JSSC-CGL नियुक्ति रद्द होगी या बचेगी? हाईकोर्ट में सरकार और अभ्यर्थियों की बहस पूरी, कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित; अब फैसले पर टिकी हजारों उम्मीदवारों की नजर

सरकार ने बड़े स्तर की कथित अनियमितता और वित्तीय लेन-देन का दिया हवाला, याचिकाकर्ताओं ने पूरी परीक्षा रद्द करने का किया विरोध; हाईकोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें पूरी

रांची। झारखंड हाईकोर्ट में JSSC-CGL नियुक्ति रद्द करने के मामले में गुरुवार को सुनवाई पूरी हो गई। राज्य सरकार समेत सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस मामले में हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार किया जा रहा है। वहीं, JPSC से जुड़े एक अन्य मामले में शुक्रवार को फिर सुनवाई होगी, जिसमें राज्य सरकार की ओर से अपना पक्ष रखा जाएगा।

JSSC-CGL की नियुक्ति रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर लंबे समय से अदालत में सुनवाई चल रही थी। गुरुवार की सुनवाई के दौरान सरकार और याचिकाकर्ताओं की ओर से अपने-अपने पक्ष में विस्तृत दलीलें रखी गईं। दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया।

सरकार ने कहा- नियुक्ति रद्द करने का फैसला उचित

राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और महाधिवक्ता रोहिताश्य राय ने नियुक्ति रद्द करने के फैसले का बचाव किया। सरकार की ओर से परीक्षा में बड़े स्तर पर अनियमितता और कथित वित्तीय लेन-देन का हवाला दिया गया।

पिछली सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से मामले की जांच से संबंधित सीलबंद रिपोर्ट भी अदालत में पेश की गई थी। सरकार ने अदालत को बताया कि मामले में 28 से अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और जांच अभी जारी है।

सरकार की दलील थी कि जब परीक्षा प्रक्रिया में इतने बड़े स्तर पर कथित गड़बड़ी की जांच चल रही हो, तो यह व्यावहारिक रूप से बेहद मुश्किल है कि पूरी प्रक्रिया में शामिल अभ्यर्थियों में से दोषी और निर्दोष उम्मीदवारों को अलग-अलग कर दिया जाए।

राज्य सरकार ने 18 अगस्त की देर रात CID जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर CGL समेत अन्य नियुक्ति परीक्षाओं को रद्द करने के अपने फैसले को उचित ठहराया।

याचिकाकर्ताओं ने कहा- पूरी परीक्षा रद्द करना सही नहीं

दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं ने पूरी परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया रद्द किए जाने का विरोध किया। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव रंजन ने दलील दी कि परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक होने का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण सामने नहीं आया है।

उनकी ओर से यह भी कहा गया कि किसी परीक्षा केंद्र से प्रश्नपत्र लीक होने की बात सामने नहीं आई। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि मामला परीक्षा से पहले संभावित प्रश्नों की जानकारी कुछ लोगों तक पहुंचने से जुड़ा हो सकता है, लेकिन इसके आधार पर पूरी परीक्षा को रद्द करना उचित नहीं माना जा सकता।

नेपाल में संभावित प्रश्न याद करने वाले अभ्यर्थियों का भी जिक्र

सुनवाई के दौरान नेपाल में 28 अभ्यर्थियों द्वारा संभावित प्रश्नों को याद किए जाने का भी उल्लेख किया गया। इनमें से 10 अभ्यर्थियों के सफल होने की बात अदालत के सामने रखी गई।

इन अभ्यर्थियों का परिणाम हाईकोर्ट के आदेश के बाद रोक दिया गया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा था।

इस मामले का हवाला देते हुए याचिकाकर्ताओं ने परीक्षा में कथित अनियमितता के अलग-अलग पहलुओं और उनके प्रभाव को लेकर अपनी दलीलें रखीं।

दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग करने की मांग

याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि पिछली न्यायिक कार्यवाही में दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग करने की संभावना पर चर्चा और निर्देश हुए थे। उनका कहना था कि जिन अभ्यर्थियों के खिलाफ आपराधिक मामले में ठोस स्थिति सामने आती है, उनके मामले को अलग रखते हुए बाकी उम्मीदवारों की नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी दलील दी कि SIT की जांच दो साल से अधिक समय से चल रही है, लेकिन अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है। ऐसे में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि परीक्षा में शामिल कौन-कौन से अभ्यर्थी वास्तव में दोषी हैं और कौन निर्दोष।

पुराने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से JSSC-CGL मामले में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की ओर से पहले पारित किए गए विभिन्न आदेशों का भी हवाला दिया गया।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि पिछली न्यायिक कार्यवाही में दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग करने तथा आपराधिक मामलों की स्थिति के आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से जुड़े पहलुओं पर विचार किया गया था। इसके बावजूद राज्य सरकार ने पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द करने का निर्णय लिया।

अब अदालत के फैसले का इंतजार

JSSC-CGL नियुक्ति रद्द करने के मामले में सरकार और याचिकाकर्ताओं समेत सभी पक्षों की दलीलें पूरी हो चुकी हैं। इसके बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत राज्य सरकार के पूरी नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने के फैसले को बरकरार रखती है या अभ्यर्थियों को राहत देते हुए कोई अलग रास्ता तय करती है।

फिलहाल हजारों अभ्यर्थियों की नजर हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हुई है। अदालत का निर्णय आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि JSSC-CGL की नियुक्ति प्रक्रिया का भविष्य क्या होगा।

वहीं, JPSC से जुड़े मामले में शुक्रवार को फिर सुनवाई होगी। इस दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा जाएगा।

Anita Nishad

Anita Nishad is a dedicated and insightful journalist currently serving as a key voice at HPBL News. With a deep-rooted passion for storytelling and truth-seeking, Anita has become a trusted name in digital and broadcast journalism, particularly known for her ability to bring grassroots issues to the forefront.

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