सहायक आचार्य भर्ती में फिर बदलेगा रिजल्ट, सुप्रीम कोर्ट ने JSSC का संशोधित परिणाम किया रद्द, नौकरी कर रहे कई शिक्षकों पर लटकेगी तलवार
झारखंड में 26,001 सहायक आचार्य पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश ने हजारों अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ा दी है। अदालत ने JSSC के उस संशोधित परिणाम को निरस्त कर दिया है, जिसके आधार पर 11 हजार से अधिक अभ्यर्थियों की नियुक्ति की जा चुकी है। अब आयोग को चार सप्ताह के भीतर नया रिजल्ट जारी करना होगा।
रांची। झारखंड में सहायक आचार्य नियुक्ति को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से एक बार फिर पूरी चयन प्रक्रिया बदलने की स्थिति बन गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद कई अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रभावित हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े निर्देश के बाद कई अभ्यर्थियों की दिलों की धड़कने बढ़नी तय है।
सुप्रीम कोर्ट ने सहायक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2023 के लिए JSSC की ओर से जारी किए गए संशोधित परिणाम को निरस्त कर दिया है। अदालत ने आयोग को अब चार सप्ताह के भीतर नया परिणाम तैयार कर जारी करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश न्यायमूर्ति उज्जवल भुईंया और न्यायमूर्ति एएस चंदूरकर की पीठ ने अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने कहा कि स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के निर्देश के आधार पर तैयार किया गया संशोधित परिणाम पूर्व में दिए गए न्यायिक निर्देशों के अनुरूप नहीं था।
पहले से नियुक्त शिक्षकों की बढ़ी चिंता
इस आदेश का सबसे बड़ा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ सकता है, जो संशोधित परिणाम के बाद चयनित होकर स्कूलों में योगदान दे चुके हैं। JSSC की अनुशंसा के आधार पर राज्य के अलग-अलग जिलों में 11 हजार से ज्यादा सहायक आचार्यों की नियुक्ति हो चुकी है।
अब नया परिणाम आने के बाद चयन सूची में बदलाव की संभावना है। हालांकि, अभी यह तय नहीं है कि कितने नियुक्त शिक्षकों पर इसका असर पड़ेगा। नए रिजल्ट के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कौन चयनित रहता है और किसका नाम सूची से बाहर होता है। संबंधित पक्षों की ओर से करीब 1,500 से 2,000 अभ्यर्थियों के प्रभावित होने की संभावना बताई जा रही है।
26 हजार से ज्यादा पदों के लिए हुई थी परीक्षा
सहायक आचार्य के कुल 26,001 पदों पर नियुक्ति के लिए JSSC ने परीक्षा आयोजित की थी। इसमें प्राथमिक और मध्य विद्यालयों के लिए अलग-अलग पद शामिल थे। परीक्षा के बाद अगस्त 2025 में परिणाम जारी किया गया था।
बाद में आरक्षित और अनारक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों की पात्रता को लेकर विवाद सामने आया। इसी बीच स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के एक









