अहमदाबाद बम धमकी मामले में विदेशी कनेक्शन के संकेत, बांग्लादेश-पाकिस्तान से ईमेल ऑपरेट होने का शक, दिलजीत दोसांझ के शो भी निशाने पर
स्कूलों, अदालतों और नरेंद्र मोदी स्टेडियम समेत कई जगहों को धमकी मिलने के बाद साइबर क्राइम ब्रांच की जांच तेज, हैक किए गए ईमेल अकाउंट्स की खरीद-फरोख्त का नेटवर्क भी जांच के दायरे में

अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद में स्कूलों, अदालतों और नरेंद्र मोदी स्टेडियम समेत कई महत्वपूर्ण जगहों पर बम धमाके करने की धमकियों के मामले में जांच एजेंसियां संभावित विदेशी कनेक्शन की पड़ताल कर रही हैं। साइबर क्राइम ब्रांच की शुरुआती जांच के मुताबिक, धमकी भरे ईमेल भेजने के लिए इस्तेमाल किए गए कुछ अकाउंट बांग्लादेश और पाकिस्तान से संचालित होने के संकेत मिले हैं। जांच में कथित तौर पर हैक किए गए ईमेल अकाउंट्स की खरीद-फरोख्त करने वाले नेटवर्क का पहलू भी सामने आया है।
पुलिस के अनुसार, धमकी भरे संदेशों में खालिस्तान का जिक्र किया गया था। इसके अलावा पंजाबी गायक दिलजीत दोसांझ के कार्यक्रमों को निशाना बनाने की धमकी भी दी गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर क्राइम ब्रांच केंद्रीय जांच एजेंसियों के साथ मिलकर तकनीकी साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है।
हालांकि, शुरुआती जांच में मिले संकेतों के आधार पर अभी यह अंतिम रूप से स्थापित नहीं हुआ है कि धमकियां किसने भेजीं, इसके पीछे कौन लोग हैं और उनका वास्तविक उद्देश्य क्या था। विदेशी स्थानों से अकाउंट संचालित होने के संकेत मिलना अपने आप में वहां मौजूद किसी व्यक्ति की संलिप्तता का अंतिम प्रमाण नहीं है।
अहमदाबाद में कब और किन जगहों को मिली धमकी?
जांच के मुताबिक, अहमदाबाद में बम धमकी से जुड़े दो प्रमुख मामले सामने आए हैं। पहला मामला 7 अक्टूबर का है, जब दो ईमेल आईडी से धमकी भरे संदेश भेजे गए थे। इन संदेशों में स्कूलों, गुजरात हाई कोर्ट, शहर की अन्य अदालतों और नरेंद्र मोदी स्टेडियम समेत 16 स्थानों पर बम धमाके करने की धमकी दी गई थी।
दूसरा मामला 27 अक्टूबर को सामने आया। इसमें एक अन्य ईमेल अकाउंट से 19 स्थानों को निशाना बनाने की धमकी दी गई। इन स्थानों में 14 स्कूल, सरकारी कार्यालय, अदालतें और नरेंद्र मोदी स्टेडियम शामिल बताए गए हैं।
दोनों मामलों में ईमेल के जरिए लोगों में डर पैदा करने की कोशिश किए जाने की आशंका है। संदेशों में खालिस्तान का उल्लेख होने के साथ दिलजीत दोसांझ के कार्यक्रमों को लेकर भी चेतावनी दी गई थी। पुलिस इन ईमेल के स्रोत, इस्तेमाल किए गए अकाउंट्स और संदेश भेजने वालों की पहचान करने में जुटी है।
बांग्लादेश और पाकिस्तान से ईमेल भेजे जाने के संकेत कैसे मिले?
साइबर क्राइम ब्रांच ने जांच के दौरान धमकी भरे ईमेल के तकनीकी रिकॉर्ड और ईमेल हेडर्स का विश्लेषण किया। ईमेल हेडर्स में संदेश के सर्वर और उसके तकनीकी रास्ते से संबंधित जानकारी हो सकती है। इसके साथ ही ईमेल सेवा प्रदाता से मिली जानकारी के आधार पर भी अकाउंट्स की गतिविधियों की जांच की गई।
पुलिस के अनुसार, पहले मामले में इस्तेमाल किए गए ईमेल अकाउंट्स के बांग्लादेश और पाकिस्तान के रावलपिंडी से संचालित होने के संकेत मिले। दूसरे मामले में बांग्लादेश के रंगपुर और पाकिस्तान के लाहौर से जुड़े तकनीकी संकेतों की जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियां इन संकेतों के आधार पर अकाउंट्स का इस्तेमाल करने वाले लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। साइबर अपराधों में अकाउंट का वास्तविक उपयोगकर्ता, उस पर दर्ज पहचान और तकनीकी रिकॉर्ड में दिखाई देने वाला स्थान अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए ईमेल भेजने वाले व्यक्ति की पहचान स्थापित करने के लिए अतिरिक्त साक्ष्यों और जांच की जरूरत होती है।
हैक किए गए ईमेल अकाउंट्स की खरीद-फरोख्त का मामला
इस जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू कथित तौर पर हैक किए गए जीमेल अकाउंट्स की खरीद-फरोख्त है। साइबर क्राइम ब्रांच को ऐसे नेटवर्क के बारे में जानकारी मिली है, जिसके जरिए पहले से मौजूद या अनधिकृत रूप से हासिल किए गए ईमेल अकाउंट्स दूसरे लोगों तक पहुंचाए जाते थे।
इससे पहले इसी तरह की धमकियों से जुड़े एक मामले में गुजरात पुलिस ने पश्चिम बंगाल से एक आरोपी को गिरफ्तार किया था। उस मामले की जांच में कथित तौर पर हैक किए गए जीमेल अकाउंट्स को बांग्लादेश में मौजूद एक व्यक्ति को बेचने की बात सामने आई थी। इसके बाद इन अकाउंट्स को पाकिस्तान में मौजूद एक अन्य व्यक्ति को क्रिप्टोकरेंसी के बदले बेचे जाने का भी आरोप सामने आया था।
अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि अहमदाबाद में धमकी भरे ईमेल भेजने के लिए क्या इसी तरह के नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया था। साथ ही, अकाउंट्स हासिल करने, उन्हें आगे बेचने और धमकी भरे संदेश भेजने में शामिल लोगों की भूमिकाओं की भी पड़ताल की जा रही है।
दिलजीत दोसांझ के कार्यक्रमों को निशाना बनाने की वजह क्या है?
