झारखंड: “उपायुक्त तत्काल 5 लाख का रुपया का मुआवजा दे” बीआईटी मेसरा छात्र हत्या मामला: हाई कोर्ट से एक आरोपित को जमानत, प्रशासन पर सख्त टिप्पणी
Jharkhand: "Deputy Commissioner should immediately pay compensation of Rs 5 lakh" BIT Mesra student murder case: High Court grants bail to one accused, stern remarks on administration

झारखंड हाई कोर्ट ने बीआईटी मेसरा के छात्र राजा पासवान की हत्या से जुड़े मामले में एक आरोपित निपुन तिर्की को जमानत दे दी है। अदालत ने कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए रांची उपायुक्त को पीड़ित परिवार को पांच लाख रुपये अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया।
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रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस संजय प्रसाद की अदालत ने बीआईटी मेसरा के छात्र राजा पासवान की हत्या के बहुचर्चित मामले में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। कोर्ट ने मामले के एक आरोपित निपुन तिर्की को जमानत प्रदान करते हुए कॉलेज प्रशासन की भूमिका और कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है।
अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट रूप से कहा कि घटना के बाद संस्थान प्रशासन की प्रतिक्रिया और सूचना प्रबंधन में गंभीर खामियां रहीं। न्यायालय ने प्रशासनिक लापरवाही को रेखांकित करते हुए रांची उपायुक्त को राजा पासवान के स्वजनों को पांच लाख रुपये अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया।
आरोपित को जमानत
अदालत ने निपुन तिर्की को 15 हजार रुपये के दो निजी मुचलकों पर रिहा करने का आदेश दिया। निपुन तिर्की, बीआईटी मेसरा का छात्र है और वह 23 नवंबर 2025 से न्यायिक हिरासत में था। जमानत आदेश सुनाते समय अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि मामले के अन्य सह-आरोपितों — मौसम कुमार सिंह, साहिल अंसारी, इरफान अंसारी और अभिषेक कुमार — की जमानत याचिकाएं पूर्व में खारिज की जा चुकी हैं।
जानिये क्या हुई थी घटना
मामले के अनुसार, 14 नवंबर 2024 को बीआईटी मेसरा के पॉलिटेक्निक कॉलेज में फ्रेशर पार्टी का आयोजन किया गया था। इसी दौरान छात्रों के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई। आरोप है कि इस विवाद के क्रम में राजा पासवान के साथ न केवल मारपीट की गई, बल्कि जातिसूचक शब्दों का भी प्रयोग किया गया।
पीड़ित के पिता चंदन पासवान की शिकायत के अनुसार, राजा के शरीर पर लाठी, डंडे और बेल्ट से मारपीट के स्पष्ट निशान पाए गए थे। घटना के अगले दिन रिम्स में उपचार के दौरान राजा पासवान की मौत हो गई।
कॉलेज प्रशासन पर सवाल
हाई कोर्ट ने अपने विस्तृत 23 पन्नों के निर्णय में कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर टिप्पणियां कीं। अदालत ने पाया कि घटना के बाद राजा के परिजनों को वास्तविक स्थिति से अवगत नहीं कराया गया। प्रशासन द्वारा यह बताया गया कि छात्र ने अत्यधिक शराब का सेवन किया था, जबकि न्यायालय के अनुसार, वह दो अलग-अलग मौकों पर हमले का शिकार हुआ था।
अदालत ने कहा कि यदि समय रहते छात्र को बेहतर चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराई जाती, तो संभवतः उसकी जान बचाई जा सकती थी। न्यायालय ने इसे स्पष्ट रूप से प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही में कमी का मामला बताया।
मुआवजा और आगे की प्रक्रिया
अदालत ने रांची उपायुक्त को पांच लाख रुपये अंतरिम मुआवजा तत्काल प्रदान करने का निर्देश दिया। उल्लेखनीय है कि इससे पहले हाई कोर्ट ने अगस्त 2025 में ही बीआईटी मेसरा प्रशासन को 20 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था।
हालांकि, बीआईटी मेसरा ने इस आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है, जहां मामला वर्तमान में लंबित है।









