पुरुषों की हड्डियों में भी चुपचाप घर कर रही यह बीमारी, मामूली चोट से टूट सकती है हड्डी; इन संकेतों को नजरअंदाज किया तो बढ़ सकता है खतरा

ऑस्टियोपोरोसिस को सिर्फ महिलाओं की बीमारी समझना पड़ सकता है भारी। बढ़ती उम्र, टेस्टोस्टेरोन का कम स्तर, कैल्शियम और विटामिन डी की कमी से पुरुषों में भी कमजोर हो सकती हैं हड्डियां। जानिए शुरुआती संकेत, बचाव के तरीके और कब जरूरी है जांच।

आमतौर पर जब भी ऑस्टियोपोरोसिस यानी हड्डियों के कमजोर होने की बीमारी की बात होती है, तो लोगों के मन में सबसे पहले महिलाओं का ख्याल आता है। खासकर मेनोपॉज के बाद महिलाओं में इस बीमारी का खतरा बढ़ने की चर्चा अधिक होती है। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि पुरुष इससे सुरक्षित हैं। पुरुषों में भी ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों को धीरे-धीरे कमजोर कर सकता है और मामूली गिरावट या हल्की चोट के बाद भी फ्रैक्चर का खतरा बढ़ा सकता है।

इस बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती दौर में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। कई लोगों को हड्डियों की कमजोरी का पता तब चलता है, जब किसी छोटी-सी दुर्घटना में हड्डी टूट जाती है या रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर के कारण पीठ में दर्द और शरीर की लंबाई कम होने जैसी समस्याएं सामने आने लगती हैं। इसलिए पुरुषों के लिए भी उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों की सेहत पर ध्यान देना जरूरी है।

क्या है ऑस्टियोपोरोसिस, जो धीरे-धीरे कमजोर कर देता है हड्डियों को?

ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों से जुड़ी एक ऐसी स्थिति है, जिसमें हड्डियों का घनत्व और उनकी मजबूती कम होने लगती है। स्वस्थ शरीर में पुरानी हड्डियों के ऊतकों के टूटने और नए ऊतकों के बनने की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है। जब पुरानी हड्डियों के टूटने की प्रक्रिया तेज हो जाती है या नई हड्डियों का निर्माण पर्याप्त नहीं हो पाता, तो हड्डियां कमजोर और भुरभुरी होने लगती हैं।

इस स्थिति में रीढ़ की हड्डी, कूल्हे और कलाई में फ्रैक्चर होने का जोखिम बढ़ जाता है। कभी-कभी रीढ़ की हड्डियों में बिना किसी बड़ी दुर्घटना के भी छोटे फ्रैक्चर हो सकते हैं। इनके कारण पीठ में दर्द, लंबाई कम होना या शरीर का आगे की ओर झुकना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

ऑस्टियोपोरोसिस को केवल महिलाओं की बीमारी मानना सही नहीं है। पुरुषों में भी उम्र बढ़ने, हार्मोन में बदलाव, पोषण की कमी और कुछ बीमारियों के कारण इसका जोखिम बढ़ सकता है।

पुरुषों में किन कारणों से कमजोर होने लगती हैं हड्डियां?

पुरुषों में ऑस्टियोपोरोसिस होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें बढ़ती उम्र एक महत्वपूर्ण कारक है। उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों का घनत्व कम हो सकता है, जिससे फ्रैक्चर की आशंका बढ़ जाती है।

टेस्टोस्टेरोन हार्मोन भी पुरुषों की हड्डियों की मजबूती बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसका स्तर कम होने पर हड्डियों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, कैल्शियम और विटामिन डी की कमी भी हड्डियों को कमजोर करने वाले कारकों में शामिल है। कैल्शियम हड्डियों की संरचना के लिए जरूरी है, जबकि विटामिन डी शरीर को कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है।

शारीरिक गतिविधियों की कमी भी हड्डियों की मजबूती को प्रभावित कर सकती है। लंबे समय तक निष्क्रिय रहने और वजन सहने वाले व्यायाम नहीं करने से हड्डियों तथा मांसपेशियों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन भी हड्डियों के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

कुछ बीमारियां और दवाएं भी जोखिम बढ़ा सकती हैं। इनमें थायरॉयड संबंधी समस्याएं, कुछ पाचन संबंधी रोग और लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं का इस्तेमाल शामिल हैं। हालांकि, इन जोखिमों में से कोई एक मौजूद होने का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति को ऑस्टियोपोरोसिस जरूर होगा। सही आकलन के लिए चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।

शरीर देने लगे ये संकेत तो न करें नजरअंदाज

ऑस्टियोपोरोसिस को अक्सर साइलेंट बीमारी कहा जाता है, क्योंकि शुरुआती चरण में हड्डियों के कमजोर होने के बावजूद व्यक्ति को कोई स्पष्ट परेशानी महसूस नहीं हो सकती। बीमारी बढ़ने पर कुछ संकेत दिखाई दे सकते हैं।

