झारखंड: अब सिर्फ 7 इनामी नक्सली ही बचे हैं इस इलाके में, कभी 53 से ज्यादा था आतंक का नेटवर्क, पलामू रेंज में नक्सलियों पर पुलिस का बड़ा फोकस
पलामू रेंज में नक्सलवाद के खिलाफ पुलिस अभियान का बड़ा असर दिखा है। कभी 53 से ज्यादा इनामी नक्सली थे, अब सिर्फ 7 बाकी हैं। पुराने फरार आरोपियों पर भी शिकंजा कसेगा।

पलामू। केंद्र सरकार ने भले ही देश के नक्सलियों के खात्मा होने का ऐलान कर दिया हो, लेकिन झारखंड में अभी भी नक्सलियों की दस्तक मौजूद है। दावा किया जा रहा है कि झारखंड के बीहड़ों में अभी भी नक्सलियों की मौजूदगी है। खासकर पलामू, गढ़वा और लातेहार में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए गए लगातार अभियानों का असर अब साफ दिखाई दे रहा है। कभी पलामू रेंज में 53 से अधिक इनामी नक्सली कमांडर सक्रिय थे, लेकिन पुलिस के अभियान, गिरफ्तारियों, मुठभेड़ों और नक्सलियों के आत्मसमर्पण के बाद अब यह संख्या घटकर सिर्फ 7 रह गई है।
पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2015-16 के दौरान पलामू रेंज में 53 से अधिक इनामी नक्सली कमांडर थे। इसके बाद सुरक्षाबलों ने नक्सल प्रभावित इलाकों में लगातार अभियान चलाए। कार्रवाई का असर यह हुआ कि वर्ष 2019 तक इनामी नक्सलियों की संख्या घटकर करीब 18 रह गई। अब वर्ष 2026 में रेंज में ऐसे इनामी नक्सलियों की संख्या केवल सात बची है।
31 से ज्यादा नक्सली मुठभेड़ में मारे गए
आपको बता दें कि पलामू, गढ़वा और लातेहार में पिछले वर्षों के दौरान सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के खिलाफ कई बड़े अभियान चलाए। वर्ष 2015 के बाद से इन इलाकों में हुई अलग-अलग मुठभेड़ों में 31 से अधिक नक्सली मारे गए, जबकि बड़ी संख्या में नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया और कई ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण भी किया।लगातार कार्रवाई के कारण नक्सली संगठनों की सक्रियता और उनका प्रभाव क्षेत्र भी काफी सीमित हुआ है। हालांकि पुलिस अब भी बचे हुए इनामी नक्सलियों को पकड़ने के लिए अभियान चला रही है।
फरारी सूची में भी सामने आई बड़ी लापरवाही
इसी बीच पलामू रेंज के डीआईजी किशोर कौशल के निरीक्षण के दौरान पुलिस रिकॉर्ड को लेकर गंभीर खामी सामने आई। कई ऐसे नक्सलियों के नाम अब भी फरारी सूची में दर्ज मिले, जो या तो मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं, गिरफ्तार हो चुके हैं या आत्मसमर्पण कर चुके हैं।कुछ मामलों में जेल में बंद आरोपियों के नाम भी फरारी सूची में दर्ज पाए गए। इसके बाद पलामू, गढ़वा और लातेहार जिलों में फरार नक्सलियों और अपराधियों से जुड़े रिकॉर्ड की समीक्षा शुरू कर दी गई है।
अब सात इनामी नक्सलियों पर पुलिस का फोकस
पुलिस अब बचे हुए सात इनामी नक्सलियों के साथ-साथ लंबे समय से फरार अपराधियों की तलाश पर भी विशेष ध्यान दे रही है। आठ से दस साल पुराने मामलों की सूची तैयार कर फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।थाना प्रभारियों के कार्यकाल की भी समीक्षा होगी। इसमें यह देखा जाएगा कि उनके क्षेत्र में कितने फरार आरोपी गिरफ्तार हुए, कितने नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया या मुठभेड़ में मारे गए और इन घटनाओं के बाद पुलिस रिकॉर्ड में जरूरी बदलाव किए गए या नहीं।इस कार्रवाई से साफ है कि पलामू रेंज में नक्सलवाद के खिलाफ पुलिस की बड़ी सफलता के बाद अब सबसे बड़ा फोकस बचे हुए सात इनामी नक्सलियों तक पहुंचने और पुराने फरार आरोपियों को कानून के शिकंजे में लाने पर है।








