एक रुपये के पुराने नोट के बदले 45 लाख का लालच, फिर 7.93 लाख की चपत! देशभर के 450 साइबर मामलों से जुड़ा नेटवर्क उजागर, दो आरोपी गिरफ्तार
फेसबुक पर पुराने नोट के बदले मोटी रकम देने का झांसा देकर की गई ठगी की जांच में पुलिस को कथित म्यूल अकाउंट नेटवर्क का पता चला; 60 से 70 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन की आशंका, करीब 60 लोगों के बैंक खातों और सिम कार्ड के इस्तेमाल की जांच।

हैदराबाद। एक रुपये के पुराने नोट के बदले 45 लाख रुपये मिलने का लालच एक व्यक्ति को भारी पड़ गया। साइबर ठगों ने कथित तौर पर उसे मोटी रकम देने का भरोसा दिलाकर 7,93,351 रुपये ठग लिए। इस मामले की जांच करते हुए हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने ऐसे नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसमें दूसरे लोगों के बैंक खातों और सिम कार्ड का इस्तेमाल कथित तौर पर साइबर धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा था। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक अन्य आरोपी की तलाश जारी है।
पुलिस की जांच के मुताबिक, इस नेटवर्क का संबंध देशभर में दर्ज लगभग 450 साइबर अपराध मामलों से होने का संदेह है। इनसे जुड़े संदिग्ध लेन-देन का अनुमान 60 करोड़ से 70 करोड़ रुपये के बीच लगाया गया है। हालांकि, इस रकम और सभी मामलों के बीच संबंध की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
फेसबुक पर मिला 45 लाख रुपये का लालच
मामले की शुरुआत 25 सितंबर को मिली शिकायत से हुई। शिकायतकर्ता के अनुसार, साइबर जालसाजों ने फेसबुक के माध्यम से उससे संपर्क किया और दावा किया कि पुराने एक रुपये के नोट के बदले उसे 45 लाख रुपये दिए जाएंगे। मोटी रकम मिलने की उम्मीद में व्यक्ति उनकी बातों में आ गया।
आरोप है कि ठगों ने अलग-अलग तरीकों से उसे कुल 7,93,351 रुपये ट्रांसफर करने के लिए राजी कर लिया। रकम मिलने के बाद भी वादे के मुताबिक भुगतान नहीं किया गया। खुद को ठगा महसूस करने के बाद पीड़ित ने पुलिस से शिकायत की।
शिकायत के आधार पर हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर पैसे के लेन-देन की जांच शुरू की।
बैंक खाते और सिम कार्ड जुटाकर दूसरे राज्यों में भेजने का आरोप
जांच के दौरान पुलिस को कथित म्यूल अकाउंट नेटवर्क के बारे में जानकारी मिली। म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं, जिनका इस्तेमाल खाताधारक की जानकारी या सहमति से अथवा धोखे के जरिए अवैध धन के लेन-देन में किया जा सकता है। साइबर अपराधी अक्सर ठगी से हासिल रकम को अलग-अलग खातों में भेजने के लिए ऐसे खातों का इस्तेमाल करते हैं, ताकि पैसों के वास्तविक स्रोत और लाभार्थियों का पता लगाना मुश्किल हो जाए।
पुलिस के अनुसार, बीदर निवासी रमेश आर्थिक तंगी के कारण अपने परिवार के साथ हैदराबाद आया था और किराए की कार चलाकर गुजारा करता था। इसी दौरान उसका कथित तौर पर साइबर जालसाजों से संपर्क हुआ। जांचकर्ताओं का आरोप है कि रमेश ने एक अन्य आरोपी के साथ मिलकर रामंथपुर और आसपास के क्षेत्रों में छात्रों, डिलीवरी पार्टनर्स तथा अन्य लोगों को कमीशन का लालच दिया।
आरोप है कि करीब 60 से 70 लोगों से बैंक पासबुक, एटीएम और डेबिट कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग से संबंधित जानकारियां तथा सिम कार्ड जुटाए गए। इनका इस्तेमाल कथित तौर पर साइबर धोखाधड़ी के लिए किया जाना था। पुलिस के मुताबिक, कुछ बैंकिंग दस्तावेज और सिम कार्ड कूरियर के माध्यम से हरियाणा में मौजूद सहयोगियों तक भेजे गए।
तीन बैंक खाते खोलकर कमीशन पर देने का आरोप
पुलिस की जांच में अनिल की भूमिका भी सामने आई है। आरोप है कि उसने अलग-अलग बैंकों में तीन बचत खाते खोले और कमीशन के बदले उनकी जानकारी रमेश को सौंप दी। पुलिस का दावा है कि दोनों आरोपी बैंक खातों और सिम कार्ड की आपूर्ति के जरिए साइबर अपराधियों की मदद कर रहे थे।
जांचकर्ताओं को संदेह है कि इन खातों के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों में साइबर ठगी की रकम का लेन-देन किया गया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि किन खातों से कितनी रकम गुजरी, किन लोगों को इसका लाभ मिला और नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की क्या भूमिका थी।
8 अक्टूबर को रामंथपुर से दोनों गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार, एक महत्वपूर्ण सूचना मिलने के बाद इंस्पेक्टर एम. सुरेंद्र के नेतृत्व में टीम ने 8 अक्टूबर को हैदराबाद के अंबरपेट स्थित रामंथपुर इलाके में कार्रवाई की। इस दौरान रमेश और अनिल को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उनके पास से दो मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं।
पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर कमीशन के बदले बैंक खाते और सिम कार्ड जुटाकर साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराने की बात स्वीकार की। पुलिस के अनुसार, उन्हें इस बात की जानकारी थी कि इनका इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी में किया जा सकता है। इन दावों की पुष्टि अब जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
60 से 70 करोड़ रुपये के लेन-देन की जांच जारी
हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस अब इस कथित नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों, मोबाइल फोन, सिम कार्ड और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल कर रही है। पुलिस को संदेह है कि इस नेटवर्क के तार देशभर में दर्ज करीब 450 साइबर अपराध मामलों से जुड़े हो सकते हैं और संदिग्ध लेन-देन की कुल रकम 60 करोड़ से 70 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
एक अन्य आरोपी अभी फरार बताया गया है। पुलिस उसकी तलाश के साथ-साथ यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हरियाणा में मौजूद कथित सहयोगियों और अन्य राज्यों में सक्रिय साइबर अपराधियों के बीच किस तरह संपर्क स्थापित था।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि पुराने नोट, दुर्लभ सिक्कों या किसी वस्तु के बदले लाखों रुपये देने के दावे ऑनलाइन ठगी का जरिया बन सकते हैं। किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते, एटीएम कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी या सिम कार्ड साझा करना गंभीर वित्तीय और कानूनी जोखिम पैदा कर सकता है।









