सांस लेते ही सीने में उठता है तेज दर्द? इसे गैस समझकर न करें नजरअंदाज, फेफड़ों में खून का थक्का या सिकुड़ने का भी हो सकता है संकेत
गहरी सांस लेने, खांसने या छींकने पर सीने की दाईं तरफ चुभन कई कारणों से हो सकती है। मांसपेशियों में खिंचाव से लेकर निमोनिया और गंभीर फेफड़ों की समस्याओं तक, जानिए किन लक्षणों में तुरंत अस्पताल जाना जरूरी है।

नई दिल्ली। सांस लेते समय सीने में अचानक दर्द होना ऐसी परेशानी है, जिसे हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। खासकर जब गहरी सांस लेने, खांसने, छींकने या शरीर को हिलाने पर दर्द बढ़ने लगे, तो इसे केवल गैस या मांसपेशियों में खिंचाव मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सीने की दाईं तरफ होने वाले दर्द के पीछे सामान्य मांसपेशीय समस्या से लेकर फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारी तक कई कारण हो सकते हैं।
कई बार भारी सामान उठाने, व्यायाम करने या लगातार खांसने के कारण छाती की मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है। वहीं, कुछ मामलों में फेफड़ों के आसपास की झिल्ली में सूजन, निमोनिया, फेफड़ों में खून का थक्का जमना या फेफड़े का अचानक सिकुड़ना भी इसकी वजह हो सकता है। इसलिए दर्द की तीव्रता, उसके शुरू होने के तरीके और साथ दिखाई देने वाले अन्य लक्षणों पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।
सांस लेते समय सीने में दर्द क्यों होता है?
गहरी सांस लेने पर सीने में चुभने या दर्द बढ़ने की स्थिति को चिकित्सकीय भाषा में प्ल्यूरिटिक चेस्ट पेन कहा जाता है। यह छाती की दीवार, मांसपेशियों या फेफड़ों के आसपास मौजूद झिल्ली से जुड़ी समस्याओं में हो सकता है। हालांकि, केवल दर्द की जगह या उसके बढ़ने के तरीके से किसी बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती।
यदि दर्द अचानक शुरू हुआ है, लगातार बना हुआ है या उसके साथ सांस फूलने जैसी परेशानी हो रही है, तो तुरंत चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।
1. मांसपेशियों में खिंचाव भी हो सकता है कारण
सीने के दाईं ओर दर्द होने की एक संभावित वजह मांसपेशियों में खिंचाव है। भारी सामान उठाने, अचानक ज्यादा व्यायाम करने, गलत तरीके से सोने या लगातार खांसने से छाती की मांसपेशियों पर दबाव पड़ सकता है।
ऐसी स्थिति में गहरी सांस लेने, हाथ ऊपर उठाने, शरीर घुमाने या प्रभावित हिस्से को दबाने पर दर्द बढ़ सकता है। आराम करने से कुछ मामलों में राहत मिल सकती है। हालांकि, छाती दबाने पर दर्द होना इस बात की गारंटी नहीं है कि समस्या केवल मांसपेशियों की है। अचानक या तेज दर्द होने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
2. पसलियों में चोट या सूजन से बढ़ सकती है परेशानी
गिरने, टक्कर लगने या किसी शारीरिक गतिविधि के दौरान चोट लगने से पसलियों या उनके आसपास के ऊतकों में दर्द हो सकता है। पसलियों के बीच मौजूद मांसपेशियों या जोड़ के आसपास सूजन होने पर गहरी सांस लेने, खांसने और छींकने के दौरान दर्द बढ़ सकता है।
यदि चोट के बाद तेज दर्द हो, सांस लेने में परेशानी आए या सीने में सूजन दिखाई दे, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें। चोट को मामूली मानकर लगातार दर्द सहना सही नहीं है।
3. फेफड़ों के आसपास की झिल्ली में सूजन
फेफड़ों को ढकने वाली पतली झिल्ली को प्लूरा कहा जाता है। इसमें सूजन होने पर प्ल्यूरिसी नामक स्थिति हो सकती है। इसके कारण गहरी सांस लेने, खांसने या छींकने पर सीने में चुभने जैसा दर्द महसूस हो सकता है।
यह समस्या वायरल संक्रमण या अन्य बीमारियों से जुड़ी हो सकती है। कुछ मामलों में बुखार, खांसी, कमजोरी या सांस फूलने जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं। यदि सीने में दर्द के साथ ये लक्षण मौजूद हों, तो चिकित्सकीय जांच कराने में देरी न करें।
4. निमोनिया और फेफड़ों का संक्रमण
