JPSC-JSSC आंदोलन पर SC के फैसले से मची हलचल! 950+ प्रदर्शनकारियों की FIR होगी खत्म या चलेगा केस? जानिए पूरा मामला
सुप्रीम कोर्ट ने 20 से 25 जुलाई के बीच हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी FIR पर आगे की कार्रवाई रोकने का आदेश दिया; झारखंड के JPSC-JSSC आंदोलन की प्रमुख FIR बाद की तारीखों में दर्ज हुईं

रांची। झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ हुए छात्र आंदोलनों से जुड़ी FIR को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। इसकी वजह सुप्रीम कोर्ट का मंगलवार को आया अहम आदेश है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से झारखंड में JPSC-JSSC आंदोलन से जुड़ी 950 से अधिक FIR स्वतः खत्म नहीं होती हैं। इसकी वजह इन मामलों की तारीख और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दायरा है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या दिया आदेश?
सुप्रीम कोर्ट ने अपनी विशेष संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए 20 से 25 जुलाई के बीच देशभर में हुए छात्र प्रदर्शनों से संबंधित FIR में आगे की जांच और कार्रवाई पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। अदालत के आदेश के तहत इन मामलों को बंद माना गया है।
हालांकि, दिल्ली के प्रदर्शन स्थल पर मौजूद 2,873 लोगों के खिलाफ अलग FIR दर्ज करने की अनुमति दी गई है, जिनके बारे में गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड होने की बात सामने आई है। यह कार्रवाई केवल प्रदर्शन में शामिल होने के आधार पर नहीं, बल्कि अन्य गंभीर आरोपों के संबंध में की जा सकेगी।
झारखंड में 950 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों पर FIR
JPSC-JSSC परीक्षा के खिलाफ झारखंड में हुए आंदोलन के दौरान रांची और हजारीबाग में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे।
10 अगस्त को विधानसभा मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव के बाद करीब 600 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इनमें लगभग 100 नामजद और करीब 500 अज्ञात प्रदर्शनकारी बताए गए थे।
इसके बाद 21 अगस्त को रांची में हुए टकराव के बाद भी कई FIR दर्ज हुईं। तीन मामलों में 14 नामजद और 200 से अधिक अज्ञात लोगों को आरोपी बनाए जाने की जानकारी सामने आई थी।
अलग-अलग मामलों को मिलाकर आंदोलन से जुड़े 950 से अधिक लोगों के खिलाफ FIR दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
क्या झारखंड के छात्रों की FIR भी खत्म हो जाएगी?
यही सबसे बड़ा सवाल है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसका जवाब सीधे तौर पर हां नहीं है।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट का मौजूदा आदेश 20 से 25 जुलाई के बीच हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों पर लागू है, जबकि झारखंड का JPSC-JSSC आंदोलन और उससे जुड़ी प्रमुख FIR 10 अगस्त और 21 अगस्त समेत बाद की तारीखों में दर्ज हुईं।
इसलिए सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के आधार पर झारखंड में दर्ज सभी FIR को स्वतः रद्द मानना सही नहीं होगा।
आंदोलनकारियों के पास क्या विकल्प हैं?
अगर राज्य सरकार या पुलिस इन मामलों को वापस लेने का फैसला करती है तो उसके लिए संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
वहीं, जिन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR दर्ज है, वे राहत के लिए संबंधित अदालत का रुख कर सकते हैं। प्रत्येक मामले में FIR में लगाए गए आरोप और घटनाक्रम के आधार पर कानूनी स्थिति अलग हो सकती है।
10 अगस्त को बदला था आंदोलन का रुख
JPSC-JSSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ 10 अगस्त को छात्रों ने विधानसभा की ओर मार्च किया था। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी थी। पुलिस की ओर से आंसू गैस और वाटर कैनन के इस्तेमाल की बात सामने आई थी।
इसके बाद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई।
21 अगस्त के घटनाक्रम के बाद भी आंदोलन से जुड़े मामलों में पुलिस कार्रवाई आगे बढ़ी और कई FIR दर्ज होने की जानकारी सामने आई।
अब छात्रों की नजर आगे की कानूनी कार्रवाई पर
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद झारखंड के JPSC-JSSC आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों और छात्र संगठनों की नजर अब इस बात पर है कि राज्य सरकार, पुलिस और संबंधित अदालतें इन FIR को लेकर आगे क्या कदम उठाती हैं।
फिलहाल स्पष्ट स्थिति यही है कि सुप्रीम कोर्ट के मंगलवार के आदेश से झारखंड के JPSC-JSSC आंदोलन से जुड़ी 950 से अधिक FIR स्वतः रद्द नहीं हुई हैं। इन मामलों में राहत के लिए अलग कानूनी प्रक्रिया की जरूरत पड़ सकती है।









