JPSC घोटाला: 80 लाख में परीक्षा पास कराने की डील की पूरी कहानी, PT में 20 लाख, मेंस में 40, जानिए बाकी बचे पैसे कब देने थे
JPSC मेधा घोटाले में 14वीं परीक्षा के अभ्यर्थी के कथित बयान से 80 लाख की डील का खुलासा हुआ है। जानिए PT, Mains और Interview के लिए कैसे तय हुई रकम।
रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, परीक्षा में सेटिंग और पैसों के लेन-देन को लेकर कई चौंकाने वाली बातें सामने आ रही हैं। इस मामले में सीआईडी की पूछताछ में गिरफ्तार अभ्यर्थी सुमन सौरभ ने कथित तौर पर परीक्षा पास कराने के लिए 80 लाख रुपये की डील होने की बात बताई है।
उसके बयान के अनुसार, यह रकम एक साथ नहीं, बल्कि प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार के अलग-अलग चरणों में देने की योजना थी।सीआईडी के सामने दिए गए कथित बयान के मुताबिक, पवन नामक एजेंट ने सुमन सौरभ से 14वीं JPSC परीक्षा में अंतिम रूप से चयन कराने के एवज में 80 लाख रुपये मांगे थे।
डील के तहत 20 लाख रुपये पीटी से पहले, 40 लाख रुपये मुख्य परीक्षा से पहले और 20 लाख रुपये इंटरव्यू से पहले देने की बात कही गई थी। हालांकि, सुमन के अनुसार उसने पीटी पास कराने के एवज में तय रकम में से 16 लाख रुपये ही दिए थे।
80 लाख की डील, तीन चरणों में तय हुआ था भुगतान
सुमन सौरभ के कथित बयान के अनुसार पूरी डील को तीन हिस्सों में बांटा गया था।
• 20 लाख रुपये- प्रारंभिक परीक्षा (PT) पास कराने के लिए
• 40 लाख रुपये- मुख्य परीक्षा (Mains) पास कराने के लिए
• 20 लाख रुपये- साक्षात्कार के बाद अंतिम चयन के लिए
इस तरह कथित तौर पर कुल 80 लाख रुपये में परीक्षा पास कराने की बात हुई थी।सुमन के अनुसार, पीटी परीक्षा पास होने के बाद उसका एजेंट पर भरोसा और मजबूत हो गया। उसने पीटी से जुड़ी रकम में से कुल 16 लाख रुपये पांच किश्तों में बैंक खाते के जरिए दिए।
दोस्त के मामा के जरिए एजेंट तक पहुंचने का दावा
सीआईडी को दिए कथित बयान में सुमन ने बताया कि वर्ष 2020 में ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। वह इससे पहले सातवीं और 11वीं JPSC परीक्षा में असफल रहा था। वर्ष 2023 में JSSC CGL परीक्षा में भी उसे सफलता नहीं मिली।
इसके बाद उसकी मुलाकात अपने दोस्त दिवाकर कुमार के मामा प्रकाश कुमार से हुई। सुमन के मुताबिक, प्रकाश कुमार के माध्यम से ही उसकी मुलाकात कथित एजेंट पवन सिंह से कराई गई।आरोप के मुताबिक, पवन सिंह ने सुमन को बताया कि 14वीं JPSC परीक्षा में सेटिंग के जरिए उसे सफल कराया जा सकता है और इसके लिए 80 लाख रुपये देने होंगे।
परीक्षा केंद्र पर सिर्फ वही सवाल करने की हिदायत
सुमन के कथित बयान के अनुसार, पवन ने उसे परीक्षा के दौरान एक खास तरीके से प्रश्न हल करने को कहा था। उसे बताया गया था कि जिस प्रश्न का उत्तर आता हो, सिर्फ उसी को भरना है और बाकी प्रश्न छोड़ देने हैं।19 अप्रैल 2026 को बोकारो के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर स्थित परीक्षा केंद्र पर प्रारंभिक परीक्षा हुई।
सुमन के अनुसार, पहली पाली में उसने सिर्फ 38 प्रश्नों के उत्तर दिए और दूसरी पाली में 48 प्रश्नों के उत्तर बनाए। बाकी ओएमआर शीट खाली छोड़ने का दावा किया गया।इसके बाद उसने अपना क्रमांक और कार्बन कॉपी कथित तौर पर पवन सिंह को दे दी।
पिता के बैंक खाते से एजेंट को पैसे ट्रांसफर करने का दावा
