VIDEO- पारा टीचर लतीफ अंसारी के संकल्पों की मंत्री दीपिका पांडेय हैं मुरीद, एक्स पर VIDEO पोस्टर कर लिखी ये बात, जानिये कौन हैं शिक्षक लतीफ

VIDEO- Minister Deepika Pandey is a fan of the resolutions of Para Teacher Latif Ansari, wrote this thing by making a VIDEO poster on X, know who is teacher Latif

गोड्डा । एक शिक्षक की नजर जब अपनी कक्षा के छात्रों को नशे के जाल में देखा, तो उन्होंने न केवल शिक्षक धर्म निभाया, बल्कि समाज परिवर्तन की मिसाल भी पेश की। गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट प्रखंड में प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत पारा शिक्षक लतीफ अंसारी ने जब अपनी कक्षा के 5 छात्रों को नशे की गिरफ्त में पाया, तो यह घटना उनके जीवन का मोड़ बन गई।

 

साल 2012 से लतीफ अंसारी ने इस समस्या को व्यक्तिगत चुनौती मानते हुए पूरे राज्य में नशा मुक्ति अभियान शुरू कर दिया। छुट्टियों में वो साइकिल लेकर 100 किलोमीटर तक यात्रा करते हैं, गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करते हैं, युवाओं से मिलते हैं, और नशे की बुरी लत से बाहर निकलने का रास्ता दिखाते हैं।

 

अब तक वे झारखंड के 22 जिलों में साइकिल से भ्रमण कर चुके हैं और सैकड़ों लोगों को नशे की लत से छुटकारा दिला चुके हैं। उनका कहना है, “नशे से लड़ाई अकेले नहीं लड़ी जा सकती। यह पूरे समाज की जिम्मेदारी है।”

 

लतीफ अंसारी की इस निस्वार्थ लड़ाई को समाज की ताक़त तब मिली, जब जनप्रतिनिधि दीपिका पांडेय उनके समर्थन में सामने आईं। उन्होंने लतीफ अंसारी के इस अभियान को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए कहा, “लतीफ ने जुनून से जो आग जलाई है, उसे अब हम सबको मशाल बनाना है।”

 

लतीफ का मानना है कि बच्चों को नशे से दूर रखना सिर्फ एक शिक्षक का काम नहीं, समाज की नैतिक जिम्मेदारी है। उनका संघर्ष आज भी जारी है, और उनकी साइकिल हर उस गाँव की ओर चलती है जहाँ अभी भी नशे की चुप्पी गूंज रही है।

यहां देखें वीडियो 👇 👇 👇 


क्या लिखा दीपिका पांडेय ने

जब एक शिक्षक ने देखा कि बच्चे नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं, तो उन्होंने किताबों से आगे बढ़कर समाज को जागरूक करने की ठानी। लेकिन हर प्रयास को ऊर्जा तब मिलती है, जब कोई विश्वास के साथ कदम से कदम मिलाकर चलता है। इस संघर्ष को मजबूती देने वाला ऐसा ही एक भरोसेमंद साथ मिला उन्हें—एक जनप्रतिनिधि का, जिसने न केवल हौसला बढ़ाया, बल्कि इस मुहिम को सामाजिक आंदोलन बनाने में प्रेरणा और सहयोग भी दिया। गांव-गांव घूमती साइकिल जब नशे के खिलाफ चेतना फैलाती है, तो उसमें उस नेतृत्व की सोच, समर्थन और संकल्प भी सवार होता है, जिसने इस पहल को अकेले पड़ने नहीं दिया। उनका मानना है कि नशे के खिलाफ यह जंग किसी एक व्यक्ति की नहीं, पूरे समाज की है। शिक्षक ने इसे अपने जुनून से आंदोलन में बदला है—अब ज़िम्मेदारी हम सबकी है कि इस आवाज़ को और ताक़त दें, ताकि यह कभी भी कमजोर न पड़े।

ashrita

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