निमोनिया फेफड़ों में होने वाला संक्रमण है। इसमें बुखार, खांसी, बलगम, थकान और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण हो सकते हैं। यदि संक्रमण फेफड़ों के आसपास की झिल्ली को प्रभावित करता है, तो सीने के एक तरफ दर्द भी महसूस हो सकता है।
हर मरीज में सभी लक्षण दिखाई देना जरूरी नहीं है। बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों में लक्षण अलग हो सकते हैं। सांस लेने में परेशानी, लगातार बुखार या बढ़ते सीने के दर्द की स्थिति में जल्द डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
5. फेफड़ों में खून का थक्का जमना हो सकता है गंभीर संकेत
सीने में अचानक दर्द और सांस फूलना कभी-कभी पल्मोनरी एम्बोलिज्म का संकेत हो सकता है। यह गंभीर स्थिति तब होती है, जब खून का थक्का फेफड़ों की किसी रक्त वाहिका में पहुंचकर रक्त प्रवाह को बाधित कर देता है।
इसके संभावित लक्षणों में अचानक सांस लेने में कठिनाई, गहरी सांस के साथ बढ़ने वाला सीने का दर्द, तेज धड़कन, चक्कर आना और खून वाली खांसी शामिल हैं। हाल में सर्जरी होना, लंबे समय तक बिस्तर पर रहना, लंबी यात्रा या पहले खून का थक्का जमने का इतिहास जोखिम बढ़ा सकता है।
यह स्थिति जानलेवा हो सकती है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर घरेलू उपचार आजमाने या दर्द अपने आप ठीक होने का इंतजार करने के बजाय तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
6. फेफड़े का अचानक सिकुड़ना भी हो सकती है वजह
न्यूमोथोरैक्स ऐसी स्थिति है, जिसमें फेफड़े और छाती की दीवार के बीच हवा जमा होने से फेफड़ा आंशिक या पूरी तरह सिकुड़ सकता है। इसमें आमतौर पर एक तरफ अचानक सीने में दर्द और सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
यह समस्या छाती में चोट लगने के बाद या कभी-कभी बिना किसी स्पष्ट कारण के भी हो सकती है। यदि अचानक तेज दर्द शुरू हो और साथ में सांस फूलने लगे, तो इसे आपात स्थिति मानते हुए तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए।
इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
सांस लेते समय सीने में दर्द के साथ कुछ लक्षण दिखाई दें, तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है। इनमें अचानक या बहुत तेज दर्द, सांस लेने में कठिनाई, बेहोशी, चक्कर, ठंडा पसीना, होंठों का नीला पड़ना, खून वाली खांसी या बहुत तेज धड़कन शामिल हैं।
यदि सीने में दबाव या दर्द हाथ, पीठ, गर्दन या जबड़े तक फैल रहा हो, तो इसे भी गंभीरता से लें। ऐसे लक्षण दिल से जुड़ी समस्या सहित कई आपात स्थितियों में हो सकते हैं।
भारत में आपातकालीन सहायता के लिए 112 पर संपर्क किया जा सकता है। गंभीर लक्षण होने पर खुद वाहन चलाकर अस्पताल जाने के बजाय उपलब्ध आपातकालीन सहायता लेना सुरक्षित हो सकता है।
सीने में दर्द होने पर क्या करें?
यदि दर्द हल्का है और हाल में व्यायाम या भारी सामान उठाने के बाद शुरू हुआ है, तब भी उसके कारण का अनुमान लगाकर खुद इलाज शुरू न करें। दर्द दोबारा हो, बना रहे या बढ़ता जाए, तो डॉक्टर से जांच कराएं। अचानक तेज दर्द या सांस लेने में परेशानी होने पर इंतजार न करें।
बिना चिकित्सकीय सलाह के दर्द निवारक या अन्य दवाएं लेने से बचें, खासकर यदि पहले से कोई बीमारी है या आप नियमित दवाएं लेते हैं। डॉक्टर लक्षणों और शारीरिक जांच के आधार पर ऑक्सीजन स्तर की जांच, ईसीजी, छाती का एक्स-रे या अन्य जरूरी परीक्षण कराने की सलाह दे सकते हैं। हर मरीज के लिए सभी जांच जरूरी नहीं होतीं; इसका निर्णय उसकी स्थिति के अनुसार किया जाता है।
जरूरी बात: सांस लेते समय सीने में दर्द हमेशा किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता, लेकिन कुछ मामलों में यह आपात स्थिति का लक्षण हो सकता है। दर्द अचानक या तेज हो, सांस फूल रही हो अथवा साथ में बेहोशी, ठंडा पसीना या खून वाली खांसी हो, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें। समय पर जांच कराना गंभीर जटिलताओं से बचने में मदद कर सकता है।









