स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर रेप का आरोप, पॉक्सो कोर्ट के आदेश पर स्वामी सहित अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज होगा

Swami Avimukteshwarananda accused of rape; POCSO court orders case against Swami and others

नाबालिग बच्चों से कथित लैंगिक उत्पीड़न के आरोपों पर जिला अदालत के पॉक्सो कोर्ट ने झूंसी पुलिस को अभियोग पंजीकृत कर निष्पक्ष एवं शीघ्र विवेचना के आदेश दिए हैं। अदालत ने आरोपों को गंभीर प्रकृति का बताते हुए पीड़ितों की पहचान और गरिमा की रक्षा पर विशेष बल दिया है।
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Crime News : माघ मेले से जुड़े एक अत्यंत संवेदनशील और गंभीर मामले में जिला अदालत के पॉक्सो कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। जानकारी के मुताबिक मौनी अमावस्या के दौरान हुई घटना के बाद चर्चा में आए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध बच्चों से कथित कुकर्म के आरोप में मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया गया है।

इस मामले में शनिवार को प्रकरण की सुनवाई करते हुए पॉक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विनोद कुमार चौरसिया ने झूंसी पुलिस को स्पष्ट आदेश दिया कि अभियोग पंजीकृत कर मामले की विवेचना की जाए।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, स्वतंत्र और शीघ्र होनी चाहिए। साथ ही, विवेचना के दौरान पीड़ित बच्चों की पहचान, निजता और गरिमा की रक्षा से जुड़े सभी वैधानिक उपबंधों का सख्ती से पालन किया जाए।

अदालत ने कहा, आरोप गंभीर प्रकृति के
सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि पीड़ित बच्चों के कथन, स्वतंत्र साक्षियों के बयान, पुलिस कमिश्नर द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन तथा जांच के दौरान संकलित सामग्री के परीक्षण से प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर प्रकृति के प्रतीत होते हैं। अदालत ने कहा कि मामले में लैंगिक उत्पीड़न से जुड़े स्पष्ट आरोप शामिल हैं, जो संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आते हैं। ऐसे में अभियोग पंजीकृत कर विधिसम्मत विवेचना आवश्यक है।

पुलिस का पक्ष: आदेश मिलने पर कार्रवाई
उधर, झूंसी के थानाध्यक्ष महेश मिश्रा ने बताया कि अभी तक उन्हें अदालत का आधिकारिक आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि जैसे ही आदेश प्राप्त होगा, नियमानुसार मुकदमा कायम कर विवेचना शुरू कर दी जाएगी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अदालत के निर्देशों के अनुरूप जांच की पूरी प्रक्रिया विधिक दायरे में संचालित की जाएगी।

अर्जी और आरोपों की पृष्ठभूमि
जानकारी के मुताबिक, शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रम्हचारी की ओर से बीते माह न्यायालय में अर्जी प्रस्तुत की गई थी। अर्जी में आरोप लगाया गया था कि माघ मेले के दौरान कुछ नाबालिग लड़कों के साथ कथित रूप से कुकर्म की घटनाएं हुईं।

इस प्रकरण में पीड़ित बच्चों को अदालत में पेश कर उनके बयान भी दर्ज कराए गए थे। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर से विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की थी।

पॉक्सो कानून के तहत जांच का महत्व
अब, जांच प्रतिवेदन और अन्य सामग्री के अवलोकन के बाद अदालत ने अभियोग पंजीकृत करने का आदेश जारी किया है, जिससे मामले ने एक नया कानूनी मोड़ ले लिया है।कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, पॉक्सो (POCSO) कानून के अंतर्गत बच्चों से जुड़े लैंगिक अपराधों में जांच और सुनवाई की प्रक्रिया अत्यंत संवेदनशील मानी जाती है।

इसमें पीड़ितों की पहचान गोपनीय रखना, बयान दर्ज करते समय विशेष सावधानी बरतना तथा शीघ्र न्याय सुनिश्चित करना प्रमुख प्रावधान हैं।

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