न शिक्षक, न अच्छा खाना, न इलाज: सर्वोदय बालिका विद्यालय की छात्राओं ने सड़क पर उतरकर खोला मोर्चा, बोर्ड परीक्षा पर मंडराया संकट
No teachers, no quality food, no medical care: Students of Sarvodaya Girls' School took to the streets in protest; board exams now at risk.

राजधानी के दुबग्गा थाना क्षेत्र स्थित जयप्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय की छात्राओं ने सोमवार को शिक्षकों की कमी और खराब व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर मोर्चा खोल दिया। बड़ी संख्या में छात्राओं ने दुबग्गा बाईपास पर उतरकर धरना-प्रदर्शन किया और सड़क जाम कर दी, जिससे बालागंज की ओर जाने वाली सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ।
छात्राओं का आरोप है कि पिछले 8 महीनों से विद्यालय में फिजिक्स समेत कई मुख्य विषयों के शिक्षक नहीं हैं, जिससे पढ़ाई पूरी तरह से ठप है। 5 महीने बाद बोर्ड की परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं। छात्राओं ने चिंता जताते हुए कहा कि बिना पढ़ाई के परीक्षा में नंबर कम आएंगे, जिससे उनका भविष्य खराब हो सकता है।
“स्कूल में 8 महीने से कई विषयों के शिक्षक नहीं हैं। 5 महीने बाद बोर्ड एग्जाम हैं, पढ़ाई नहीं होगी तो हमारा भविष्य क्या होगा?”
— प्रदर्शनकारी छात्राएं
खराब भोजन और इलाज न मिलने का भी आरोप
छात्राओं ने केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि छात्रावास की बुनियादी व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल उठाए:
- खराब भोजन: हॉस्टल में गुणवत्तापूर्ण खाना नहीं दिया जाता है।
- इलाज की कमी: बीमार पड़ने पर सही चिकित्सा सुविधा नहीं मिलती है।
- अनसुनी शिकायतें: कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
प्रदर्शन के दौरान छात्राओं का गुस्सा चरम पर दिखा। उन्होंने मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी (DM) को मौके पर बुलाने की मांग करते हुए जमकर नारेबाजी की।
14 अगस्त के आश्वासन के बाद फिर क्यों उतरीं सड़क पर
इससे पहले 14 अगस्त को भी छात्राओं ने इन्हीं मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था। उस समय समाज कल्याण विभाग के मंत्री असीम अरुण ने मौके पर पहुंचकर छात्राओं को समझा-बुझाकर और समस्या समाधान का आश्वासन देकर धरना समाप्त कराया था। लेकिन समाधान न होने पर छात्राओं को दोबारा सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा।
मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी
सड़क जाम की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और छात्राओं को शांत कराने के प्रयास में जुट गए। खबर लिखे जाने तक अधिकारी छात्राओं से बातचीत कर यातायात बहाल कराने की कोशिश कर रहे थे।









