UPSC क्रैक करने के बाद LBSNAA में होने वाली ट्रेनिंग से जुड़े कड़े नियम, जानें क्या होता है जब परीक्षा में फेल हो जाते है IAS-IPS अधिकारी
Strict rules governing the training at LBSNAA after cracking the UPSC exam; find out what happens if IAS and IPS officers fail the course.

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा पास करना किसी भी उम्मीदवार के लिए जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। देश की इस सबसे कठिन परीक्षा को पास करने के बाद उम्मीदवारों के नाम के आगे IAS या IPS तो जुड़ जाता है, लेकिन वे सीधे जमीन पर प्रशासनिक अधिकारी नहीं बन जाते। असली परीक्षा और कड़ा सफर इसके बाद मसूरी स्थित ‘लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी’ (LBSNAA) में शुरू होता है, जहां उन्हें बेहद कड़े प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है।
अकादमी में न सिर्फ किताबी पढ़ाई होती है, बल्कि कई लिखित और व्यावहारिक परीक्षाएं भी ली जाती हैं। ऐसे में अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि यदि कोई नवनियुक्त अधिकारी (प्रोबेशनर) LBSNAA की इन परीक्षाओं में फेल हो जाए, तो क्या उसकी नौकरी चली जाती है? आइए जानते हैं इससे जुड़े नियम क्या कहते हैं।
पढ़ाई के साथ देनी होती हैं कई परीक्षाएं
LBSNAA में प्रोबेशनर्स को प्रशासन, भारतीय संविधान, कानून, देश की अर्थव्यवस्था, लोक प्रशासन (Public Administration) और मैनेजमेंट जैसे जरूरी विषय पढ़ाए जाते हैं। अकादमी में इन विषयों की नियमित परीक्षाएं होती हैं, जिनमें पास होने के लिए तय न्यूनतम अंक (Passing Marks) लाना हर हाल में जरूरी होता है।
स्थानीय भाषा की परीक्षा बनती है सबसे बड़ी चुनौती
ट्रेनिंग के दौरान युवा अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती ‘स्थानीय भाषा’ की परीक्षा को पास करना होता है। नियम के मुताबिक, एक अधिकारी को जो भी राज्य कैडर आवंटित (Allot) किया जाता है, उसे वहां की क्षेत्रीय भाषा सीखनी ही पड़ती है। उदाहरण के लिए, यदि उत्तर भारत के किसी अधिकारी को दक्षिण भारतीय राज्य का कैडर मिलता है, तो उसे वहां की भाषा का टेस्ट पास करना अनिवार्य होता है। पहली बार में कई प्रोबेशनर इस भाषा परीक्षा में असफल भी हो जाते हैं।
फेल होने पर क्या सेवा से निकाल दिया जाता है
अगर कोई IAS या IPS प्रोबेशनर ट्रेनिंग के दौरान किसी परीक्षा या लैंग्वेज टेस्ट में फेल हो जाता है, तो उसे तुरंत नौकरी से नहीं निकाला जाता। अकादमी के नियमों के तहत ऐसे उम्मीदवारों को अपनी कमियों को सुधारने और दोबारा परीक्षा (Re-exam) देने का पूरा मौका मिलता है।
क्या है नियम: सेवा के नियमों के मुताबिक, किसी भी अधिकारी को सर्विस में शामिल होने के 4 साल के भीतर अपनी सभी लंबित (Pending) परीक्षाएं पास करनी होती हैं। अमूमन सभी प्रोबेशनर्स री-एग्जाम में आसानी से सफल हो जाते हैं।
सिर्फ पास होना काफी नहीं, नंबरों से तय होती है ‘सीनियरिटी’
LBSNAA की परीक्षाओं का महत्व सिर्फ पास होने तक सीमित नहीं है, बल्कि ये अंक अधिकारी के पूरे करियर की दिशा तय करते हैं। ट्रेनिंग और परीक्षाओं में मिले अंकों के आधार पर ही पूरे बैच की सीनियरिटी (Seniority) तय की जाती है। भविष्य में मिलने वाले प्रमोशन, मनचाही पोस्टिंग और कई अहम प्रशासनिक फैसलों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को इसका सीधा फायदा मिलता है।
अनुशासनहीनता पर हो सकती है बड़ी कार्रवाई
अकादमी में जितनी अहमियत पढ़ाई की है, उतना ही सख्त वहां का अनुशासन है। यदि कोई अधिकारी बिना ठोस कारण के क्लास से गायब रहता है, सुबह की पीटी (Physical Training) छोड़ता है, तय ड्रेस कोड का पालन नहीं करता या ट्रेनिंग के दौरान मोबाइल-इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का गलत इस्तेमाल करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाता है। ऐसे मामलों में अधिकारियों को आधिकारिक चेतावनी, मेमो जारी करना या परीक्षा के अंक काटने जैसी अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ता है।
बेहद चुनौतीपूर्ण होता है LBSNAA का शेड्यूल
LBSNAA की ट्रेनिंग मानसिक और शारीरिक, दोनों स्तरों पर अधिकारियों को निखारती है। यहां दिन की शुरुआत सुबह-सुबह पीटी, योग और घुड़सवारी (Horse Riding) से होती है। इसके बाद दिनभर कड़े क्लासरूम लेक्चर, ग्रुप एक्टिविटीज और एडमिनिस्ट्रेटिव केस स्टडीज चलती हैं। इसके अलावा, अधिकारियों को ज़मीनी हकीकत और देश की विविधता समझाने के लिए ‘भारत दर्शन’, ‘हिमालयन ट्रेक’ और ‘जिला प्रशिक्षण’ (District Training) जैसे बेहद चुनौतीपूर्ण और जरूरी कार्यक्रमों का हिस्सा बनाया जाता है।









