झारखंड में फिर खुलेगा निवेश का रास्ता! सरकार दो बड़ी औद्योगिक नीतियां करेगी लॉन्च, रोजगार पर भी फोकस
पुरानी नीतियों की अवधि खत्म होने के बाद नई नीति तैयार करने की कवायद तेज; टेक्सटाइल, गारमेंट, फुटवियर समेत कई सेक्टर में निवेश बढ़ाने की तैयारी।

रांची। झारखंड में औद्योगिक गतिविधियों को नई रफ्तार देने और रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार झारखंड टेक्सटाइल, परिधान एवं फुटवियर नीति और झारखंड औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति को नए सिरे से लागू करने की तैयारी कर रही है।
दोनों पुरानी नीतियों की अवधि समाप्त हो चुकी है। ऐसे में उनके स्थान पर नई नीतियां लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार की कोशिश है कि नई औद्योगिक नीतियों के जरिए राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित किया जाए और नए उद्योगों के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हों।
उद्योग जगत की राय से तैयार होगी नई नीति
नई नीतियों का ड्राफ्ट उद्योग विभाग की ओर से पहले ही सार्वजनिक किया जा चुका है। इसके साथ ही उद्योग जगत और अन्य संबंधित हितधारकों से सुझाव भी मांगे गए थे।
विभाग को प्राप्त सुझावों की समीक्षा के बाद उन्हें प्रस्तावित नीतियों में शामिल करने का फैसला लिया गया है। सरकार चाहती है कि नीति तैयार करते समय केवल निवेश आकर्षित करने पर ही नहीं, बल्कि उद्योगों की व्यावहारिक जरूरतों और निवेशकों की अपेक्षाओं को भी ध्यान में रखा जाए।
अगले पखवाड़े में सामने आ सकती हैं नई नीतियां
विभागीय अधिकारियों के अनुसार दोनों नीतियों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। अगले पखवाड़े तक दोनों नीतियों को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।
नई नीतियों के लागू होने के बाद निवेशकों के लिए झारखंड में उद्योग स्थापित करने और विस्तार करने के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।
टेक्सटाइल से लेकर फुटवियर तक, इन सेक्टरों पर नजर
सरकार की नई पहल से खास तौर पर टेक्सटाइल, गारमेंट और फुटवियर सेक्टर को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी निवेश आकर्षित करने पर जोर दिया जाएगा।
नई इकाइयों की स्थापना और मौजूदा उद्योगों के विस्तार से रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। ऐसे में नई औद्योगिक नीतियों को झारखंड की अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
अब नजर इस बात पर है कि सरकार अंतिम रूप दिए जाने के बाद इन दोनों नीतियों में निवेशकों के लिए क्या-क्या नए प्रावधान और सुविधाएं शामिल करती है।









