रेप और बच्चों से दरिंदगी करने वालों की अब खैर नहीं! मोदी सरकार का बड़ा फैसला, 2031 तक बढ़ाई गई फास्ट ट्रैक कोर्ट योजना, 850 अदालतों में होगी ताबड़तोड़ सुनवाई

महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में जल्द न्याय दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मोदी कैबिनेट ने फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट योजना को अगले पांच साल तक जारी रखने की मंजूरी दी है। इस पर 3,788 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाएंगे।

नई दिल्ली। देश में महिलाओं और मासूम बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराधों के मामलों में अब न्याय की रफ्तार तेज करने की तैयारी है। रेप और पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामलों में सालों तक अदालतों के चक्कर काटने वाले पीड़ितों को जल्द इंसाफ दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट यानी FTSC की केंद्र प्रायोजित योजना को अगले पांच साल तक जारी रखने की मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले के बाद देशभर में फास्ट ट्रैक अदालतों की संख्या बढ़ाकर 850 की जाएगी, ताकि यौन अपराधों से जुड़े लंबित मामलों का तेजी से निपटारा किया जा सके।

2031 तक जारी रहेगी योजना, खर्च होंगे 3,788 करोड़ रुपये

केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद यह योजना 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक लागू रहेगी। इसके लिए कुल 3,788.04 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इसमें केंद्र सरकार 2,353.15 करोड़ रुपये खर्च करेगी, जबकि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की हिस्सेदारी 1,434.89 करोड़ रुपये होगी। केंद्र सरकार अपने हिस्से की राशि निर्भया फंड से उपलब्ध कराएगी। सरकार का उद्देश्य सिर्फ अदालतों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि रेप और पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए एक मजबूत न्यायिक व्यवस्था तैयार करना है, जिससे पीड़ितों को लंबे समय तक न्याय का इंतजार न करना पड़े।

779 से बढ़कर 850 होंगी फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट

इस योजना के तहत देश के अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 850 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट संचालित करने का प्रावधान किया गया है। इनमें स्पेशल पॉक्सो कोर्ट भी शामिल होंगी। फिलहाल देश में 779 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट काम कर रही हैं, जिनमें 399 स्पेशल पॉक्सो कोर्ट हैं। अब इनकी संख्या बढ़ाकर 850 की जाएगी। नई अदालतों का विस्तार उन जिलों में किया जाएगा, जहां यौन अपराधों से जुड़े मामलों का बोझ अधिक है और बड़ी संख्या में केस लंबित हैं। इसके लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लंबित मामलों के आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा।

हर कोर्ट में होंगे विशेष न्यायिक अधिकारी और सरकारी वकील

सरकार ने इस योजना के तहत अदालतों में सुनवाई को प्रभावी बनाने के लिए विशेष व्यवस्था भी की है। प्रत्येक फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट में समर्पित न्यायिक अधिकारी, विशेष लोक अभियोजक यानी स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर और छह सहायक कर्मचारियों की व्यवस्था का प्रावधान है। हर FTSC के लिए विशेष रूप से नियुक्त सरकारी वकील का प्रस्ताव है, जो संबंधित मामलों की पैरवी करेंगे। इससे सुनवाई में अनावश्यक देरी कम करने और मामलों को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

महिलाओं और बच्चों को मिलेगा सबसे बड़ा फायदा

इस योजना का सबसे बड़ा लाभ उन महिलाओं और बच्चों को मिलेगा, जो रेप और पॉक्सो एक्ट के तहत यौन अपराधों के शिकार हुए हैं। सरकार का मकसद ऐसे मामलों में पीड़ितों को जल्द न्याय दिलाना और अदालतों में लंबित मामलों की संख्या कम करना है। इसके साथ ही योजना में कमजोर गवाहों के बयान दर्ज करने के लिए विशेष केंद्र और बच्चों के अनुकूल कोर्ट रूम तैयार करने को भी प्रोत्साहित किया गया है। इससे पीड़ित बच्चों और गवाहों को अदालत में बयान देते समय डर, दबाव और असहज परिस्थितियों का सामना कम करना पड़ेगा। खासतौर पर बच्चों के लिए सुरक्षित और संवेदनशील माहौल तैयार करने पर जोर दिया गया है।

जस्टिस डिपार्टमेंट करेगा अदालतों के कामकाज की निगरानी

फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट योजना को न्याय विभाग यानी जस्टिस डिपार्टमेंट संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के साथ मिलकर लागू करेगा। योजना की प्रगति पर नजर रखने के लिए FTSC डैशबोर्ड, नियमित प्रगति रिपोर्ट और राज्यों के खर्च से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा न्याय विभाग हाईकोर्ट और राज्य सरकारों के साथ भी लगातार परामर्श करेगा, ताकि अदालतों के कामकाज और योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं को दूर किया जा सके।

2019 में शुरू हुई थी योजना, अब तक 4 लाख से ज्यादा मामलों का निपटारा

फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट योजना की शुरुआत 2 अक्टूबर 2019 को की गई थी। आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2018 के बाद और सुप्रीम कोर्ट के 25 जुलाई 2019 के निर्देशों के अनुपालन में इस योजना को शुरू किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने उन जिलों में समर्पित विशेष अदालतें स्थापित करने का निर्देश दिया था, जहां पॉक्सो एक्ट के तहत 100 से अधिक मामले लंबित थे। शुरुआत में यह योजना केवल एक साल के लिए लागू की गई थी, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 31 मार्च 2026 तक कर दिया गया था। अब केंद्र सरकार ने इसे फिर पांच साल के लिए आगे बढ़ाने का फैसला लिया है। योजना शुरू होने के बाद से अब तक कुल 4,02,457 मामलों का निपटारा किया जा चुका है।

सरकार के इस फैसले से उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में रेप और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी। हालांकि, योजना की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नई अदालतें कितनी जल्दी स्थापित होती हैं और उनमें न्यायिक अधिकारियों व कर्मचारियों की पर्याप्त नियुक्ति हो पाती है।

Anita Nishad

Anita Nishad is a dedicated and insightful journalist currently serving as a key voice at HPBL News. With a deep-rooted passion for storytelling and truth-seeking, Anita has become a trusted name in digital and broadcast journalism, particularly known for her ability to bring grassroots issues to the forefront.

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