Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा पर इन 3 आरती के बिना अधूरी मानी जाती है पूजा, जानें मां लक्ष्मी, विष्णु और चंद्रदेव की आरती

Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा का पर्व 25 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन कोजागरी पूजा भी की जाती है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की आराधना के साथ चंद्रदेव की पूजा करना भी शुभ माना जाता है। इस मौके पर खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखने और चंद्रदेव को अर्घ्य देने की परंपरा है। पूजा के दौरान मां लक्ष्मी, भगवान विष्णु और चंद्रदेव की आरती करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।
शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की आरती
शरद पूर्णिमा को मां लक्ष्मी की पूजा के लिए खास माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा के साथ देवी लक्ष्मी की आराधना करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जाती है। कोजागरी पूजा के दौरान मां लक्ष्मी की आरती की जा सकती है।
मां लक्ष्मी की आरती
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता।
ॐ जय लक्ष्मी माता।
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता।
ॐ जय लक्ष्मी माता।
दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता।
ॐ जय लक्ष्मी माता।
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भव निधि की त्राता।
ॐ जय लक्ष्मी माता।
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता।
ॐ जय लक्ष्मी माता।
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता।
ॐ जय लक्ष्मी माता।
शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरसिन्धु-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता।
ॐ जय लक्ष्मी माता।
महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता।
ॐ जय लक्ष्मी माता।
भगवान विष्णु की आरती करना भी माना जाता है शुभ
हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को सृष्टि का पालनहार माना गया है। शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु की पूजा करने की परंपरा भी है। मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की आरती करने और श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करने से भक्त सुख-शांति और खुशहाली की कामना करते हैं।
भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे।
ॐ जय जगदीश हरे।
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
स्वामी दुःख विनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का।
ॐ जय जगदीश हरे।
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी।
स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी।
ॐ जय जगदीश हरे।
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी।
ॐ जय जगदीश हरे।
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता।
स्वामी तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता।
ॐ जय जगदीश हरे।
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति।
ॐ जय जगदीश हरे।
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे।
ॐ जय जगदीश हरे।
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
स्वामी पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा।
ॐ जय जगदीश हरे।
श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।
स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे।
ॐ जय जगदीश हरे।
चंद्रदेव की आरती का भी है विशेष महत्व
शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, इस दिन चंद्रदेव को अर्घ्य दिया जाता है और उनकी आरती की जाती है। कई घरों में खीर बनाकर चांदनी में रखने की परंपरा भी निभाई जाती है। मान्यता है कि श्रद्धा के साथ चंद्रदेव की पूजा करने से मन को शांति मिलती है।
चंद्रदेव की आरती
ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा।
दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी।
रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी।
दीन दयाल दयानिधि, भव बंधन हारी।
जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे।
सकल मनोरथ दायक, निर्गुण सुखराशि।
योगीजन हृदय में, तेरा ध्यान धरें।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, संत करें सेवा।
वेद पुराण बखानत, भय पातक हारी।
प्रेमभाव से पूजें, सब जग के नारी।
शरणागत प्रतिपालक, भक्तन हितकारी।
धन सम्पत्ति और वैभव, सहज ही सो पावे।
विश्व चराचर पालक, ईश्वर अविनाशी।
सब जग के नर नारी, पूजा-पाठ करें।
ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा।
शरद पूर्णिमा पर किस समय करें आरती
शरद पूर्णिमा की रात कोजागरी पूजा के दौरान मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की आरती की जा सकती है। वहीं, चंद्रमा को अर्घ्य देते समय चंद्रदेव की आरती करने की परंपरा है। पूजा के दौरान स्वच्छता का ध्यान रखें और अपनी श्रद्धा के अनुसार दीपक, धूप तथा फूल अर्पित करें।
ध्यान रखें कि पूजा की विधि और परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों तथा परिवारों में भिन्न हो सकती हैं। आरती और पूजा को श्रद्धा के साथ करना धार्मिक आस्था का विषय है। किसी विशेष विधि का पालन न कर पाने से पूजा का फल निश्चित रूप से नहीं मिलेगा, ऐसा दावा करना उचित नहीं है।









