बोकारो में विधायक श्वेता सिंह की भूख हड़ताल से बिगड़ी तबीयत, नौवें दिन BP और शुगर लेवल गिरा; विस्थापित युवाओं के हक की लड़ाई पर टिकी नजरें
बोकारो स्टील प्लांट में स्थानीय विस्थापित युवाओं के नियोजन की मांग को लेकर टू टैंक गार्डन में जारी है अनिश्चितकालीन अनशन। डॉक्टरों की निगरानी में हैं कांग्रेस विधायक श्वेता सिंह, आंदोलन स्थल पर पढ़ रही हैं महात्मा गांधी की आत्मकथा और कर रही हैं मां दुर्गा की आरती।

बोकारो। झारखंड के बोकारो में स्थानीय विस्थापित युवाओं के नियोजन और अधिकारों को लेकर चल रहा आंदोलन अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। बोकारो स्टील प्लांट (BSL) में रोजगार की मांग को लेकर विस्थापित अप्रेंटिस संघ के साथ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठीं कांग्रेस विधायक श्वेता सिंह की तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आई है। आंदोलन के नौवें दिन उनके ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल में गिरावट दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है। लगातार उपवास के कारण उनकी सेहत को लेकर परिजन, समर्थक और आंदोलन में शामिल लोग चिंतित हैं।
टू टैंक गार्डन स्थित आंदोलन स्थल पर जारी इस अनशन में विधायक विस्थापित युवाओं के नियोजन की मांग को लेकर डटी हुई हैं। बताया जा रहा है कि डॉक्टरों की टीम उनके स्वास्थ्य पर नजर रख रही है और आंदोलन स्थल पर ही उन्हें ड्रिप के जरिए तरल पदार्थ दिए जा रहे हैं। उनकी बिगड़ती तबीयत के बीच अब इस आंदोलन और प्रबंधन के साथ संभावित बातचीत पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
नौ दिनों से जारी अनशन, स्वास्थ्य पर पड़ने लगा असर
स्थानीय विस्थापित युवाओं को बोकारो स्टील प्लांट में रोजगार देने की मांग लंबे समय से उठती रही है। इसी मुद्दे को लेकर विस्थापित अप्रेंटिस संघ आंदोलन कर रहा है। कांग्रेस विधायक श्वेता सिंह भी आंदोलनकारियों के साथ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठी हैं।
आंदोलन के नौवें दिन उनकी तबीयत बिगड़ने की सूचना सामने आई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, जांच के दौरान उनका ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल काफी कम पाया गया। लगातार उपवास का असर उनके स्वास्थ्य पर दिखाई देने लगा है। चिकित्सक उनकी स्थिति पर निगरानी रख रहे हैं।
लंबे समय तक भोजन नहीं करने से शरीर में कमजोरी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। ऐसे में डॉक्टरों की निगरानी और स्वास्थ्य की नियमित जांच महत्वपूर्ण है। फिलहाल विधायक की स्थिति को लेकर आगे की आधिकारिक चिकित्सकीय जानकारी का इंतजार है।
भूख हड़ताल के बीच पढ़ रही हैं गांधी की आत्मकथा
आंदोलन स्थल पर विधायक श्वेता सिंह की दिनचर्या भी चर्चा में है। जानकारी के अनुसार, वह अनशन के दौरान महात्मा गांधी की आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग’ पढ़ रही हैं। सत्य, अहिंसा और जनहित से जुड़े विचारों के बीच वह विस्थापित युवाओं की मांगों को लेकर अपना आंदोलन जारी रखे हुए हैं।
विधायक के समर्थकों के लिए उनकी यह दिनचर्या आंदोलन के संकल्प से जुड़ी हुई है। एक ओर वह युवाओं के रोजगार और अधिकारों की मांग उठा रही हैं, वहीं दूसरी ओर गांधी की आत्मकथा पढ़कर अपने विचारों और संघर्ष को दिशा देने की कोशिश कर रही हैं।
नवरात्र में आंदोलन स्थल पर मां दुर्गा की आरती
भूख हड़ताल के दौरान विधायक सुबह और शाम आंदोलन स्थल पर मां दुर्गा की आरती भी करती हैं। नवरात्र के दौरान पूजा-पाठ और अनशन साथ जारी रखने की उनकी दिनचर्या ने समर्थकों का ध्यान आकर्षित किया है। आंदोलन स्थल पर आरती के कारण भक्तिमय माहौल भी बना रहता है।
हालांकि, धार्मिक अनुष्ठानों के साथ लंबे समय तक उपवास करने की स्थिति में स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। विधायक की तबीयत बिगड़ने की खबर के बाद उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
परिजन और समर्थक चिंतित, डॉक्टरों की निगरानी जारी
लगातार नौ दिनों तक भूख हड़ताल पर रहने के बाद श्वेता सिंह की तबीयत बिगड़ने से उनके परिजन और समर्थक चिंतित हैं। चिकित्सकों की टीम उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है। आंदोलन स्थल पर ड्रिप के जरिए तरल पदार्थ दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
दूसरी ओर, विधायक विस्थापित युवाओं के नियोजन की मांग पर कायम हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि स्थानीय युवाओं के रोजगार और अधिकारों से जुड़े मुद्दे का समाधान जरूरी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विधायक की बिगड़ती तबीयत के बीच आंदोलन को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
BSL में विस्थापित युवाओं के नियोजन का मुद्दा फिर चर्चा में
बोकारो स्टील प्लांट में स्थानीय विस्थापित युवाओं के नियोजन का सवाल लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। इसी मांग को लेकर विस्थापित अप्रेंटिस संघ आंदोलन कर रहा है और विधायक श्वेता सिंह ने भी इसमें भागीदारी की है।
अब आंदोलन के नौवें दिन विधायक की तबीयत बिगड़ने से मामला और गंभीर हो गया है। एक तरफ विस्थापित युवाओं के रोजगार की मांग है, तो दूसरी तरफ अनशन पर बैठी विधायक का स्वास्थ्य चिंता का विषय बन गया है। सभी की नजर इस बात पर है कि BSL प्रबंधन, प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या नहीं।









