Ramdas soren ka jiwan parichay: ग्राम प्रधान से कैबिनेट मंत्री तक पहुंचे थे रामदास सोरेन, जारी हुआ था बॉडी वारंट, जानिए उनके जीवन से जुड़े अनसुने किस्से…

Ramdas soren Biography in Hindi: झारखंड के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन अब इस दुनिया में नहीं रहे। शुक्रवार की देर रात उन्होंने अस्पताल में अंतिम सांसे ली। रामदास सोरेन ने चार दशक तक राजनीति की और झामुमो में संगठन से लेकर सत्ता तक में अहम जिम्मेदारी संभाली। 44 साल की राजनीति में उन्होने ग्राम प्रधान से कैबिनेट मंत्री तक का सफर तय किया। पूरे राजनीतिक जीवन में उनकी पहचान राजनेता के रूप में कम, आंदोलनकारी और समाजसेवी के रूप में ज्यादा रही।

4 दशक से अधिक लंबा उनका राजनीतिक जीवन उतर चढ़ाव से भरा रहा। 62 साल की उम्र में अंतिम सांस लेने वाले रामदास सोरेन सरल, सहज और सामाजिक व्यक्ति थे। वो 1980 में झामुमो से जुड़े थे। उनका राजनीतिक जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा, झारखंड आंदोलन के दौरान शिबू सोरेन, चंपाई सोरेन, सुनील महतो, सुधीर महतो, अर्जुन मुंडा के साथ उन्होंने काफी संघर्ष किया. उनके नाम का बॉडी वारंट तक निकाला गया था।

2024 में हुए झारखंड विधानसभा चुनाव में तीसरी बार घाटशिला से विधायक चुने गये। इसके बाद उन्हें दोबारा कैबिनेट मंत्री बनाया गया। उन्हें स्कूली शिक्षा मंत्री की जिम्मवारी सौंपी गयी। उनके निधन से घाटशिला विधानसभा क्षेत्र की बड़ी आबादी मर्माहत है। रामदास सोरेन झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन और कोल्हान टाइगर चंपाई सोरेन के बेहद करीबी थे। हालांकि चंपई सोरेन के JMM से इस्तीफे के बाद कोल्हान में झामुमो के वही सबसे बड़े लीडर थे। अब उनके निधन से कोल्हान में झामुमो के लिए बड़ा शून्य बन जाएगा।

रामदास सोरेन संथाल आदिवासी थे

रामदास सोरेन का जन्म 1 जनवरी 1963 को हुआ था। वे संथाल आदिवासी समुदाय से आते थे।रामदास सोरेन मूल रूप से घाटशिला प्रखंड के तामपाड़ा गांव के रहने वाले थे। वे जमशेदपुर के घोड़ाबांधा में परिवार के साथ रहते थे। उनके तीन बेटे और एक बेटी हैं। बेटी दिल्ली में बैंक ऑफ इंडिया में मैनेजर हैं, दो बेटे व्यवसाय करते हैं और एक बेटा UPSC की तैयारी में जुटा है।

तीन बार रहे विधायक

रामदास सोरेन ने बड़े नेताओं संग मिलकर अलग झारखंड राज्य के लिए आंदोलन किया था। वो घाटशिला विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 2009, 2019 और 2024 में निर्वाचित हुए।

इन पदों पर रहे रामदास सोरेन

रामदास सोरेन1980 से झारखंड मुक्ति मोर्चा में हैं। वो सबसे पहले गुड़ाबांधा पंचायत अध्यक्ष और बाद में सचिव बने। जमशेदपुर प्रखंड कमेटी सचिव, अनुमंडल कमेटी के सचिव, एकीकृत सिंहभूम जिला में झामुमो के सचिव रहे।90 के दशक में जिला का विभाजन हुआ, तब पूर्वी सिंहभूम के सचिव बने। 10 साल से झामुमो के पूर्वी सिंहभूम जिलाध्यक्ष थे।पार्टी के जिलाध्यक्ष का टर्म ढाई साल का होता है, वे 4 बार अध्यक्ष बने।

ashrita

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