1 मंच पर 21 देश, सामने आए 5 बड़े फैसले! BRICS के दिल्ली सम्मेलन से भारत को क्या मिला? बदल सकता है दुनिया का आर्थिक खेल
स्थानीय करेंसी में कारोबार से लेकर AI और वैकल्पिक पेमेंट सिस्टम तक कई अहम मुद्दों पर बनी सहमति, वैश्विक मंच पर भारत की कूटनीतिक भूमिका और मजबूत होने का दावा

नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सम्मेलन में 21 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधियों की भागीदारी ने इसे ग्लोबल साउथ के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के तौर पर पेश किया। बैठक में आर्थिक सहयोग, तकनीक, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया।
इस सम्मेलन से भारत के लिए भी कई रणनीतिक और आर्थिक अवसर सामने आने की बात कही जा रही है। खास तौर पर स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था और तकनीकी सहयोग जैसे मुद्दे भारत के लिए अहम माने जा रहे हैं।
एक मंच पर जुटे 21 से ज्यादा देश, ग्लोबल साउथ की बढ़ी आवाज
दिल्ली में हुए सम्मेलन की सबसे बड़ी खासियत बड़ी संख्या में देशों की भागीदारी रही। पारंपरिक ब्रिक्स सदस्यों के अलावा ग्लोबल साउथ से जुड़े कई देशों ने भी मंच पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
दुनिया इस समय युद्ध, आर्थिक अनिश्चितता, सप्लाई चेन संकट और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव जैसी चुनौतियों से गुजर रही है। ऐसे समय में विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक मंच पर आना वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक और दूसरी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में विकासशील देशों की भूमिका बढ़ाने और सुधार की मांग करता रहा है। ऐसे में ब्रिक्स का विस्तार और इसकी बढ़ती सक्रियता भारत के लिए कूटनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
BRICS के 5 बड़े फैसले, जिन पर टिकी दुनिया की नजर
1. स्थानीय मुद्राओं में कारोबार को बढ़ावा
डॉलर पर निर्भरता कम करने की दिशा में ब्रिक्स देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। इसके तहत रुपये, युआन, रूबल जैसी स्थानीय मुद्राओं में लेनदेन बढ़ाने की दिशा में सहयोग की बात सामने आई।
भारत के लिए इसका महत्व इसलिए भी है क्योंकि इससे भविष्य में अंतरराष्ट्रीय व्यापार में रुपये के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलने की संभावना बन सकती है।
2. वैकल्पिक पेमेंट सिस्टम पर जोर
अंतरराष्ट्रीय भुगतान व्यवस्था को अधिक स्वतंत्र और सुरक्षित बनाने के लिए वैकल्पिक क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट मैकेनिज्म विकसित करने की दिशा में सहयोग पर चर्चा हुई।








