Sugar Price: चीनी के दाम पर सरकार का बड़ा दांव! 100% इंपोर्ट ड्यूटी हटेगी या घटेगी? त्योहारों से पहले मिल सकती है राहत

Sugar Price: देश में चीनी की बढ़ती कीमतों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। आगामी त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने से पहले घरेलू बाजार में पर्याप्त सप्लाई बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार बड़ा कदम उठा सकती है। माना जा रहा है कि सरकार चीनी पर लगी 100 फीसदी आयात ड्यूटी को कम करने या पूरी तरह खत्म करने के विकल्प पर विचार कर रही है। हालांकि, अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।

अगर सरकार आयात शुल्क में कटौती करती है, तो विदेशी चीनी का आयात बढ़ सकता है। इससे घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ने और कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है। ऐसे में आने वाले त्योहारों से पहले चीनी की कीमतों को लेकर राहत मिल सकती है।

आखिर क्यों बढ़े चीनी के दाम?

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक सरकारी सूत्र ने कहा कि चीनी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी जरूरत से ज्यादा है और इसे नियंत्रित करने के लिए सरकार कई विकल्पों पर विचार कर रही है।

सरकार जिन संभावित उपायों पर चर्चा कर रही है, उनमें चीनी स्टॉक की मात्रा में बदलाव, सीमित आयात की अनुमति, आयात शुल्क में कटौती और मिलों द्वारा घरेलू बाजार में बिक्री के लिए निर्धारित मासिक कोटे में बदलाव शामिल हैं।

हालांकि, सूत्र ने स्पष्ट किया कि इनमें से किसी भी विकल्प पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

महाराष्ट्र में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची कीमत

चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का अंदाजा महाराष्ट्र के प्रमुख कारोबारी केंद्र कोल्हापुर के बाजार से लगाया जा सकता है। यहां अगस्त की शुरुआत से चीनी की थोक कीमतों में करीब 20 फीसदी की तेजी आई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कीमत बढ़कर 100 किलोग्राम के लिए करीब 5,350 रुपये के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई है।

खास बात यह है कि अगले सीजन की नई चीनी बाजार में आने तक घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद होने के बावजूद कीमतों में तेजी देखी जा रही है।

सरकार ने पहले ही व्यापारियों के लिए स्टॉक लिमिट लागू कर रखी है, जिसका उद्देश्य जमाखोरी और सट्टेबाजी पर रोक लगाना है।

क्या सस्ती हो सकती है चीनी?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर सरकार 100 फीसदी आयात शुल्क घटाती या खत्म करती है तो क्या चीनी सस्ती हो जाएगी?

संभावना है कि आयात शुल्क में कटौती के बाद विदेशी चीनी का आयात बढ़े। इससे घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ सकती है और कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक असर अंतरराष्ट्रीय कीमतों, आयात की मात्रा और देश में चीनी के घरेलू उत्पादन पर निर्भर करेगा।

त्योहारों से पहले क्यों बढ़ी सरकार की चिंता?

भारत में अगस्त के अंत से जनवरी तक चीनी की खपत आमतौर पर बढ़ जाती है। इस दौरान दिवाली समेत कई प्रमुख त्योहार आते हैं, जिनमें मिठाइयों और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ती है।

इसके अलावा प्रोसेस्ड फूड और पेय पदार्थों की मांग बढ़ने से भी चीनी की खपत में इजाफा होता है। ऐसे में सरकार त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना चाहती है।

बारिश की कमी ने भी बढ़ाई चिंता

चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे मौसम को लेकर चिंता भी एक वजह मानी जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, अल नीनो जैसी मौसम संबंधी घटनाओं के कारण गन्ने की फसल पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, 2026 के मानसून में अब तक बारिश सामान्य स्तर से 13 फीसदी कम रही है। जून के अंत के आसपास बारिश में कमी 40 फीसदी से ज्यादा थी, जिसके कारण कुछ फसलों की बुआई में भी देरी हुई।

गन्ने की फसल के लिए बारिश महत्वपूर्ण होने के कारण कम बारिश को लेकर बाजार में चिंता बढ़ी है।

अब सरकार के फैसले पर टिकी नजर

चीनी की कीमतों में तेजी और त्योहारी सीजन में बढ़ने वाली मांग को देखते हुए सरकार के सामने सप्लाई और कीमतों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार 100 फीसदी आयात शुल्क में कटौती करती है, इसे पूरी तरह खत्म करती है या कोई दूसरा उपाय अपनाती है।

अगर आयात शुल्क में कटौती का फैसला होता है, तो इसका सीधा असर घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर पड़ सकता है।

Anita Nishad

Anita Nishad is a dedicated and insightful journalist currently serving as a key voice at HPBL News. With a deep-rooted passion for storytelling and truth-seeking, Anita has become a trusted name in digital and broadcast journalism, particularly known for her ability to bring grassroots issues to the forefront.

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