सुमन के मुताबिक, प्रारंभिक परीक्षा के बाद उसके पिता के बैंक खाते से पवन सिंह के रांची स्थित एक्सिस बैंक खाते में चार किश्तों में 12 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए।इसके बाद 2 जुलाई 2026 को परीक्षा परिणाम आने के बाद चार लाख रुपये और ट्रांसफर किए गए। इस तरह उसके अनुसार पीटी पास कराने के लिए कुल 16 लाख रुपये का भुगतान किया गया।परीक्षा परिणाम आने के बाद सुमन की ओएमआर शीट सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इसके बाद मामले की जांच शुरू हुई और सीआईडी ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
अब बैंक खातों की जांच में जुटी CID
सुमन के बयान के बाद जांच एजेंसी अब कथित लेन-देन के बैंक रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। जांच में यह देखा जा रहा है कि पैसे किस खाते से किस खाते में गए, कितनी किश्तों में ट्रांसफर हुए और रकम आगे किन खातों तक पहुंची।बैंक खातों के लेन-देन की जांच से कथित परीक्षा सेटिंग में शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
13वीं JPSC को लेकर भी सामने आए अलग दावे
जांच के बीच 13वीं JPSC प्रतियोगिता परीक्षा में चयनित दो अभ्यर्थियों ने भी अपने चयन को लेकर लगे आरोपों को खारिज किया है। इनमें से एक अभ्यर्थी वर्तमान में डीएसपी पद पर चयनित है।उसका कहना है कि वह इससे पहले भी JPSC की परीक्षा के साक्षात्कार तक पहुंचा था, लेकिन 62 अंक मिलने के कारण चयनित नहीं हो सका था। 13वीं JPSC में उसे 66 अंक मिले और उसका चयन हुआ। उसने अपने चयन को अपनी प्रतिभा का परिणाम बताया है।एक अन्य चयनित अभ्यर्थी ने भी रिश्वत या सिफारिश के आरोपों को खारिज करते हुए अपनी योग्यता के आधार पर सफलता मिलने की बात कही है।
अभय तिवारी के बयान के बाद जांच का दायरा बढ़ा
मामले में अभय तिवारी के कथित बयान के बाद भी जांच एजेंसी का फोकस JPSC परीक्षा में कथित सिंडिकेट पर है। आरोपों के अनुसार 11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा के दौरान कुछ अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में कथित तौर पर लाभ पहुंचाने के लिए सेटिंग की गई थी।
जांच में कोचिंग संचालक, एजेंट, JPSC से जुड़े लोगों के सहयोगियों और परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी से जुड़े लोगों के नाम सामने आने का दावा किया गया है। कथित तौर पर सिर्फ इंटरव्यू में मदद के लिए प्रति अभ्यर्थी 15 लाख रुपये तक की रकम लेने की बात जांच में सामने आई है।हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
80 लाख की कथित डील ने खड़े किए बड़े सवाल
सुमन सौरभ के कथित बयान में सामने आई 80 लाख रुपये की डील ने JPSC परीक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित सेटिंग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि इस कथित डील में परीक्षा के अलग-अलग चरणों के लिए अलग-अलग रकम तय होने की बात कही गई है।
अब CID की जांच में सबसे अहम कड़ी बैंक ट्रांजैक्शन, कथित एजेंटों की भूमिका, ओएमआर शीट और अन्य डिजिटल साक्ष्य बन गए हैं। इन साक्ष्यों से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सुमन के आरोपों के पीछे पूरी व्यवस्था कितनी बड़ी थी और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।









