शराब की लत बताने के बाद भी कंपनी ने ठुकराया ₹50 लाख का क्लेम, फिर खुली फाइल तो सामने आया बड़ा सच; आयोग ने सुनाया ऐसा फैसला कि इंश्योरेंस कंपनी के उड़ गए होश

पॉलिसी लेने से पहले मेडिकल फॉर्म में शराब पीने की जानकारी दी थी, फिर भी कंपनी ने क्लेम रद्द कर दिया; नागपुर उपभोक्ता आयोग ने 50 लाख के साथ 9% ब्याज और मुआवजे का दिया आदेश

नागपुर: इंश्योरेंस पॉलिसी लेते समय अपनी शराब पीने की आदत की जानकारी देने के बावजूद अगर मौत के बाद कंपनी क्लेम खारिज कर दे तो मामला कहां तक सही है? ऐसे ही एक मामले में नागपुर जिला उपभोक्ता आयोग ने इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ महत्वपूर्ण आदेश दिया है। आयोग ने एडलवाइज टोकियो लाइफ इंश्योरेंस को 50 लाख रुपये का क्लेम 9 फीसदी सालाना ब्याज के साथ देने का आदेश दिया है। इसके अलावा मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना तथा मुकदमे के खर्च के लिए भी अलग से राशि देने को कहा गया है।

पति की मौत के बाद पत्नी ने मांगा था ₹50 लाख का क्लेम

मामला एक महिला के पति की जीवन बीमा पॉलिसी से जुड़ा है। मृतक ने अप्रैल 2021 में इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी। करीब दो साल बाद 26 जनवरी 2023 को उनकी अचानक मौत हो गई। इसके बाद उनकी पत्नी ने इंश्योरेंस कंपनी के सामने 50 लाख रुपये के क्लेम के लिए आवेदन किया।

हालांकि, कंपनी ने क्लेम देने के बजाय पॉलिसी को रद्द कर दिया और सितंबर 2023 में 18,713 रुपये का प्रीमियम रिफंड कर दिया। इसके बाद महिला ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।

कंपनी ने कहा- महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई गई

सुनवाई के दौरान इंश्योरेंस कंपनी ने दावा किया कि मृतक ने अपनी पुरानी शराब की आदत के साथ-साथ हाइपरटेंशन और डायबिटीज जैसी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भी छिपाई थी। कंपनी ने इसे पॉलिसी लेते समय पूरी और सही जानकारी नहीं देने का मामला बताया और इसी आधार पर क्लेम का विरोध किया।

लेकिन सुनवाई के दौरान सामने आए दस्तावेजों ने कंपनी की दलील को कमजोर कर दिया।

मेडिकल फॉर्म में खुद बताई थी शराब पीने की बात

आयोग के सामने पेश दस्तावेजों के मुताबिक, पॉलिसी जारी होने से पहले 20 मई 2021 को भरे गए मेडिकल एग्जामिनेशन फॉर्म में मृतक ने खुद अपनी शराब पीने की आदत के बारे में जानकारी दी थी।

रिकॉर्ड के अनुसार, उन्होंने बताया था कि वह करीब 15 वर्षों से महीने में दो बार लगभग 90 एमएल व्हिस्की का सेवन करते थे। यानी शराब के सेवन की जानकारी पॉलिसी जारी होने से पहले ही इंश्योरेंस कंपनी के रिकॉर्ड में दर्ज थी।

इतना ही नहीं, कंपनी के पैनल डॉक्टर ने पॉलिसी जारी करने से पहले हुए मेडिकल परीक्षण में हाइपरटेंशन या डायबिटीज का उल्लेख नहीं किया था।

आयोग ने क्यों कंपनी के खिलाफ दिया फैसला?

मामले की सुनवाई के बाद आयोग ने माना कि जब शराब के सेवन की जानकारी पॉलिसी जारी होने से पहले ही कंपनी के रिकॉर्ड में मौजूद थी, तो बाद में उसी जानकारी को आधार बनाकर क्लेम खारिज करना उचित नहीं था।

आयोग ने यह भी माना कि हाइपरटेंशन और डायबिटीज को केवल लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां मानकर क्लेम खारिज नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब कंपनी की अपनी मेडिकल जांच में इन बीमारियों का उल्लेख नहीं किया गया था।

₹50 लाख के साथ 9% ब्याज और ₹20 हजार अतिरिक्त

नागपुर जिला उपभोक्ता आयोग ने इंश्योरेंस कंपनी को 50 लाख रुपये का क्लेम 9 फीसदी सालाना ब्याज के साथ देने का आदेश दिया है। ब्याज की गणना 30 सितंबर 2023 से की जाएगी।

इसके अलावा महिला को शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के लिए 10 हजार रुपये तथा मुकदमे के खर्च के लिए 10 हजार रुपये अतिरिक्त देने का निर्देश दिया गया है।

क्या हर मामले में लागू होगा यही नियम?

इस फैसले को समझने वाली सबसे अहम बात यह है कि यह एक विशेष मामले में उपभोक्ता आयोग का फैसला है। इसका मतलब यह नहीं है कि शराब पीने की जानकारी छिपाने पर भी हर स्थिति में इंश्योरेंस क्लेम अनिवार्य रूप से मिल जाएगा। क्लेम का फैसला पॉलिसी की शर्तों, मेडिकल रिकॉर्ड, दी गई जानकारी और मामले के तथ्यों पर निर्भर करता है।

इस मामले में आयोग के फैसले का अहम आधार यह रहा कि शराब के सेवन की जानकारी पॉलिसी जारी होने से पहले ही इंश्योरेंस कंपनी के रिकॉर्ड में मौजूद थी।

Anita Nishad

Anita Nishad is a dedicated and insightful journalist currently serving as a key voice at HPBL News. With a deep-rooted passion for storytelling and truth-seeking, Anita has become a trusted name in digital and broadcast journalism, particularly known for her ability to bring grassroots issues to the forefront.

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