पीठ में लगातार या बार-बार दर्द होना रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर या अन्य समस्या का संकेत हो सकता है। समय के साथ लंबाई कम होना और शरीर का आगे की ओर झुकने लगना भी रीढ़ की हड्डियों में बदलाव से जुड़ा हो सकता है।

यदि मामूली गिरावट या हल्की चोट से हड्डी टूट जाए, तो इसे भी गंभीरता से लेना चाहिए। कम चोट लगने पर बार-बार फ्रैक्चर होना हड्डियों की कमजोरी का संकेत हो सकता है।

हालांकि, इन लक्षणों के दूसरे कारण भी हो सकते हैं। केवल लक्षणों के आधार पर ऑस्टियोपोरोसिस की पुष्टि नहीं की जा सकती। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से जांच और उचित सलाह लेना जरूरी है।

हड्डियों को मजबूत रखने के लिए खाने में शामिल करें ये चीजें

हड्डियों की सेहत बनाए रखने के लिए संतुलित आहार महत्वपूर्ण है। भोजन में कैल्शियम से भरपूर चीजें शामिल की जा सकती हैं। दूध, दही, पनीर, रागी, तिल और कुछ हरी पत्तेदार सब्जियां कैल्शियम के अच्छे स्रोत हैं।

विटामिन डी भी हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है, क्योंकि यह शरीर को कैल्शियम का अवशोषण करने में मदद करता है। सुरक्षित तरीके से धूप लेना, संतुलित आहार और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लेना उपयोगी हो सकता है।

इसके साथ पर्याप्त प्रोटीन लेना भी जरूरी है। दालें, दूध, दही, अंडे और अन्य प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थ मांसपेशियों और हड्डियों के स्वास्थ्य में मदद कर सकते हैं। कैल्शियम या विटामिन डी की गोलियां बिना जरूरत और चिकित्सकीय सलाह के अधिक मात्रा में नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि अत्यधिक सेवन से नुकसान भी हो सकता है।

रोजाना की ये आदतें बचा सकती हैं हड्डियों को कमजोर होने से

हड्डियों की मजबूती बनाए रखने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि फायदेमंद हो सकती है। अपनी क्षमता के अनुसार पैदल चलना, सीढ़ियां चढ़ना और वजन सहने वाले व्यायाम हड्डियों तथा मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।

संतुलन सुधारने वाले व्यायाम भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनसे गिरने का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है। बुजुर्गों और पहले फ्रैक्चर झेल चुके लोगों को व्यायाम शुरू करने से पहले डॉक्टर या प्रशिक्षित विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।

धूम्रपान से बचना, शराब का अत्यधिक सेवन नहीं करना और पौष्टिक भोजन लेना भी हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी आदतें हैं। इसके अलावा, घर में फिसलने या ठोकर लगने की आशंका वाले स्थानों को सुरक्षित रखना भी गिरने से होने वाले फ्रैक्चर का जोखिम कम कर सकता है।

किन पुरुषों को करानी चाहिए हड्डियों के घनत्व की जांच?

हर पुरुष को एक ही उम्र में ऑस्टियोपोरोसिस की जांच कराने की जरूरत नहीं होती। जांच का निर्णय उम्र, पहले हुए फ्रैक्चर, अन्य बीमारियों, दवाओं और व्यक्तिगत जोखिम के आधार पर किया जाता है।

अधिक उम्र के पुरुषों, मामूली चोट से फ्रैक्चर झेल चुके लोगों, लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाएं लेने वालों और हड्डियों की कमजोरी के अन्य जोखिम वाले व्यक्तियों को डॉक्टर हड्डियों के घनत्व की जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। इसके लिए डेक्सा (DXA) स्कैन का इस्तेमाल किया जाता है।

जांच में ऑस्टियोपोरोसिस सामने आने पर इलाज व्यक्ति की स्थिति और फ्रैक्चर के जोखिम के अनुसार तय किया जाता है। कुछ लोगों के लिए जीवनशैली में बदलाव और पोषण सुधारना महत्वपूर्ण हो सकता है, जबकि अधिक जोखिम वाले मरीजों को डॉक्टर दवाएं भी दे सकते हैं।

ध्यान रखें: ऑस्टियोपोरोसिस सिर्फ महिलाओं की समस्या नहीं है। पुरुषों में भी यह बीमारी बिना स्पष्ट लक्षणों के बढ़ सकती है। संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, जोखिमों की पहचान और जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय जांच हड्डियों को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 

Anita Nishad

Anita Nishad is a dedicated and insightful journalist currently serving as a key voice at HPBL News. With a deep-rooted passion for storytelling and truth-seeking, Anita has become a trusted name in digital and broadcast journalism, particularly known for her ability to bring grassroots issues to the forefront.

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