2018 से 2026 तक… भर्ती परीक्षाओं में बार-बार क्यों आया TDPL का नाम? जानिए पूरी कहानी

रांची: झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच एक निजी कंपनी का नाम लगातार चर्चा में है। यह कंपनी है TSR डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड यानी TDPL। कंपनी को 2025 से झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं से जुड़े काम की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन इससे पहले भी इसका नाम उत्तर प्रदेश की कई भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़े विवादों में सामने आ चुका है।

खास बात यह है कि 2018 से 2026 तक अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं और जांचों में TDPL का नाम सामने आता रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इस कंपनी की पूरी कहानी क्या है और सरकारी परीक्षाओं से इसका कनेक्शन इतना लंबा कैसे रहा?

हालांकि, अलग-अलग मामलों में सामने आए आरोपों और जांचों को अदालत में सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता, जब तक संबंधित न्यायिक प्रक्रिया में उनका अंतिम निर्णय न हो।

TDPL क्या है और कंपनी कब बनी?

TDPL उत्तर प्रदेश में रजिस्टर्ड एक निजी कंपनी है। उपलब्ध कॉर्पोरेट रिकॉर्ड के मुताबिक इसका गठन 3 अगस्त 2010 को हुआ था। कंपनी का CIN U72300UP2010PTC041566 बताया गया है और इसका रजिस्टर्ड ऑफिस लखनऊ में है।

कंपनी का काम मुख्य रूप से कंप्यूटर, डेटा प्रोसेसिंग और संबंधित सेवाओं से जुड़ा बताया जाता है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार कंपनी के बोर्ड में राम बीर सिंह और सत्य पाल सिंह डायरेक्टर हैं।

इन दोनों नामों का संबंध पहले भी भर्ती और परीक्षा से जुड़े विवादों में सामने आया है, हालांकि उन मामलों में लगे आरोपों का कानूनी रूप से अंतिम निष्कर्ष अलग-अलग प्रक्रियाओं पर निर्भर करता है।

2018-19 VDO भर्ती में पहली बड़ी चर्चा

TDPL का नाम 2018-19 उत्तर प्रदेश ग्राम विकास अधिकारी (VDO) भर्ती से जुड़े विवाद में सामने आया था।

6 अप्रैल 2021 को उत्तर प्रदेश पुलिस की SIT ने कंपनी के दोनों डायरेक्टर सत्य पाल सिंह और राम बीर सिंह को गिरफ्तार किया था। इस कार्रवाई में राभव लिमिटेड के मालिक राम प्रवेश यादव की गिरफ्तारी की भी बात सामने आई थी।

आरोप भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी से जुड़े थे। इस मामले ने TDPL की भूमिका को लेकर सवाल खड़े किए।

विधानसभा और विधान परिषद भर्ती में भी आया नाम

इसके बाद TDPL की भूमिका 2020-21 में उत्तर प्रदेश विधानसभा और विधान परिषद की विभिन्न पदों की भर्ती परीक्षा में भी सामने आई।

अदालती रिकॉर्ड में परीक्षा आयोजन की जिम्मेदारी TDPL को दिए जाने का उल्लेख मिलता है। बाद में भर्ती प्रक्रिया को लेकर कई आरोप सामने आए। जांच के दौरान कंपनी से जुड़े लोगों के रिश्तेदारों के चयन को लेकर भी सवाल उठे।

रिकॉर्ड में TDPL के डायरेक्टर राम बीर सिंह के भतीजे, भतीजी और बहनोई तथा दूसरे डायरेक्टर सत्य पाल सिंह के भाई के चयन का उल्लेख होने की बात कही गई है। बाद में इस विवाद को लेकर CBI जांच का आदेश भी हुआ।

फिर झारखंड की JPSC परीक्षा तक पहुंचा TDPL का कनेक्शन

TDPL का नाम इसके बाद झारखंड लोक सेवा आयोग की 14वीं सिविल सर्विसेज परीक्षा से जुड़ा।

कंपनी को परीक्षा से संबंधित काम सौंपा गया था। बाद में OMR और रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर शिकायतें सामने आईं और झारखंड CID ने मामले की जांच शुरू की।

जुलाई 2026 में यह मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब JPSC परीक्षा के नतीजों और OMR से जुड़ी प्रक्रियाओं पर सवाल उठे।

21 जुलाई को छापेमारी, अगले दिन गिरफ्तारियां

21 जुलाई 2026 को झारखंड CID और रांची पुलिस ने JPSC और TDPL से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की। जांच एजेंसियों ने कथित तौर पर डिजिटल डाटा और परीक्षा से संबंधित सामग्री जब्त की।

