

हालांकि बचाव पक्ष ने अभियोजन की कहानी पर सवाल उठाते हुए साक्ष्यों में विरोधाभास और गवाहों के बयानों में कमी को अदालत के सामने रखा।

लंबी सुनवाई के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप संदेह से परे साबित नहीं हो सके। अदालत ने माना कि उपलब्ध साक्ष्य आरोपी को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसी आधार पर नाबालिग आरोपी को बरी कर दिया गया।

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