खुल गया खजाने का दरवाजा: इस पेड़ को उगाकर हो जाएंगे करोड़पति, जानिए इस लगाने के तरीके और करे फिक्स डिपॉजिट

'Fixed Deposit' alongside farming: Farmers are becoming millionaires by growing this tree on their farm boundaries.

खेती-किसानी में लगातार बढ़ती लागत और पारंपरिक फसलों से घटते मुनाफे ने देश के किसानों को अब नए और इनोवेटिव विकल्पों की ओर सोचने पर मजबूर कर दिया है। ऐसे में कई प्रगतिशील किसान एक ऐसी फसल की तरफ रुख कर रहे हैं, जो आने वाले समय में उन्हें बंपर मुनाफा दे सकती है। यह फसल है चंदन की, जिसे दुनिया की सबसे महंगी लकड़ियों में गिना जाता है।

​इस खेती की सबसे खास बात यह है कि इसके लिए किसानों को अपनी पूरी जमीन फंसाने की जरूरत नहीं है। किसान इसे अपने खेतों की मेड़ों (किनारों) पर लगाकर एक सुरक्षित ‘फिक्स डिपॉजिट’ की तरह तैयार कर सकते हैं।

​बिना मुख्य खेती प्रभावित किए डबल कमाई

​अक्सर किसानों को डर रहता है कि लंबी अवधि की फसलें लगाने से उनकी रोजमर्रा की आमदनी रुक जाएगी। लेकिन चंदन की खेती में ऐसा नहीं है। किसान इसे खेत के चारों तरफ किनारों पर लगा सकते हैं, जिससे बीच की पूरी जमीन खाली रहती है। इस बची हुई जमीन पर पहले की तरह ही गेहूं, सरसों, दलहन, तिलहन या धान जैसी पारंपरिक फसलें आसानी से उगाई जा सकती हैं। इससे किसानों की नियमित आय भी बनी रहती है और भविष्य के लिए करोड़ों का फंड भी तैयार हो जाता है।

​कहां और किस मिट्टी में बेहतर होती है ग्रोथ

​एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बेहद रेतीले (रेगिस्तानी) और अत्यधिक बर्फीले इलाकों को छोड़कर देश के लगभग सभी हिस्सों में चंदन की खेती की जा सकती है।

  • सफेद चंदन: इसकी खेती उत्तर भारत के राज्यों में काफी सफल देखी गई है।
  • लाल चंदन: यह दक्षिण भारत के कुछ खास हिस्सों में प्राकृतिक रूप से और बेहतर तरीके से ग्रो करता है।

​इसके लिए अच्छे जल निकासी (Water Drainage) वाली मिट्टी सबसे बेहतरीन मानी जाती है। यह लाल मिट्टी, चट्टानी, पथरीली और चूनेदार जमीन में भी अच्छे से पनप जाता है। बस एक बात का ध्यान रखना जरूरी है कि जमीन में पानी जमा नहीं होना चाहिए।

​पौधा लगाते समय इन बातों का रखें खास ध्यान

​चंदन का पौधा लगाने के लिए वैसे तो कोई भी मौसम चुना जा सकता है, लेकिन नर्सरी से दो से ढाई साल पुराने पौधे लाकर लगाना सबसे बेस्ट माना जाता है।

  • खेत की तैयारी: सबसे पहले खेत की गहरी जुताई करें और तय दूरी पर गड्ढे बनाकर पौधारोपण करें।
  • साफ-सफाई: शुरुआती सालों में पौधों के आसपास खरपतवार (Weeds) न जमने दें, ताकि पौधे को पूरा पोषण मिले।
  • सिंचाई प्रबंधन: चंदन को बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती।बारिश के दिनों में इसकी जड़ों के पास पानी न रुके, इसके लिए मेड़ों को थोड़ा ऊंचा बनाना चाहिए। जरूरत से ज्यादा और लगातार पानी मिलना पौधे को नुकसान पहुंचा सकता है।

​सुरक्षा और बीमारियों से बचाव

​एक आम धारणा है कि चंदन लगाते ही तस्कर या जानवर आ जाएंगे, लेकिन शुरुआती कई सालों तक चंदन के पेड़ में कोई खुशबू नहीं होती। इसलिए शुरुआती दौर में बहुत भारी सुरक्षा की जरूरत नहीं पड़ती। हां, जैसे-जैसे पेड़ पुराना होता है और उसमें खुशबूदार लकड़ी (Heartwood) बनने लगती है, तब खेत की घेराबंदी (Fencing) जरूरी हो जाती है।

एक्सपर्ट टिप: चंदन के पेड़ों में ‘सैंडल स्पाइक’ नाम का एक गंभीर रोग लगता है, जिससे पत्तियां सिकुड़ने लगती हैं और ग्रोथ रुक जाती है। इससे बचाव के लिए एक्सपर्ट्स चंदन के साथ ‘नीम’ का पौधा (या होस्ट प्लांट के रूप में अन्य पौधे) लगाने की सलाह देते हैं, जिससे प्राकृतिक रूप से बीमारियों का खतरा कम हो जाता है।

​12 से 15 साल में करोड़ों का मुनाफा

​चंदन का पेड़ धीरे-धीरे बढ़ता है। व्यावसायिक रूप से इसकी कटाई के लिए 12 से 15 साल का समय सबसे सही माना जाता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि चंदन की सबसे कीमती और सुगंधित लकड़ी उसकी जड़ों में होती है, इसलिए इसे काटने के बजाय जड़ सहित निकाला जाता है।

​कृषि विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर एक एकड़ खेत में सही प्लानिंग और देखभाल के साथ चंदन के पौधे लगाए जाएं, तो मैच्योर होने पर यह किसानों को करोड़ों रुपये तक का मुनाफा दे सकता है। पारंपरिक खेती के साथ यह मॉडल आज के समय में किसानों के लिए एक बेहतरीन लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट साबित हो रहा है।

Chauhan

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