झारखंड: मौत भी नहीं तोड़ पाई साथ निभाने का वादा! पति के निधन के महज 12 घंटे बाद पत्नी ने भी छोड़ी दुनिया, एक ही चिता पर हुआ अंतिम संस्कार
झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातू में सामने आई दिल को झकझोर देने वाली घटना, 77 वर्षीय चंद्रकांत कुमार लाल बाबू और 65 वर्षीय कमला देवी की एक के बाद एक मौत से परिवार में पसरा मातम, अंतिम विदाई का दृश्य देख नम हुईं लोगों की आंखें।

रामगढ़। जिंदगी भर सुख-दुख में एक-दूसरे का साथ निभाने वाले पति-पत्नी की अंतिम विदाई ने झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातू में लोगों को भावुक कर दिया। पतरातू मेन रोड से सामने आई इस हृदयविदारक घटना में 77 वर्षीय चंद्रकांत कुमार लाल बाबू के निधन के महज 12 घंटे बाद उनकी 65 वर्षीय पत्नी कमला देवी ने भी दम तोड़ दिया। परिवार अभी पति की मौत के सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि पत्नी के निधन की खबर ने दुख को और गहरा कर दिया। शनिवार को दोनों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
चंद्रकांत कुमार लाल बाबू का शुक्रवार शाम निधन हो गया था। उनके जाने से परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। परिजन इस अपूरणीय क्षति को स्वीकार करने की कोशिश कर ही रहे थे कि करीब 12 घंटे बाद कमला देवी का भी निधन हो गया। एक ही परिवार में इतने कम समय के अंतराल पर दो सदस्यों की मौत से हर कोई स्तब्ध रह गया।
साथ जीने की यादों के बीच एक साथ मिली अंतिम विदाई
चंद्रकांत कुमार लाल बाबू और कमला देवी ने अपने जीवन के कई दशक एक-दूसरे के साथ बिताए थे। वर्षों के साझा जीवन में उन्होंने सुख-दुख और अनेक उतार-चढ़ाव देखे। लेकिन पति के निधन के कुछ ही घंटों बाद कमला देवी की भी मौत हो जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। इस घटना ने परिजनों के साथ-साथ आसपास के लोगों को भी गमगीन कर दिया।
शनिवार को जब दोनों की अंतिम यात्रा एक साथ निकली, तो माहौल बेहद भावुक हो गया। जीवनभर साथ रहने वाले इस दंपती को अंतिम विदाई भी एक साथ दी गई। दोनों का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया। वहां मौजूद लोगों के लिए यह दृश्य बेहद मार्मिक था और कई लोगों की आंखें भर आईं।
पतरातू में घटना की चर्चा, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
पति-पत्नी के एक के बाद एक निधन की खबर पतरातू में चर्चा और संवेदना का विषय बनी हुई है। परिवार के लिए यह ऐसा दुख है, जिसकी भरपाई कर पाना आसान नहीं होगा। कुछ ही घंटों के भीतर दो अपनों को खोने का दर्द परिजनों के चेहरों पर साफ दिखाई दे रहा था।
इस घटना ने एक बार फिर जीवनसाथी के साथ बिताए गए वर्षों, साझा यादों और रिश्तों की अहमियत को भावुक ढंग से सामने ला दिया। चंद्रकांत कुमार लाल बाबू और कमला देवी की अंतिम विदाई ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया।









