RBI Rules: Google Pay, Paytm और PhonePe की बढ़ी टेंशन! Re-KYC के लिए RBI से मांगी 15 सितंबर तक मोहलत
हजारों छोटे दुकानदारों और अनौपचारिक कारोबारियों का Re-KYC अब भी बाकी; फिजिकल वेरिफिकेशन की अनिवार्यता बनी बड़ी चुनौती

नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सख्त Re-KYC नियमों के बीच देश की प्रमुख पेमेंट कंपनियों ने केंद्रीय बैंक से बड़ी राहत की मांग की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Google Pay, Paytm और PhonePe जैसी कंपनियों ने Re-KYC प्रक्रिया पूरी करने के लिए 15 सितंबर तक अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया है।
कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती छोटे दुकानदारों और अनौपचारिक कारोबारियों का दोबारा KYC पूरा करना है। इन कारोबारियों की बड़ी संख्या छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में QR कोड और साउंडबॉक्स के जरिए डिजिटल भुगतान स्वीकार करती है।
हजारों छोटे कारोबारियों का Re-KYC बाकी
रिपोर्ट के मुताबिक, कई पेमेंट कंपनियों के पास अभी भी हजारों छोटे और अनौपचारिक कारोबारियों का Re-KYC पूरा करने का काम बाकी है।
पेमेंट कंपनियां लगातार इन कारोबारियों का सत्यापन कर रही हैं, लेकिन नए और सख्त नियमों के तहत फिजिकल वेरिफिकेशन की जरूरत पड़ने से प्रक्रिया पहले के मुकाबले काफी चुनौतीपूर्ण हो गई है।
खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में कारोबारियों तक पहुंचकर उनका सत्यापन करना कंपनियों के लिए मुश्किल साबित हो रहा है।
दस्तावेजों की कमी भी बनी बड़ी परेशानी
Re-KYC के दौरान एक बड़ी समस्या जरूरी दस्तावेजों की उपलब्धता को लेकर सामने आ रही है। कई छोटे दुकानदारों और अनौपचारिक कारोबारियों के पास KYC प्रक्रिया के लिए आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की बात कही जा रही है।
भले ही इन कारोबारियों से होने वाले डिजिटल पेमेंट का कुल हिस्सा बहुत बड़ा न हो, लेकिन छोटे शहरों और गांवों में डिजिटल भुगतान के विस्तार में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
80% Re-KYC पूरा करने का लक्ष्य
पेमेंट कंपनियों को उम्मीद है कि वे 15 सितंबर तक करीब 80 फीसदी Re-KYC प्रक्रिया पूरी कर लेंगी। हालांकि, बाकी कारोबारियों का सत्यापन पूरा करना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
इसकी एक प्रमुख वजह RBI के नियमों के तहत फिजिकल KYC को लेकर निर्धारित प्रक्रिया है। कंपनियों के अपने कर्मचारियों को ही यह सत्यापन करना होता है और इसे थर्ड-पार्टी एजेंसियों के कर्मचारियों के जरिए कराने की अनुमति नहीं है।
इसी वजह से पेमेंट कंपनियों को पिछले एक साल में अपने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने और फील्ड वेरिफिकेशन का नेटवर्क मजबूत करने की जरूरत पड़ी है।
आखिर क्यों जरूरी है Re-KYC?
RBI की KYC व्यवस्था का उद्देश्य वित्तीय संस्थानों के पास ग्राहकों की सही पहचान और पते की जानकारी सुनिश्चित करना है। इससे फर्जी खातों, धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य अवैध वित्तीय गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद मिलती है।
हालांकि, बड़ी संख्या में छोटे कारोबारियों का दोबारा सत्यापन करना कंपनियों के लिए आसान नहीं है। खासकर ऐसे कारोबारियों के मामले में, जो दूरदराज के इलाकों में हैं या जिनके पास जरूरी दस्तावेजों की कमी है।
कंपनियां क्यों मांग रही हैं अतिरिक्त समय?
पेमेंट कंपनियों का कहना है कि बड़ी संख्या में कारोबारियों का Re-KYC पूरा करने के लिए उन्हें अतिरिक्त समय की जरूरत है। कंपनियां चाहती हैं कि RBI 15 सितंबर तक मोहलत दे, ताकि ज्यादा से ज्यादा कारोबारियों का सत्यापन पूरा किया जा सके।
अब नजर RBI के फैसले पर है कि पेमेंट कंपनियों की इस मांग पर केंद्रीय बैंक क्या रुख अपनाता है।
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