JPSC Recruitment 2026: झारखंड में नयी भर्तियों पर रोक के बाद वैकल्पिक व्यवस्था की तैयारी, संविदा नियुक्ति के जरिये भरे जा सकते हैं पद
JPSC की 22 परीक्षाएं रद्द और कई परीक्षाएं स्थगित होने से झारखंड में सरकारी नियुक्तियां प्रभावित हैं। 90 मेडिकल फैकल्टी और आयुष चिकित्सकों के पद भी लंबित हैं।

रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आई गड़बड़ियों का असर अब सीधे सरकारी नियुक्ति प्रक्रिया पर दिखाई दे रहा है। शिकायतों के बाद JSSC-JPSC की परीक्षा में लगभग ब्रेक लग चुका है। ये ब्रेक कब तक रहेगा, इसकी उम्मीद अभी फिलहाल है भी नहीं, ऐसे में आशंका इस बात की भी है कि शायद विभागों में कर्मचारियों का टोटा हो जाये। यही नहीं कर्मियों की कमियों को पूरा करने के लिए संविदा या दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की नियुक्ति ना करनी पड़ जाये।
आपको बता दें कि शिकायतों के बाद आयोग की 22 प्रतियोगिता परीक्षाएं रद्द की जा चुकी हैं, जबकि करीब आधा दर्जन परीक्षाओं को फिलहाल स्थगित रखा गया है। इसका परिणाम यह हुआ है कि आयोग से जुड़ी कई महत्वपूर्ण नियुक्ति प्रक्रियाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।JPSC में नियुक्ति प्रक्रिया प्रभावित होने के कारण राज्य के विभिन्न विभाग अब जरूरी पदों को भरने के लिए अनुबंध पर नियुक्ति का विकल्प तलाश रहे हैं।
खासकर स्वास्थ्य विभाग में नियमित नियुक्ति में हो रही देरी के कारण वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने की प्रक्रिया तेज की गई है। सूत्र बताते हैं कि स्वास्थ्य विभाग में वैकल्पिक व्यवस्था के लिए तैयारियां शुरू हो गयी है। माना जा रहा है सरकार जब तक आयोग में अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति पर मुहर नहीं लगाती है, तब तक विभागों को वैकल्पिक व्यवस्था के जरिये ही काम चलाना पड़ सकता है।
मेडिकल कॉलेजों में 90 सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति अटकी
मिली जानकारी के मुताबिक JPSC के माध्यम से जिन महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया प्रभावित हुई है, उनमें मेडिकल कॉलेजों के सुपर स्पेशियलिटी विभागों में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति भी शामिल है। इन पदों पर नियमित नियुक्ति के लिए आयोग पहले ही आवेदन मंगा चुका है। कुल 90 पदों पर नियुक्ति होनी है। हालांकि, राज्य सरकार ने इस परीक्षा को अभी रद्द या स्थगित नहीं किया है, क्योंकि फिलहाल केवल आवेदन मंगाने की प्रक्रिया पूरी हुई है। इसके बावजूद आयोग की मौजूदा स्थिति को देखते हुए परीक्षा के आयोजन में देरी की आशंका बनी हुई है।
फैकल्टी की कमी से जूझ रहे मेडिकल कॉलेज
इधर, मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अनुबंध के आधार पर चिकित्सकों की नियुक्ति की नियमावली तैयार की है। हाल ही में मेडिकल कॉलेजों की समीक्षा के दौरान प्राचार्यों ने शिक्षकों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी की जानकारी विभाग को दी थी।इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने नियमित नियुक्ति में देरी को देखते हुए अनुबंध पर चिकित्सकों की नियुक्ति का सुझाव दिया है। माना जा रहा है कि इससे मेडिकल कॉलेजों में तत्काल जरूरत के पदों को भरने में मदद मिल सकती है।
आयुष चिकित्सकों की नियुक्ति भी लंबे समय से लंबित
JPSC में आयुष चिकित्सकों की नियुक्ति प्रक्रिया भी काफी समय से लंबित है। इसके तहत होम्योपैथी चिकित्सा पदाधिकारी के 137, आयुर्वेद चिकित्सा पदाधिकारी के 207 और यूनानी चिकित्सा पदाधिकारी के 78 पदों पर नियुक्ति की जानी है।इन नियुक्तियों के लंबित रहने से स्वास्थ्य विभाग में मानव संसाधन की कमी का असर कामकाज पर पड़ने की आशंका है।
अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति का भी इंतजार
JPSC की नियुक्ति प्रक्रियाओं में देरी के बीच आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति भी अभी तक नहीं हो सकी है। आयोग के अध्यक्ष का पद 21 जुलाई से रिक्त है। ऐसे में आयोग की कार्यप्रणाली और लंबित नियुक्ति प्रक्रियाओं को लेकर स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के बाद ही आयोग में लंबित प्रतियोगी परीक्षाओं और नियुक्ति प्रक्रियाओं को गति मिलने की उम्मीद है। फिलहाल विभिन्न विभागों में जरूरी पदों को भरने के लिए अनुबंध आधारित नियुक्ति को वैकल्पिक रास्ते के रूप में देखा जा रहा है।









