SSC CGL पेपर लीक में खुलने लगीं परतें! 250 से ज्यादा से पूछताछ, 11 गिरफ्तारियों के बाद अब SIT खंगाल रही पूरा नेटवर्क
17 सदस्यीय SIT की जांच में परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों से लेकर सफल अभ्यर्थियों तक पर नजर, लाखों रुपये की कथित सेटिंग और पेपर पहले से उपलब्ध कराने के दावों ने बढ़ाई हलचल

रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) परीक्षा में कथित पेपर लीक का मामला लगातार गहराता जा रहा है। 17 सदस्यीय SIT अब इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। जांच के दायरे में परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों के साथ-साथ सफल अभ्यर्थी भी हैं। CID के मुताबिक, अब तक 250 से अधिक अभ्यर्थियों और संदिग्धों से पूछताछ की जा चुकी है। वहीं पिछले एक महीने में 11 सफल अभ्यर्थियों और परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी ICN के कर्मियों की गिरफ्तारी हुई है।
पूछताछ में सामने आया पेपर लीक का कथित तरीका
SIT की पूछताछ में गिरफ्तार आरोपितों से मिली जानकारी के आधार पर पेपर लीक के कथित नेटवर्क को समझने की कोशिश की जा रही है। जांच एजेंसी के अनुसार, कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर प्रश्न और उत्तर याद करवाए जाने का दावा सामने आया है।
जांच में सामने आए दावे के मुताबिक, 135 प्रश्नों में से 120 प्रश्न परीक्षा में मैच हुए। पूछताछ में बोकारो से लेकर नेपाल तक अभ्यर्थियों को ले जाने और वहां कथित तौर पर प्रश्न-उत्तर रटवाने की जानकारी मिलने की बात कही गई है।
हालांकि, इन दावों की पूरी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
12 से 20 लाख रुपये तक की कथित सेटिंग का आरोप
मामले की जांच के दौरान JPSC से जुड़े एक केस में गिरफ्तार TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी से पूछताछ में JSSC CGL से जुड़ी जानकारी मिलने की बात CID ने कही है।
जांच एजेंसी के अनुसार, उसके कथित बयान में खुद, उसकी पत्नी सुषमा कुमारी और भाई अक्षय तिवारी को परीक्षा में पास कराने के लिए ICN संचालक मिथिलेश सिंह को 12-12 लाख रुपये दिए जाने की बात सामने आई है।
जांच में अलग-अलग अभ्यर्थियों से 12 लाख, 15 लाख और 20 लाख रुपये तक लेकर कथित तौर पर परीक्षा में सेटिंग कराने के आरोप भी सामने आए हैं।
ICN की भूमिका पर क्यों उठ रहे सवाल?
SIT की जांच में परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसियों की भूमिका भी जांच के केंद्र में है। जानकारी के मुताबिक, JSSC CGL परीक्षा के संचालन की जिम्मेदारी वेबेल एजेंसी को मिली थी और ICN को सहयोगी एजेंसी के रूप में जोड़ा गया था।
ICN की भूमिका प्रश्नपत्र की छपाई से लेकर उसके स्ट्रांग रूम तक पहुंचाने की प्रक्रिया में बताई गई है। CID का दावा है कि जांच के दौरान ICN की कथित भूमिका पेपर लीक से जुड़ी सामने आई है।
अब SIT यह पता लगाने में जुटी है कि प्रश्नपत्र कथित तौर पर किस स्तर पर बाहर निकला, उसे किन लोगों तक पहुंचाया गया और पूरे नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था।
पहले की जांच में नहीं मिली थी पेपर लीक की पुष्टि
इस पूरे मामले में पुरानी जांच भी अब चर्चा के केंद्र में है। पूर्व CID जांच के दौरान 16 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उस समय जांच एजेंसी पेपर लीक की पुष्टि नहीं कर सकी थी।
तत्कालीन जांच में यह निष्कर्ष सामने आया था कि पेपर लीक के नाम पर अभ्यर्थियों से अवैध वसूली की गई थी। अब नई SIT जांच में सामने आए बयानों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की दोबारा पड़ताल की जा रही है।
कुंदन कुमार से रिमांड पर होगी पूछताछ
SIT अब गुमला के सिसई प्रखंड के कल्याण पदाधिकारी कुंदन कुमार को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी में है।
जांच एजेंसी के प्रारंभिक निष्कर्षों के मुताबिक, कुंदन कुमार ने कथित तौर पर खुद और अन्य अभ्यर्थियों के लिए एजेंट की भूमिका निभाई और अवैध भुगतान के जरिए परीक्षा में सफलता हासिल करने में मदद की। अब रिमांड के दौरान SIT उससे कथित नेटवर्क और पैसों के लेन-देन से जुड़े सवालों के जवाब तलाशेगी।
पूर्व CID डीजी को लेकर भी सियासत गरम
कथित पेपर लीक की जांच में सामने आए नए दावों के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भाजपा ने पूर्व CID डीजी अनुराग गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है।
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया है कि पूर्व की जांच में पेपर लीक और अनियमितताओं से जुड़े आरोपों को नजरअंदाज किया गया।
फिलहाल पूर्व जांच के निष्कर्ष और मौजूदा SIT जांच में सामने आ रहे दावों के बीच अंतर को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। SIT की जांच अभी जारी है। कथित पेपर लीक की पूरी कड़ी, प्रश्नपत्र के बाहर जाने का वास्तविक तरीका और इसमें शामिल लोगों की भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।









