भारत-जर्मनी प्रोजेक्ट-75I: समंदर में भारत की ताकत बढ़ाएगा 90,000 करोड़ रुपये का मेगा सबमरीन सौदा
India-Germany Project-75I: ₹90,000 crore mega submarine deal to boost India's maritime might.

नई दिल्ली : हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में चीनी नौसेना की बढ़ती दखलअंदाजी और संदिग्ध गतिविधियों के बीच भारत अपनी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को एक नया अभेद्य कवच देने जा रहा है। भारत और जर्मनी बहुत जल्द अगली पीढ़ी (Next-Gen) की अत्याधुनिक पनडुब्बियों के निर्माण के लिए लगभग 8 अरब यूरो (90,000 करोड़ रुपये से अधिक) के एक ऐतिहासिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले हैं।
भारत में जर्मनी के राजदूत फिलिप एकरमैन ने पुष्टि की है कि दोनों देश प्रोजेक्ट-75I (Project-75 India) के तहत इस अंतर-सरकारी सौदे को अंतिम रूप दे रहे हैं। इस डील के तहत भारतीय नौसेना के लिए भारत में ही 6 आधुनिक पारंपरिक पनडुब्बियां बनाई जाएंगी।
’मेक इन इंडिया’ से स्वदेशी क्षमताओं को मिलेगी नई उड़ान
इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य केवल पनडुब्बियां खरीदना नहीं, बल्कि भारत को भविष्य में खुद की सबमरीन डिजाइन और निर्माण में आत्मनिर्भर बनाना है। यह डील जर्मनी की रक्षा दिग्गज थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) और भारत की मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स (MDL) के बीच होगी।
जर्मनी भारत में एक मजबूत सप्लाई-चेन और पार्टनर नेटवर्क तैयार कर रहा है:
- हैवीवेट टॉरपीडो: TKMS की सहायक कंपनी ‘एटलस इलेक्ट्रॉनिक’ ने हैदराबाद की VEM टेक्नोलॉजीज के साथ हाथ मिलाया है, जो टॉरपीडो मॉडर्नाइजेशन, इंटीग्रेशन और टेस्टिंग का जिम्मा संभालेगी।
- एंटी-सबमरीन सिस्टम्स: मुंबई की CFF फ्लुइड कंट्रोल के साथ पनडुब्बी-रोधी युद्ध प्रणालियों (ASW) के निर्माण के लिए साझेदारी हुई है।
- DRDO के साथ टाई-अप: डीआरडीओ के साथ कई अन्य तकनीकी हस्तांतरण (Technology Transfer) पर बातचीत जारी है।
- AIP तकनीक: समंदर के नीचे ‘अदृश्य’ शिकारी
प्रोजेक्ट-75I की पनडुब्बियों की सबसे बड़ी ताकत इनका एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) सिस्टम होगा। - हफ्तों तक पानी में रहने की क्षमता: सामान्य डीजल-इलेक्ट्रिक सबमरीन को बैटरी रीचार्ज करने के लिए हर 2-3 दिन में सतह पर आना पड़ता है, जिससे वे दुश्मन की नज़र में आ जाती हैं। AIP से लैस पनडुब्बियां 2 से 3 सप्ताह तक लगातार पानी के भीतर छिपी रह सकती हैं।
- घातक मारक क्षमता: ये सबमरीन अत्याधुनिक सोनार, आधुनिक गाइडेड मिसाइलें, हैवीवेट टॉरपीडो और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) प्रणालियों से लैस होंगी।
सामरिक महत्व: क्यों मास्टरस्ट्रोक है यह डील
सबमरीन बेड़े की कमी होगी दूर: भारतीय नौसेना लंबे समय से पारंपरिक सबमरीन की कमी से जूझ रही है। यह सौदा बेड़े की ताकत को तुरंत रीचार्ज करेगा।
- चीन पर कड़ा शिकंजा: हिंद महासागर में चीनी पनडुब्बियों की बढ़ती आवाजाही के बीच ये AIP सबमरीन भारत की निगरानी और जवाबी हमले की क्षमता को कई गुना बढ़ा देंगी।
- भविष्य की खुद की डिजाइन क्षमता: इस टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के दम पर भारत आने वाले दशकों में स्वदेशी पनडुब्बियों का खुद डिजाइन और निर्माण करने में सक्षम बनेगा।









