JPSC-JSSC भर्ती विवाद में हाईकोर्ट का बड़ा रुख! 2500+ अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर, CID जांच की धीमी रफ्तार पर कोर्ट ने जताई चिंता

सीलबंद रिपोर्ट देखकर हाईकोर्ट ने कहा- नियुक्त हर अभ्यर्थी को दोषी नहीं माना जा सकता; 18 सितंबर को फिर होगी सुनवाई, अंतरिम राहत फिलहाल जारी

रांची। झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर चल रहे विवाद में मंगलवार को हाईकोर्ट की सुनवाई के दौरान कई अहम बातें सामने आईं। मामले में 2500 से ज्यादा अभ्यर्थियों के भविष्य पर सवाल खड़े होने के बीच अदालत ने CID की जांच की प्रगति का जायजा लिया और राज्य सरकार की ओर से पेश की गई सीलबंद स्टेटस रिपोर्ट का अवलोकन किया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने जांच की गति पर चिंता जताई और कहा कि हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़े मामले को लंबे समय तक अनिश्चितता में नहीं रखा जा सकता।

सीलबंद रिपोर्ट हाईकोर्ट ने खुद देखी

राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने CID की आपराधिक जांच से संबंधित स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष पेश की। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने रिपोर्ट का अवलोकन किया और इसके बाद उसे दोबारा सीलबंद कर रिकॉर्ड में रख दिया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि इस रिपोर्ट की कॉपी याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं को उपलब्ध नहीं कराई जाएगी।

सरकार ने मांगा 4 सप्ताह का समय

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और महाधिवक्ता रोहितश्य रॉय ने अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा।

सरकार की ओर से बताया गया कि आपराधिक जांच अभी जारी है। जांच पूरी तरह आगे बढ़ने के बाद ही मामले में विस्तृत जवाब दाखिल किया जा सकेगा।

हालांकि, हजारों अभ्यर्थियों से जुड़े इस मामले में लंबी जांच और उसके असर को लेकर अदालत ने गंभीरता दिखाई।

हाईकोर्ट ने पूछा- क्या हर नियुक्त अभ्यर्थी दोषी है?

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण सवाल उठाया। अदालत ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितता सामने आने का मतलब यह नहीं है कि नियुक्ति पाने वाला हर अभ्यर्थी दोषी हो।

कुछ अभ्यर्थी पूरी तरह निर्दोष हो सकते हैं और अगर उन्हें किसी कथित गड़बड़ी के कारण नुकसान होता है तो यह गंभीर स्थिति होगी।

इसी आधार पर अदालत ने संकेत दिया कि आपराधिक जांच को उसके स्तर पर आगे बढ़ने दिया जाएगा, जबकि हाईकोर्ट फिलहाल भर्ती विज्ञापनों को रद्द करने से संबंधित सरकारी अधिसूचना की कानूनी स्थिति पर विचार करेगा।

CID जांच की रफ्तार पर कोर्ट की नजर

जस्टिस दीपक रोशन ने सीलबंद रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद जांच की गति पर भी टिप्पणी की। अदालत के अनुसार, शुरुआती दौर में जांच की रफ्तार अच्छी थी, लेकिन बाद में इसकी गति कम होती दिखाई दी।

कोर्ट ने संकेत दिया कि इतने गंभीर मामले में जांच प्रभावी और लगातार गति से आगे बढ़नी चाहिए, ताकि कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान हो सके और निर्दोष अभ्यर्थियों को लंबे समय तक असमंजस में न रहना पड़े।

18 सितंबर को फिर होगी सुनवाई

अब इस मामले में अगली सुनवाई 18 सितंबर को सुबह 10:30 बजे होगी। इस दौरान W.P.(S) No. 6512/2026 समेत संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई की जाएगी।

अदालत ने यह भी संकेत दिया है कि अगर अगली सुनवाई तक सरकार की ओर से आवश्यक निर्देश उपलब्ध नहीं होते हैं, तो महाधिवक्ता कानूनी बिंदुओं पर अदालत की सहायता करेंगे।

मामले में पहले से मिली अंतरिम राहत भी अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी।

हजारों अभ्यर्थियों की निगाहें अब अगली सुनवाई पर

JPSC-JSSC भर्ती विवाद में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि CID जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और हाईकोर्ट भर्ती विज्ञापनों को रद्द करने वाली सरकारी अधिसूचना की कानूनी स्थिति पर क्या फैसला लेता है।

फिलहाल अदालत की टिप्पणी ने उन अभ्यर्थियों के लिए उम्मीद जरूर जगाई है, जो कथित भर्ती अनियमितता के बीच अपने भविष्य को लेकर असमंजस में हैं। अब सबकी नजर 18 सितंबर की सुनवाई पर टिकी है।

 

Anita Nishad

Anita Nishad is a dedicated and insightful journalist currently serving as a key voice at HPBL News. With a deep-rooted passion for storytelling and truth-seeking, Anita has become a trusted name in digital and broadcast journalism, particularly known for her ability to bring grassroots issues to the forefront.

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