‘फांसी दे दो या जेल भेज दो…’ वंदे मातरम पर कांग्रेस नेता का बड़ा बयान, दो छंद से आगे गाने से किया इनकार
Vande Mataram Controversy: राष्ट्रगीत वंदे मातरम को लेकर देश की राजनीति में विवाद और तेज हो गया है। कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद के एक बयान ने इस मुद्दे को फिर सुर्खियों में ला दिया है। उन्होंने साफ कहा कि चाहे उन्हें फांसी दी जाए या जेल भेजा जाए, वह वंदे मातरम के केवल दो छंद ही गाएंगे। उनका कहना है कि कर्नाटक में भी परंपरागत रूप से दो ही छंद गाए जाते हैं।
हरिप्रसाद के इस बयान के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव और बढ़ने के आसार हैं। पिछले कुछ दिनों में कांग्रेस के कार्यक्रमों में वंदे मातरम के पूरे गीत के बजाय शुरुआती दो छंद गाए जाने को लेकर बीजेपी लगातार सवाल उठा रही है।
क्या कहा बी.के. हरिप्रसाद ने?
कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने कहा कि वह वंदे मातरम के केवल दो छंद गाएंगे और अपने रुख से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें फांसी पर चढ़ा दिया जाए या जेल भेज दिया जाए, लेकिन वह पूरा वंदे मातरम नहीं गाएंगे।
हरिप्रसाद ने यह भी कहा कि कांग्रेस लंबे समय से वंदे मातरम का गायन करती रही है और कर्नाटक में दो छंद गाने की परंपरा रही है। उन्होंने बीजेपी और आरएसएस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस को देशभक्ति का प्रमाण किसी राजनीतिक संगठन से लेने की जरूरत नहीं है।
72 घंटे में दो बार विवाद
वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस पहले भी पिछले कुछ दिनों में विवादों में रही है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में हुए कार्यक्रम को लेकर बीजेपी ने आरोप लगाया कि पूरा वंदे मातरम नहीं गाया गया। कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि मुख्यालय में पूरा राष्ट्रगीत गाया गया था।
इसके बाद 17 अगस्त को गोवा में कांग्रेस की बैठक के दौरान भी वंदे मातरम के शुरुआती दो छंद गाए जाने को लेकर विवाद खड़ा हुआ। इस कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी मौजूद थे।
खड़गे ने बीजेपी को दिया जवाब
विवाद के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बीजेपी के हमलों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस वही वंदे मातरम गाती रही है जिसे महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं ने भी गाया था।
खड़गे ने सवाल उठाया कि अगर वंदे मातरम के इस रूप को लेकर कांग्रेस पर कार्रवाई की जानी है, तो फिर महात्मा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी और सरदार वल्लभभाई पटेल पर भी मामला दर्ज किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस लंबे समय से चली आ रही परंपरा के अनुसार ही इसका गायन करती रही है।
खड़गे ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने आजादी से पहले ही राष्ट्रीय गीत को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया था और केवल किसी सरकार के कहने से कोई नई परंपरा राष्ट्रीय मानक नहीं बन जाती।
सरकार के नए कदम के बाद क्यों बढ़ा विवाद?
वंदे मातरम के पूरे संस्करण को लेकर हाल के दिनों में राजनीतिक बहस और तेज हुई है। इसी बीच इस साल स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से पूरे वंदे मातरम के गायन की खबर भी सामने आई।
ऐसे में बीजेपी का तर्क है कि राष्ट्रगीत के पूरे संस्करण का सम्मान किया जाना चाहिए, जबकि कांग्रेस के नेता परंपरा और पहले से अपनाए गए गायन के स्वरूप का हवाला दे रहे हैं।
अब बी.के. हरिप्रसाद के बयान के बाद विवाद और गहरा गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद से लेकर राजनीतिक मंचों तक कांग्रेस और बीजेपी के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।









