JPSC-JSSC Protest: क्या छात्रों के आंदोलन से दबाव में कांग्रेस? 18 अगस्त की बैठक के क्या हैं सियासी संकेत
JPSC-JSSC छात्र आंदोलन और 20 अगस्त के CM हाउस घेराव के बीच कांग्रेस ने 18 अगस्त को अहम बैठक बुलाई है। क्या कांग्रेस सरकार पर दबाव बढ़ाएगी? जानें सियासी संकेत।

रांची। क्या झारखंड में छात्रों के आंदोलन से कांग्रेस पार्टी प्रेशर में है ? दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन पर कांग्रेस मुखर थी, लेकिन अब अपने सत्ताधारी राज्य में आंदोलन पर वो चौतरफा घिर गयी है। इधर, झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब सिर्फ परीक्षा सुधार की मांग तक सीमित नहीं रह गया है।
20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास घेराव के छात्रों के ऐलान के बाद राज्य की सियासत भी गरमाने लगी है। इस बीच कांग्रेस ने 18 अगस्त को पार्टी की अहम बैठक बुलाई है, जिसमें प्रदेश प्रभारी के. राजू समेत मंत्री, विधायक, प्रदेश पदाधिकारी और सभी जिलाध्यक्षों को बुलाया गया है।
कांग्रेस की इस बैठक को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब JPSC-JSSC आंदोलन को लेकर छात्रों का रुख लगातार सख्त होता दिखाई दे रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या छात्र आंदोलन के बढ़ते दबाव से कांग्रेस भी राजनीतिक कसमकश में आ गई है? क्या पार्टी अब सरकार के सामने छात्रों के मुद्दे को ज्यादा मजबूती से उठाने की रणनीति तैयार करेगी?
18 अगस्त की बैठक क्यों है अहम?
कांग्रेस की ओर से बुलाई गई बैठक में मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के साथ JPSC-JSSC छात्र आंदोलन पर भी चर्चा होने की संभावना है। पार्टी के मंत्री, विधायक, प्रदेश पदाधिकारी और जिलाध्यक्ष बैठक में शामिल होंगे। इसके अलावा राजनीतिक मामलों की समिति के साथ भी बैठक होगी।
दरअसल, आंदोलनरत छात्र JPSC और JSSC परीक्षाओं में सुधार समेत अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं। छात्रों के 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास घेराव के ऐलान ने इस पूरे मामले को और महत्वपूर्ण बना दिया है।यही वजह है कि कांग्रेस की बैठक को केवल संगठनात्मक बैठक के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसके जरिए पार्टी आंदोलन को लेकर अपनी राजनीतिक स्थिति और आगे की रणनीति तय कर सकती है।
क्या कांग्रेस पर भी बढ़ रहा है छात्रों का दबाव?
छात्र आंदोलन के दौरान कांग्रेस भी सवालों के घेरे में रही है। खास बात यह है कि छात्रों से बातचीत करने वाली सरकार की टीम में कांग्रेस कोटे से मंत्री भी शामिल रहे हैं। इसके बावजूद आंदोलन खत्म नहीं हुआ और अब छात्रों ने मुख्यमंत्री आवास घेराव का ऐलान कर दिया है।ऐसे में कांग्रेस के सामने दोहरी चुनौती दिखाई दे रही है। एक तरफ वह राज्य सरकार में गठबंधन का हिस्सा है, वहीं दूसरी तरफ छात्र आंदोलन को लेकर पार्टी को अपनी राजनीतिक भूमिका भी तय करनी होगी।18 अगस्त की बैठक में इसी संतुलन पर सबसे ज्यादा नजर रहेगी।
सरकार पर दबाव बढ़ाएगी कांग्रेस?
कांग्रेस की बैठक के बाद पार्टी JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर सरकार के सामने छात्रों की मांगों को किस तरह रखती है, यह अहम होगा। यदि पार्टी छात्रों की मांगों के समर्थन में ज्यादा मुखर होती है, तो इसे सरकार पर कांग्रेस के बढ़ते दबाव के तौर पर देखा जा सकता है।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि बैठक के बाद कांग्रेस सरकार के खिलाफ कोई अलग रुख अपनाएगी या गठबंधन के भीतर ही छात्रों के मुद्दे को उठाने की रणनीति बनाएगी।इसलिए 18 अगस्त की बैठक के फैसले और बैठक के बाद कांग्रेस के रुख पर राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी।
20 अगस्त के ऐलान ने बढ़ाई सरकार की चिंता
JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और सुधार की मांग को लेकर छात्र लगातार आंदोलन कर रहे हैं। अब 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास घेराव का कार्यक्रम घोषित होने के बाद सरकार के सामने भी स्थिति को संभालने की चुनौती बढ़ गई है।कांग्रेस की बैठक इसी घटनाक्रम के बीच हो रही है। ऐसे में बैठक में छात्रों की मांगों, सरकार की ओर से अब तक उठाए गए कदमों और आगे की रणनीति पर चर्चा होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कांग्रेस के लिए आगे की राह आसान नहीं
कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह गठबंधन सरकार की जिम्मेदारी और छात्रों के मुद्दे के बीच संतुलन कैसे बनाए। अगर पार्टी छात्रों की मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ाती है तो गठबंधन की राजनीति पर इसका असर पड़ सकता है। वहीं अगर पार्टी सरकार के साथ मजबूती से खड़ी रहती है तो आंदोलनरत छात्रों के बीच उसकी स्थिति को लेकर सवाल उठ सकते हैं।
फिलहाल 18 अगस्त की बैठक से यह संकेत जरूर मिल रहा है कि JPSC-JSSC छात्र आंदोलन अब कांग्रेस के लिए भी गंभीर राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। अब देखना होगा कि बैठक के बाद पार्टी छात्रों के साथ खड़ी होती है, सरकार पर दबाव बढ़ाती है या गठबंधन के भीतर समाधान का रास्ता तलाशती है।
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