रांची: सब इंस्पेक्टर को हाईकोर्ट से मिली जमानत, 10000 रुपये घूस लेते हुए थे गिरफ्तार, जानिये कोर्ट ने क्या लगायी है शर्त

Ranchi: High Court grants bail to sub-inspector arrested for accepting bribe of Rs 10,000. Find out the conditions imposed by the court.

सब-इंस्पेक्टर श्याम नंदन पासवान को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तारी के बाद झारखंड हाईकोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सशर्त जमानत मंजूर की है। मामले की जांच अभी जारी है।
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रांची। घूस लेते गिरफ्तार बेड़ो थाना के सब-इंस्पेक्टर श्याम नंदन पासवान को झारखंड हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई है।

हाईकोर्ट में जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की एकलपीठ ने आरोपी को 25-25 हजार रुपये के दो निजी मुचलकों पर जमानत प्रदान करने का आदेश दिया। अदालत ने यह राहत कुछ शर्तों के साथ दी है। आरोपी की ओर से अधिवक्ता अनिल कुमार सिंह महाराणा ने पक्ष रखा।

गिरफ्तारी के महज 33 दिनों के भीतर ही सब-इंस्पेक्टर पासवान को जमानत मिल गई, जिससे यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। जमानत आदेश के बाद अब आरोपी को अदालत द्वारा निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा। आमतौर पर ऐसे मामलों में अदालत आरोपी को जांच में सहयोग करने, साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने और बिना अनुमति क्षेत्र न छोड़ने जैसी शर्तें लगाती है।

क्या है पूरा मामला
आपको बता दें कि 9 जनवरी का बताया जा रहा है, जब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की टीम ने सब-इंस्पेक्टर श्याम नंदन पासवान को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। आरोप है कि पासवान ने एक ट्रक चालक से एमवीआई (मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर) जांच कराने के नाम पर 50 हजार रुपये की मांग की थी।

शिकायतकर्ता ट्रक चालक ने कथित तौर पर एसीबी से संपर्क कर मामले की जानकारी दी थी। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने प्रारंभिक जांच की, जिसमें आरोपों को प्रथम दृष्टया सही पाया गया। इसके बाद टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया। तय योजना के तहत शिकायतकर्ता ने आरोपी को 10 हजार रुपये दिए, उसी दौरान एसीबी की टीम ने मौके पर पहुंचकर सब-इंस्पेक्टर को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के समय कथित रिश्वत राशि भी बरामद की गई थी। एसीबी ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण से संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया। इसके बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

जांच जारी, आगे क्या
मामले में जांच एजेंसी अब भी सक्रिय है। एसीबी इस बात की पड़ताल कर रही है कि कथित रिश्वत मांगने के पीछे क्या परिस्थितियां थीं, और क्या इस प्रकरण में अन्य कोई व्यक्ति या अधिकारी भी संलिप्त है। जांच के दौरान कॉल डिटेल, दस्तावेजी साक्ष्य और गवाहों के बयान जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

कानूनी जानकारों के अनुसार, जमानत मिलना आरोपी की अंतिम दोषमुक्ति नहीं है। अदालत द्वारा जमानत दिए जाने का अर्थ केवल यह है कि आरोपी को मुकदमे के दौरान कुछ शर्तों के साथ स्वतंत्रता दी गई है। दोष सिद्ध होने या न होने का निर्णय ट्रायल के दौरान साक्ष्यों और तर्कों के आधार पर होगा।

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