झारखंड शिक्षक नियुक्ति : हाईकोर्ट में शिक्षक भर्ती याचिका पर हुई सुनवाई, कोर्ट ने दिया ये अहम निर्देश, जानिये कोर्ट ने क्या कहा…

Jharkhand Teacher Recruitment: The High Court heard the petition for teacher recruitment, and issued important instructions. Find out what the court said.

रांची। हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति मामले में हाईकोर्ट कोर्ट में सुनवाई हुई। मीना कुमारी के वाद पर शुक्रवार को हुई झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई पर अहम निर्देश दिये गये हैं। मामला न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत में सूचीबद्ध था, जहां सुनवाई के दौरान वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के गठन को लेकर अहम निर्देश जारी किए गए।

याचिका के दौरान अदालत को यह अवगत कराया गया कि पूर्व न्यायाधीश डॉ. एस.एन. पाठक, जिन्हें पहले वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का दायित्व सौंपा गया था, ने इस जिम्मेदारी का निर्वहन करने में असमर्थता जाहिर की है। इस सूचना के बाद अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए नई व्यवस्था पर विचार किया।

प्रार्थी पक्ष और प्रतिवादी के अधिवक्ताओं को निर्देश दिया कि वे ऐसे पूर्व न्यायाधीशों के नाम सुझाएं, जो वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के सदस्य के रूप में कार्यभार संभालने के लिए सहमत हों। वादी पक्ष के अधिवक्ता शेखर गुप्ता ने बताया कि न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि सुझाए गए नामों पर संबंधित पूर्व न्यायाधीशों से संपर्क कर उनकी सहमति भी प्राप्त की जाए।

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि सहमति देने वाले नामों की सूची न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाए, ताकि यह तय किया जा सके कि मीना कुमारी वाद से संबंधित फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का कार्यभार किसे सौंपा जाए। इस उद्देश्य से अदालत ने मामले को अगली सुनवाई के लिए 27 फरवरी 2026 को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है।

उल्लेखनीय है कि यह मामला वर्ष 2016 में हाईस्कूल शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ा है। उस समय झारखंड कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से कुल 17,572 पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। हालांकि, लंबे समय बीत जाने के बावजूद 23 फरवरी 2024 तक केवल 8,171 पद ही भरे जा सके।

इसी पृष्ठभूमि में हाई कोर्ट ने पूर्व में रिटायर्ड जस्टिस एस.एन. पाठक के नेतृत्व में वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित कर तीन माह के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। कमेटी की सिफारिशों के आधार पर रिक्त पदों को रिट पिटिशनरों के माध्यम से भरने तथा दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की जानी थी।

हालांकि, व्यावहारिक कारणों से कमेटी का गठन नहीं हो सका, जिसके चलते यह मामला पुनः न्यायालय के समक्ष आया। अब डॉ. एस.एन. पाठक द्वारा असमर्थता जताए जाने के बाद कोर्ट नई कमेटी के गठन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

मामले से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि सुप्रीम कोर्ट ने सोनी कुमार प्रकरण में 425 अभ्यर्थियों की नियुक्ति का आदेश दिया था। राज्य सरकार के अनुसार, इनमें से 377 अभ्यर्थियों ने योगदान दे दिया है।

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