धमकी भरे ईमेल में पंजाबी गायक दिलजीत दोसांझ के कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया गया था। संदेशों में दिल्ली में 1 नवंबर को होने वाले उनके शो और अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में 21 नवंबर को प्रस्तावित कार्यक्रम में धमाके करने की धमकी दिए जाने की बात सामने आई है। एक संदेश में लोगों को अहमदाबाद के कार्यक्रम में शामिल न होने की चेतावनी भी दी गई थी।
बड़े सार्वजनिक आयोजनों का नाम लेकर धमकी देना लोगों के बीच डर पैदा कर सकता है और आयोजकों तथा सुरक्षा एजेंसियों के सामने अतिरिक्त चुनौती खड़ी कर सकता है। हालांकि, दिलजीत दोसांझ के कार्यक्रमों को ही निशाना बनाने के पीछे क्या वजह थी और धमकी देने वालों का वास्तविक मकसद क्या था, इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है।
जांच एजेंसियां संदेशों की भाषा, उनमें किए गए उल्लेख और ईमेल अकाउंट्स से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही हैं। इन जानकारियों के आधार पर ही धमकी के पीछे की मंशा और संभावित नेटवर्क के बारे में निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।
पुराने ईमेल अकाउंट्स के इस्तेमाल से जांच क्यों जटिल होती है?
जांच में पुराने ईमेल अकाउंट्स के इस्तेमाल का पहलू भी सामने आया है। साइबर अपराधों में किसी दूसरे व्यक्ति के अकाउंट पर अनधिकृत कब्जा कर उसका इस्तेमाल करने से वास्तविक आरोपी की पहचान करना मुश्किल हो सकता है। अकाउंट पर दर्ज नाम जरूरी नहीं कि उसे इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति का ही हो।
ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां ईमेल हेडर्स, लॉगिन रिकॉर्ड, आईपी एड्रेस, अकाउंट रिकवरी से जुड़े विवरण और सेवा प्रदाता से मिलने वाली जानकारी का विश्लेषण करती हैं। जरूरत पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी लिया जा सकता है।
अहमदाबाद के मामले में भी तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि धमकी भरे संदेश किसने भेजे, अकाउंट्स तक उनकी पहुंच कैसे बनी और क्या इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।
क्या धमकियों के पीछे पाकिस्तान में बैठा नेटवर्क है?
साइबर क्राइम ब्रांच की शुरुआती जांच में बांग्लादेश और पाकिस्तान से जुड़े अकाउंट्स के इस्तेमाल के संकेत मिलने की बात कही गई है। पहले के एक संबंधित मामले में भी कथित तौर पर हैक किए गए अकाउंट्स की सीमा पार खरीद-फरोख्त का पहलू सामने आया था। इन तथ्यों के आधार पर जांच एजेंसियां संभावित कनेक्शन की पड़ताल कर रही हैं।
लेकिन फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि अहमदाबाद की सभी धमकियों के पीछे पाकिस्तान या बांग्लादेश में बैठा कोई एक नेटवर्क ही जिम्मेदार है। जांच में सामने आए तकनीकी संकेतों को दूसरे साक्ष्यों से जोड़कर सत्यापित करना जरूरी है।
फिलहाल साइबर क्राइम ब्रांच और केंद्रीय एजेंसियां दोनों मामलों की जांच कर रही हैं। जांच का मुख्य उद्देश्य धमकी भेजने वालों की पहचान करना, कथित ईमेल नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ना और यह पता लगाना है कि अहमदाबाद के स्कूलों, अदालतों, स्टेडियम तथा दिलजीत दोसांझ के कार्यक्रमों को धमकी देने के पीछे कौन लोग शामिल थे।