इसके अगले दिन यानी 22 जुलाई को पांच लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई। इनमें शामिल थे:

  1. JPSC की डिप्टी कंट्रोलर श्वेता गुप्ता
  2. TDPL के डायरेक्टर राम बीर सिंह
  3. मोहम्मद उस्मान
  4. मोहम्मद एबाद
  5. अभय कुमार तिवारी

इसके बाद TDPL से जुड़े तीन अन्य कर्मचारियों हेमंत वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह और संजय कुमार की गिरफ्तारी की बात भी सामने आई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस मामले में गिरफ्तार लोगों की संख्या आठ बताई गई।

अभय कुमार तिवारी का क्या है कनेक्शन?

JPSC मामले में अभय कुमार तिवारी का नाम भी अहम है। जांच दस्तावेजों के मुताबिक, मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी को TDPL का मार्केटिंग मैनेजर और ऑफिशियल रिप्रेजेंटेटिव बताया गया है।

फरवरी 2026 की एक शिकायत में भी उन्हें इसी भूमिका में बताए जाने की बात सामने आई थी। यही वजह है कि JPSC मामले में उनकी गिरफ्तारी को TDPL के साथ जोड़कर देखा जा रहा है।

TDPL के कितने कर्मचारी हैं?

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक कंपनी में करीब 210 कर्मचारी काम करते हैं। हालांकि, 2024 की एक जांच के दौरान कंपनी के एक कर्मचारी की ओर से करीब 1,500 लोगों को सरकारी विभागों और संस्थानों में आउटसोर्स किए जाने का दावा भी सामने आया था।

अगर यह आंकड़ा कंपनी की अलग-अलग परियोजनाओं में तैनात कर्मचारियों को दर्शाता है, तो इससे सरकारी संस्थानों के साथ कंपनी के काम का दायरा काफी बड़ा होने का संकेत मिलता है।

उत्तराखंड की परीक्षा प्रक्रिया में भी दिखी मौजूदगी

TDPL का नाम उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) की 2025-26 डिजिटल मूल्यांकन टेंडर प्रक्रिया में बोली लगाने वाली कंपनियों में भी दिखाई देने की बात सामने आई है।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि कंपनी को यह ठेका मिला था या नहीं।

कंपनी के पुराने रिकॉर्ड भी बने चर्चा का विषय

उपलब्ध कॉर्पोरेट रिकॉर्ड के अनुसार TDPL की अधिकृत पूंजी करीब 16 लाख रुपये और पेड-अप कैपिटल 1 लाख रुपये बताई गई है।

रिकॉर्ड में कंपनी की आखिरी AGM 29 सितंबर 2017 को होने और वित्तीय जानकारी के आखिरी अपडेट 31 मार्च 2017 तक होने की जानकारी भी दी गई है। वहीं कॉर्पोरेट रिकॉर्ड में कंपनी का स्टेटस एक्टिव बताया गया है।

आखिर TDPL पर बार-बार क्यों उठ रहे सवाल?

TDPL की पूरी कहानी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि करीब आठ वर्षों के दौरान इसका नाम उत्तर प्रदेश की भर्ती परीक्षाओं से लेकर विधानसभा-विधान परिषद भर्ती और फिर झारखंड की JPSC परीक्षा तक अलग-अलग विवादों और जांचों के संदर्भ में सामने आया।

यह अपने आप में कंपनी के खिलाफ किसी आरोप को साबित नहीं करता, लेकिन सरकारी परीक्षाओं जैसे संवेदनशील काम निजी एजेंसियों को सौंपने की प्रक्रिया पर जरूर सवाल खड़े करता है।

सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या किसी निजी एजेंसी को सरकारी भर्ती परीक्षा की जिम्मेदारी देने से पहले उसके पुराने रिकॉर्ड, वित्तीय स्थिति, तकनीकी क्षमता और सुरक्षा व्यवस्था की पर्याप्त जांच होती है?

और अगर किसी कंपनी का नाम पहले की भर्ती प्रक्रियाओं में विवादों के साथ सामने आ चुका हो, तो नए सरकारी ठेके देने से पहले उसकी पिछली जांचों और रिकॉर्ड की समीक्षा कितनी सख्ती से की जाती है?

JPSC मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ अब इन सवालों के जवाब पर भी सबकी नजर है।

Anita Nishad

Anita Nishad is a dedicated and insightful journalist currently serving as a key voice at HPBL News. With a deep-rooted passion for storytelling and truth-seeking, Anita has become a trusted name in digital and broadcast journalism, particularly known for her ability to bring grassroots issues to the forefront.

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