काश पत्नी की बात मान लेते सुदिव्य ! 12.15 से पत्नी बोलती रही, चलिये डाक्टर के पास, पर नहीं माने सुदिव्य सोनू, बोले- गैस है… फिर हो गयी देरी
सुदिव्य सोनू को रात में सीने में दर्द हुआ था। पत्नी ने डॉक्टर के पास चलने को कहा, लेकिन उन्होंने गैस की समस्या बताई। बाद में तबीयत बिगड़ी और अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया।

गिरिडीह: जान चली जाती है और बस रह जाता अफसोस…अफसोस और उसकी यादें। मंत्री सुदिव्य सोनू के निधन के बाद कुछ ऐसी बातें भी सामने आ रही है, जो बयां करता है कि शायद अगर समय रहते सुदिव्य सोनू ने पत्नी की बातें मान लेते, उनकी जान बच जाती। झारखंड के कैबिनेट मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद उनके आखिरी घंटों को लेकर अहम जानकारी सामने आई है।
बताया जा रहा है कि शनिवार रात करीब 12 बजे उन्हें सीने में दर्द की शिकायत हुई थी। पत्नी ने उन्हें डॉक्टर के पास चलने को कहा, लेकिन सुदिव्य सोनू ने इसे गैस की समस्या बताते हुए अस्पताल जाने से मना कर दिया।कुछ देर बाद सीने का दर्द बढ़ने लगा और तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। इसके बाद उन्होंने ड्राइवर से गाड़ी निकालने को कहा और अस्पताल जाने के लिए रवाना हुए।
रास्ते में दो बार हुई उल्टी
परिजनों के मुताबिक, अस्पताल जाते समय रास्ते में सुदिव्य सोनू को दो बार उल्टी हुई। इसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उनकी गंभीर हालत को देखते हुए तुरंत इलाज शुरू किया।अस्पताल पहुंचने के समय उनकी हालत काफी गंभीर थी। मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, उनका ब्लड प्रेशर रिकॉर्ड नहीं हो पा रहा था, जबकि नाड़ी और ऑक्सीजन सैचुरेशन भी लगातार गिर रहा था। उल्टी का पदार्थ फेफड़ों में चले जाने के कारण डॉक्टरों को उनकी श्वासनली की सफाई करनी पड़ी।इसके बाद उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया और डॉक्टरों की टीम ने इलाज शुरू किया।
इलाज के दौरान आया कार्डियक अरेस्ट
मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, इलाज के दौरान सुदिव्य कुमार सोनू को कार्डियक अरेस्ट हुआ। डॉक्टरों ने तत्काल CPR समेत जरूरी चिकित्सा प्रक्रिया शुरू की। उन्हें बचाने के लिए लगातार प्रयास किए गए और विशेषज्ञ हृदय रोग विशेषज्ञ से भी वीडियो कॉल के जरिए सलाह ली गई।इसके बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। उन्हें दूसरी बार कार्डियक अरेस्ट आया। करीब दो घंटे तक CPR जारी रखने के बाद भी डॉक्टर रक्त संचार को दोबारा शुरू नहीं कर सके।
सुबह 4:05 बजे मृत घोषित
तमाम कोशिशों के बावजूद सुदिव्य कुमार सोनू की जान नहीं बचाई जा सकी। मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, 6 सितंबर की सुबह 4:05 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।सुदिव्य सोनू के निधन के बाद उनके आखिरी घंटों से जुड़ी यह जानकारी सामने आने पर परिवार और समर्थकों के बीच शोक का माहौल है। रात में सीने में दर्द के बाद पत्नी ने डॉक्टर के पास जाने की सलाह दी थी, लेकिन शुरुआत में इसे गैस की समस्या माना गया था।
गैस समझकर सीने के दर्द को टालना पड़ा भारी?
सुदिव्य सोनू के साथ हुई घटना के बाद यह सवाल भी चर्चा में है कि आखिर सीने में उठे दर्द को गैस समझकर टालना कितना जोखिम भरा हो सकता है। हालांकि, सुदिव्य सोनू के मामले में यह कहना संभव नहीं है कि अगर वह पहले अस्पताल पहुंचते तो उनकी जान निश्चित रूप से बच जाती।लेकिन उनके निधन से जुड़ा यह घटनाक्रम एक बेहद मार्मिक तस्वीर जरूर सामने रखता है—रात में पत्नी ने अस्पताल चलने को कहा था, लेकिन कुछ समय बाद जब दर्द बढ़ा तो अस्पताल जाने की नौबत आ गई। अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने पूरी कोशिश की, मगर उन्हें बचाया नहीं जा सका।









