Jharkhand High Court: कोर्ट हिंसा मामले में बड़ा फैसला, सभी जिलों के न्यायिक अधिकारियों को मिलेगी पर्याप्त सुरक्षा

झारखंड हाईकोर्ट ने लातेहार कोर्ट हिंसा मामले में राज्य के सभी जिलों के न्यायिक अधिकारियों को पर्याप्त व्यक्तिगत सुरक्षा देने पर जोर दिया है।

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने लातेहार सिविल कोर्ट परिसर में वर्ष 2022 में हुई हिंसक घटना को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की डबल बेंच ने कहा कि राज्य के सभी जिलों में काम कर रहे न्यायिक अधिकारियों को पर्याप्त व्यक्तिगत सुरक्षा मिलनी चाहिए।

अदालत ने साफ कहा कि सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने के लिए किसी दूसरी लातेहार जैसी घटना का इंतजार नहीं किया जा सकता।हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा केवल उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा का मामला नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध न्यायपालिका की स्वतंत्रता से है।

न्यायिक अधिकारी सुरक्षित होंगे, तभी स्वतंत्र होकर काम कर पाएंगे

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि न्यायिक अधिकारियों को ऐसा माहौल मिलना चाहिए, जहां वे किसी डर, दबाव या धमकी के बिना अपना काम कर सकें।अदालत के अनुसार, न्यायिक अधिकारी अगर खुद को असुरक्षित महसूस करेंगे तो उनके लिए अपने संवैधानिक और न्यायिक दायित्वों को स्वतंत्र रूप से निभाना मुश्किल हो सकता है। इसलिए न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा को गंभीरता से लेना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।

2022 में लातेहार कोर्ट में क्या हुआ था?

यह मामला 10 अक्टूबर 2022 को लातेहार सिविल कोर्ट परिसर में हुई हिंसक घटना से जुड़ा है। उस दिन टाना भगत समुदाय के बड़ी संख्या में लोग कोर्ट परिसर में जबरन प्रवेश कर गए थे।इस दौरान परिसर में नारेबाजी और तोड़फोड़ हुई थी। पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की घटना भी सामने आई थी। हालात इतने बिगड़ गए थे कि अदालत की सामान्य न्यायिक कार्यवाही पूरी तरह प्रभावित हो गई थी।

उस समय के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को अपनी सुरक्षा के लिए एक कमरे में खुद को बंद करके रहना पड़ा था। घटना की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने अगले ही दिन यानी 11 अक्टूबर 2022 को मामले का स्वत: संज्ञान लिया था।

हाईकोर्ट ने खुद शुरू की थी जनहित याचिका

घटना के बाद हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका शुरू की। अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से कोर्ट परिसरों तथा न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर रिपोर्ट मांगी थी।इसके अलावा लातेहार की घटना के बाद उठाए गए कदमों और सुरक्षा से संबंधित खुफिया जानकारी के बारे में भी अदालत ने जानकारी मांगी थी।

लातेहार कोर्ट में अब सुरक्षा व्यवस्था मजबूत

हाईकोर्ट को दी गई रिपोर्ट में बताया गया कि लातेहार कोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है।
इसके तहत—
• कोर्ट परिसर में सशस्त्र सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
• सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
• नजदीक क्विक रिस्पांस टीम उपलब्ध रखी गई है।
• कोर्ट परिसर की चहारदीवारी पर तार की घेराबंदी की गई है।
• संवेदनशील बंदियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी की व्यवस्था की गई है।
• सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए डीएसपी स्तर के अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई है।
इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य किसी भी अप्रिय स्थिति में तुरंत कार्रवाई करना है।

न्यायिक अधिकारियों को बॉडीगार्ड और होमगार्ड

रिपोर्ट के अनुसार न्यायिक अधिकारियों की व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए बॉडीगार्ड, हाउस गार्ड और होमगार्ड की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक न्यायिक अधिकारी को कम से कम एक बॉडीगार्ड और एक होमगार्ड उपलब्ध कराने की जानकारी अदालत के सामने रखी गई।हाईकोर्ट ने इसी तरह की पर्याप्त व्यक्तिगत सुरक्षा राज्य के सभी जिलों में कार्यरत न्यायिक अधिकारियों को उपलब्ध कराने पर जोर दिया है।

लंबित कानूनी कार्रवाई पूरी करने के निर्देश

लातेहार की घटना से जुड़े मामले में जो जांच या अन्य कानूनी कार्रवाई अभी लंबित है, उसे कानून के अनुसार तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने की उम्मीद हाईकोर्ट ने जताई है।अदालत ने जिला अदालतों में मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था को लगातार बनाए रखने पर भी जोर दिया।

क्या है हाईकोर्ट के फैसले का मुख्य संदेश?

इस पूरे मामले में हाईकोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए किसी बड़ी घटना का इंतजार नहीं किया जा सकता।अदालत ने सुरक्षा को न्यायपालिका की स्वतंत्रता से जोड़ते हुए स्पष्ट किया कि न्यायिक अधिकारी जब सुरक्षित माहौल में काम करेंगे, तभी वे बिना किसी डर या बाहरी दबाव के अपने संवैधानिक दायित्वों का पालन कर सकेंगे।

लातेहार कोर्ट में हुई हिंसा के बाद हाईकोर्ट ने अब राज्य के दूसरे जिलों में भी न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीरता बरतने की जरूरत स्पष्ट कर दी है। स्वत: संज्ञान से शुरू की गई जनहित याचिका का हाईकोर्ट ने अब निष्पादन कर दिया है।

 

ashrita

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