सड़क हादसों का खौफनाक आंकड़ा, 2024 में झारखंड में 5,196 सड़क हादसों में 4,114 लोगों की मौत; देश में लगातार दूसरे साल तीसरे नंबर पर
झारखंड में हर 100 दुर्घटनाओं पर 79 मौतें

रांची। झारखंड में सड़क दुर्घटनाओं की गंभीरता एक बार फिर चिंता बढ़ाने वाली तस्वीर सामने आई है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में झारखंड में दुर्घटना की गंभीरता 79.2 रही। इसका मतलब है कि राज्य में प्रति 100 सड़क दुर्घटनाओं पर औसतन 79.2 लोगों की मौत दर्ज हुई। इस मानक के आधार पर झारखंड देश में तीसरे स्थान पर रहा। वर्ष 2023 में भी झारखंड 78.5 की दुर्घटना गंभीरता के साथ तीसरे स्थान पर था।
2024 में झारखंड में कुल 5,196 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 4,114 लोगों की मौत हुई। 2023 में राज्य में 5,315 हादसे हुए थे और 4,173 लोगों की जान गई थी। यानी 2024 में हादसों और मौतों की संख्या में मामूली कमी आई, लेकिन प्रति 100 हादसों पर मौतों की गंभीरता का आंकड़ा 78.5 से बढ़कर 79.2 हो गया।
मिजोरम पहले और बिहार दूसरे स्थान पर
दुर्घटना गंभीरता के मामले में 2024 में मिजोरम 93.2 के आंकड़े के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि बिहार 80.5 के साथ दूसरे स्थान पर था। झारखंड 79.2 के साथ तीसरे स्थान पर रहा। 2023 में भी यही तीन राज्य शीर्ष पर थे, हालांकि उस समय मिजोरम का आंकड़ा 90.6, बिहार का 80.6 और झारखंड का 78.5 था।
यहां दुर्घटना गंभीरता को हादसों के प्रतिशत के रूप में नहीं, बल्कि प्रति 100 सड़क दुर्घटनाओं पर मरने वाले लोगों की संख्या के रूप में मापा जाता है। इसलिए झारखंड के 79.2 के आंकड़े का अर्थ यह नहीं है कि 79.2 प्रतिशत हादसे गंभीर थे, बल्कि यह दुर्घटनाओं की जानलेवा गंभीरता का एक सांख्यिकीय मानक है।
देशभर में 2024 में गई 1.77 लाख से ज्यादा जानें
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में देशभर में कुल 4,87,707 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज हुईं और इनमें 1,77,175 लोगों की मौत हुई। इसके अलावा 4,71,441 लोग घायल हुए। 2023 में सड़क हादसों में 1,72,890 लोगों की मौत हुई थी। यानी 2024 में राष्ट्रीय स्तर पर सड़क दुर्घटना से होने वाली मौतों में भी बढ़ोतरी दर्ज हुई।
राष्ट्रीय स्तर पर 2024 में दुर्घटना गंभीरता 36.3 रही, जबकि झारखंड में यह आंकड़ा 79.2 था। इस लिहाज से राज्य का आंकड़ा राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक रहा।
18 से 45 साल की उम्र के लोग बड़ी संख्या में शिकार
सड़क दुर्घटनाओं में युवा और कामकाजी आयु वर्ग की हिस्सेदारी भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2023-24 के दौरान 18 से 25 वर्ष के लोगों की हादसों में हुई मौतों में हिस्सेदारी 19.3 प्रतिशत रही। 25 से 35 वर्ष आयु वर्ग की हिस्सेदारी 23.2 प्रतिशत रही, जो दिए गए आयु वर्गों में सबसे अधिक है।
इसके अलावा 35 से 45 वर्ष आयु वर्ग की हिस्सेदारी 21.6 प्रतिशत, 45 से 60 वर्ष की 17.2 प्रतिशत और 18 वर्ष से कम आयु के लोगों की हिस्सेदारी 5.7 प्रतिशत रही। इससे पता चलता है कि सड़क दुर्घटनाओं का बड़ा असर युवा और कामकाजी आबादी पर पड़ रहा है।
सड़क सुरक्षा संगठनों ने परिवहन विभाग को लिखा पत्र
झारखंड में सड़क दुर्घटनाओं की गंभीरता को लेकर सड़क सुरक्षा से जुड़े संगठनों राइजअप और लाइफ सेवर्स, रांची ने परिवहन विभाग के सचिव राजीव रंजन को पत्र लिखकर सड़क सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग की है। पत्र पर राइजअप के सदस्य ऋषभ आनंद तथा लाइफ सेवर्स, रांची के सदस्य विशाल एच. शाह, मोहित चोपड़ा, पराग श्रीवास्तव और अतुल गेरा के हस्ताक्षर बताए गए हैं।
संगठनों ने जिला स्तर पर सड़क सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने और संबंधित समितियों की नियमित समीक्षा तथा कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। पत्र में सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के निर्देशों और राज्य में सड़क सुरक्षा के लिए लीड एजेंसी से जुड़े प्रावधानों का भी उल्लेख किया गया है।
पार्किंग में लापरवाही भी बन सकती है खतरा
सड़क सुरक्षा के लिहाज से वाहन पार्क करने को लेकर भी सावधानी जरूरी है। वाहनों को निर्धारित पार्किंग जोन या अधिकृत पार्किंग स्थल पर ही खड़ा किया जाना चाहिए। फुटपाथ पर वाहन खड़ा करने से पैदल यात्रियों के लिए रास्ता बाधित होता है और यातायात व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
जेब्रा क्रॉसिंग, पैदल मार्ग, चौराहे, मोड़ और सिग्नल के आसपास पार्किंग से बचना जरूरी है। अस्पताल, स्कूल, सरकारी कार्यालय और फायर स्टेशन के मुख्य गेट के सामने भी वाहन खड़ा नहीं किया जाना चाहिए। पुल, फ्लाइओवर, टनल और अंडरपास पर या उनके भीतर पार्किंग करने से भी यातायात और सुरक्षा संबंधी खतरा पैदा हो सकता है।
संकरी सड़कों पर जहां वाहन खड़ा करने से रास्ता बाधित हो, वहां पार्किंग से बचना चाहिए। इसी तरह नो-पार्किंग या नो-स्टैंडिंग का बोर्ड लगे स्थान पर वाहन खड़ा करना यातायात नियमों का उल्लंघन हो सकता है।
झारखंड के 2024 के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में मामूली कमी के बावजूद हादसों की जानलेवा गंभीरता ऊंची बनी हुई है। ऐसे में सड़क सुरक्षा नियमों का पालन, तेज रफ्तार पर नियंत्रण, सुरक्षित ड्राइविंग और प्रभावी यातायात प्रबंधन दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों को कम करने के लिए अहम पहलू बने हुए हैं।









