थलापति के नए CM ऑफिस पर छिड़ा सियासी घमासान, ₹5.5 करोड़ के टेंडर ने बढ़ाई हलचल… 100 दिन में ही घिरी विजय सरकार!

चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नए ऑफिस को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सरकार के 100 दिन पूरे होने के साथ ही मुख्यमंत्री कार्यालय को फोर्ट सेंट जॉर्ज से चेन्नई के नमक्कल कविंजर मालिगई में शिफ्ट करने की योजना पर सवाल उठने लगे हैं। विवाद की सबसे बड़ी वजह करीब ₹5.5 करोड़ का टेंडर है, जिसे लेकर बीजेपी ने टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी के आरोप लगाए हैं।
आखिर नए CM ऑफिस को लेकर क्या है विवाद?
मुख्यमंत्री जोसेफ विजय का कार्यालय फोर्ट सेंट जॉर्ज से नमक्कल कविंजर मालिगई में शिफ्ट करने की योजना बनाई गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नए ऑफिस से जुड़े निर्माण कार्य शुरू हो चुके हैं। इसी बीच सरकार की ओर से शिफ्टिंग से संबंधित करीब ₹5.5 करोड़ का टेंडर जारी किए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।
बीजेपी का आरोप है कि निर्माण कार्य शुरू होने के करीब एक महीने बाद टेंडर जारी किया गया। इसी आधार पर पार्टी ने सरकारी टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।
बीजेपी ने सरकार पर साधा निशाना
बीजेपी नेता सी.आर. केशवन ने आरोप लगाया कि TVK सरकार ने सत्ता में आने के बाद सरकारी टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के बड़े दावे किए थे, लेकिन मुख्यमंत्री के नए कार्यालय से जुड़े टेंडर को लेकर सामने आई खबरों ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उन्होंने कहा कि करीब ₹5.5 करोड़ के टेंडर में कथित तौर पर कई अनियमितताएं सामने आई हैं। बीजेपी नेता ने यह भी कहा कि सरकार को सत्ता संभाले अभी महज 100 दिन हुए हैं और इतने कम समय में ही उसे इस तरह के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है।
DMK ने भी मांगी सरकार से सफाई
मामले में DMK विधायक EV वेलु ने भी सरकार से स्पष्टीकरण की मांग की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अपना ऑफिस कहां रखना चाहते हैं, यह उनका निजी फैसला है और इसमें विपक्ष को दखल नहीं देना चाहिए।
हालांकि, उन्होंने टेंडर प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों को गंभीर बताया। उनका कहना है कि रिपोर्ट्स में टेंडर में कथित गड़बड़ियों और इसे ऑनलाइन जारी नहीं किए जाने का उल्लेख किया गया है।
EV वेलु ने सवाल उठाया कि अगर सरकार टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता की बात करती है, तो फिर कथित तौर पर काम शुरू होने के बाद टेंडर क्यों मंगाया गया?
TVK ने आरोपों को बताया गलत
वहीं, सरकार की ओर से इन आरोपों को खारिज किया गया है। तमिलनाडु के मंत्री आधव अर्जुन ने विवाद पर सफाई देते हुए इन खबरों को गलत बताया।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के लिए बेहतर कार्यस्थल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ऑफिस को कुछ समय के लिए दूसरी जगह शिफ्ट करने की योजना बनाई जा रही है। उनके मुताबिक, मुख्यमंत्री के अधिकारी और कर्मचारी फिलहाल बेहद छोटी जगह में काम कर रहे हैं, जहां पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री चाहते हैं कि जिस तरह उन्हें काम करने के लिए बेहतर जगह मिले, उसी तरह उनके साथ काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को भी आरामदायक कार्यस्थल मिले।
अब टेंडर विवाद पर सबकी नजर
मुख्यमंत्री के नए ऑफिस की शिफ्टिंग को लेकर राजनीतिक दलों के आमने-सामने आने के बाद मामला और गरमा गया है। एक तरफ बीजेपी और DMK टेंडर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी ओर TVK सरकार आरोपों को खारिज कर रही है।
अब देखना होगा कि सरकार ₹5.5 करोड़ के इस टेंडर और कथित अनियमितताओं को लेकर क्या विस्तृत सफाई देती है और क्या इस विवाद पर आगे कोई जांच या कार्रवाई होती है।









